उसकी प्यासी निगाहें आज फिर गली के उस मोड़ पर टिकी थीं, जहाँ से अर्जुन का रोज़ निकलना होता था। रीना, जिसकी शादी को पाँच साल हो चुके थे, भीतर से एक गहरे सूनेपन का शिकार थी। उसका पति रवि, बिज़नेस के चक्कर में या तो बाहर रहता या घर पर भी सिर्फ अपने फोन में गुम। रीना के यौवन की हर कली बे खिली मुरझा रही थी। उसकी ख़ूबसूरती, उसके भरे-पूरे बदन की मदहोशी कोई देखने वाला नहीं था।
तभी एक तेज़ बाइक की आवाज़ आई और अर्जुन, अपनी जीन्स और काली टी-शर्ट में, मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ़ बढ़ आया। उसकी मर्दाना चाल, उसकी आँखों की शरारत रीना को जाने क्यों हर बार मदहोश कर जाती थी। “नमस्ते रीना भाभी,” उसकी आवाज़ में वो धीमी गर्माहट थी जो रीना को भीतर तक सिहरा देती थी। रीना ने बस हल्की सी मुस्कान दी, पर उसकी आँखों ने कुछ और ही कहा। यही तो थी एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से गरमा गरम रिश्ता कहानी** की शुरुआत।
कुछ दिनों से उनकी चोरी-छुपे मुलाकातें बढ़ने लगी थीं। कभी मंदिर के बहाने, कभी सब्ज़ी मंडी में। उनकी निगाहें आपस में मिलतीं और एक बिजली सी दौड़ जाती। एक दोपहर, रवि के बाहर जाने के बाद, रीना ने हिम्मत करके अर्जुन को घर बुला लिया। “कोई देख न ले,” रीना ने काँपती आवाज़ में कहा, पर उसकी आँखों में लालच साफ दिख रहा था।
जैसे ही अर्जुन घर में दाखिल हुआ, रीना ने दरवाज़ा बंद कर दिया और खुद को उसकी बाहों में पाया। अर्जुन ने एक पल की भी देरी न करते हुए रीना के अधरों पर अपने होंठ रख दिए। ये किस इतना गहरा था कि रीना की सारी हया हवा हो गई। उसकी ज़ुबान अर्जुन की ज़ुबान से मिल गई और वो पूरी तरह से पिघल गई। अर्जुन के हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी साड़ी के भीतर घुस गए और उसने रीना के मुलायम नितंबों को ज़ोर से भींच लिया।
“कितने दिन हो गए तुम्हें महसूस किए हुए, रीना,” अर्जुन की आवाज़ साँसों की तरह गर्म और तीव्र थी। उसने रीना को गोद में उठा लिया और सीधे बेडरूम की तरफ बढ़ गया। रीना की साड़ी कब उसके बदन से फिसल गई, उसे पता ही न चला। अर्जुन ने रीना को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसकी नज़रें रीना के उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं, जो उसके ब्रा में कसे हुए साँसें ले रहे थे। अर्जुन ने एक झटके में उसकी ब्रा उतार दी और रीना के सुडौल स्तन आज़ाद हो गए। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे ऐसे चूसने लगा मानो कोई प्यासा बच्चा हो। रीना के मुँह से दर्द और pleasure की मिली-जुली आह निकली। उसके हाथ अर्जुन के बालों को कस कर पकड़ लिए थे।
अर्जुन की ज़ुबान उसके गले से होती हुई, उसके नाभि कुंड तक जा पहुँची। रीना का पूरा बदन आग की भट्टी बन चुका था। उसकी पैंटी पहले से ही गीली थी। अर्जुन ने धीरे से उसे भी उतार फेंका। रीना के सामने आज वो बेझिझक, बेपर्दा थी। अर्जुन ने रीना की टाँगों को उठाया और उन्हें चौड़ा कर दिया। उसकी नज़रें रीना की कामुकता पर टिक गईं। “तुम कितनी ख़ूबसूरत हो रीना,” उसने धीमी आवाज़ में कहा और उसकी उँगलियाँ रीना की कामवासना पर जा टिकीं। रीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी। अर्जुन की उँगलियों का स्पर्श उसे बेकाबू कर रहा था।
अब और इंतज़ार नहीं हो रहा था। रीना ने अर्जुन को अपने ऊपर खींचा। अर्जुन ने अपनी पैंट खोली और अपनी मर्दानगी को रीना के सामने कर दिया। रीना ने अपनी कमर उठाई और एक ही झटके में अर्जुन को अपने भीतर समा लिया। “आहह्ह्ह्हह…” रीना की ज़ोरदार चीख कमरे में गूँज उठी। ये दर्द भी था और चरम सुख की शुरुआत भी। अर्जुन ने रीना के होंठों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया ताकि उसकी आवाज़ बाहर न जाए।
दोनों की साँसें तेज़ हो चुकी थीं। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें और उनकी मदहोश कर देने वाली आहें गूँज रही थीं। अर्जुन की हर थाप रीना को गहराई तक भेद रही थी। रीना भी कमर उचका-उचका कर अर्जुन का पूरा साथ दे रही थी। उसके भीतर की वर्षों की प्यास आज बुझ रही थी। अर्जुन ने अपनी गति और तेज़ कर दी। रीना ने अपनी टाँगों से अर्जुन की कमर को कस कर जकड़ लिया। “अर्जुन… और तेज़… मुझे और चाहिए…” रीना फुसफुसाई।
और फिर, एक आख़िरी ज़ोरदार धक्के के साथ, दोनों के जिस्मों में एक ज़बरदस्त थरथराहट हुई। रीना ने ज़ोर से अर्जुन को जकड़ लिया और उसके नाम की पुकार के साथ, वो चरम सुख के अथाह सागर में डूब गई। अर्जुन भी रीना के भीतर ही अपने आप को खाली कर गया। दोनों का शरीर पसीने से भीगा हुआ था, एक-दूसरे में लिपटा हुआ, और गहरी साँसें ले रहा था।
आज रीना को महसूस हुआ था कि वो जी रही है, उसका बदन जागृत हुआ था। उसकी आत्मा तृप्त हुई थी। उसने अर्जुन को कसकर गले लगा लिया। हाँ, ये एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से गरमा गरम रिश्ता कहानी** थी, जो शायद आज के बाद भी जारी रहेगी। आज उसे अपने भीतर एक नई ऊर्जा, एक नई संतुष्टि का एहसास हुआ था।
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