प्रिया ने दरवाज़ा खोला और रोहन को सामने देख, उसकी साँसें अटक सी गईं। सालों बाद, उनके बीच का पुराना जादू आज भी बरकरार था, बल्कि और भी प्रगाढ़ हो चुका था। शाम के मंद प्रकाश में प्रिया का चेहरा एक अजीब सी चमक से दमक रहा था। रोहन की नज़रें उसके झुके हुए पलकों से होती हुई, उसके होंठों तक जा पहुँचीं, जो अब एक नशीली मुस्कान में ढले थे। बिना कुछ कहे, सिर्फ़ आँखों के इशारों से, उन्हें अपनी बरसों पुरानी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत साफ़ दिख रहा था।
रोहन ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया, और एक पल की हिचक के बाद, प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। उनके शरीर का पहला स्पर्श बिजली की लहरों सा था, जिसने उनके अंदर दबी हर वासना को जगा दिया। प्रिया के होंठों से एक धीमी कराह निकली जब रोहन ने उसके अधरों को अपने में समेट लिया, एक भूखे शिकारी की तरह। यह सिर्फ़ एक चुंबन नहीं था, यह बरसों की प्यास थी, इंतज़ार था, और एक-दूसरे को फिर से पाने की बेताबी थी। उनकी जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं, हर स्पर्श में एक नया अहसास जाग उठा। रोहन के हाथ प्रिया की कमर से नीचे सरकते हुए, उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाने लगे। प्रिया ने खुद को उसके हवाले कर दिया, उसकी उँगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं। कमरे में सिर्फ़ उनके बेताब साँसों की आवाज़ गूँज रही थी, और कपड़ों के धीरे-धीरे ज़मीन पर गिरने की सरसराहट।
बिना एक शब्द कहे, वे एक-दूसरे को अपने साथ बेडरूम तक खींच लाए। चाँद की हल्की रोशनी खिड़की से झाँक रही थी, उनके नग्न शरीरों को एक सुनहरी आभा में डुबो रही थी। प्रिया का सुडौल बदन, जिसकी हर वक्र रोहन ने बरसों तक सिर्फ़ सपनों में ही छुआ था, अब उसके सामने बेपर्दा था। रोहन का मर्दाना शरीर, उसकी चौड़ी छाती, मज़बूत बाँहें – प्रिया की आँखों में वासना की आग और भी तेज़ी से भड़क उठी। उन्होंने बिस्तर पर एक-दूसरे को धकेल दिया। रोहन ने प्रिया के संवेदनशील अंगों को अपनी उँगलियों से सहलाना शुरू किया, उसकी हर सिहरन को महसूस करते हुए। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – समर्पण की, और चरम सुख की ओर बढ़ने की। रोहन ने अपने होंठ उसके वक्षस्थल पर टिका दिए, उसके निप्पलों को अपने मुँह में भर कर चूसा। प्रिया के मुँह से दर्द और सुख का एक मिला-जुला स्वर निकला।
“मैं तुम्हें कितना चाहता था, प्रिया,” रोहन ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ वासना से भरी थी। प्रिया ने जवाब में सिर्फ़ उसकी पीठ को अपने नाखूनों से सहलाया, उसे और करीब खींचते हुए। रोहन ने धीरे-धीरे अपने आप को प्रिया के अंदर उतारा, और प्रिया ने एक गहरी आह भरी। यह सिर्फ़ शरीर का मिलन नहीं था, यह दो आत्माओं का पुनर्मिलन था, उनकी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत था, जो आज चरम पर पहुँच रहा था। उनकी हर धड़कन एक-दूसरे में समा रही थी। उनकी गतियाँ तेज़ होती गईं, हर धक्के के साथ एक नई गहराई, एक नया अहसास। प्रिया अपनी जंघाओं से रोहन को कसकर जकड़े हुए थी, उसकी हर आह, हर पुकार रोहन को और बेकाबू कर रही थी। पसीना उनके शरीरों से टपक रहा था, उनकी गंध कमरे में फैल रही थी, वासना का एक अजीब सा नशा। वे दोनों उस क्षण में सिर्फ़ एक-दूसरे के थे, दुनिया की हर फ़िक्र से परे।
और फिर, एक आख़िरी, तेज़ झटके के साथ, वे दोनों एक साथ चरम सुख के सागर में डूब गए। प्रिया की चीख रोहन के कंधे पर दब गई, और रोहन ने भी अपनी सारी ऊर्जा प्रिया में उड़ेल दी। उनके शरीर शांत पड़े थे, लेकिन उनके दिलों में एक अभूतपूर्व तृप्ति और शांति थी। बरसों की बेकरारी, अधूरी ख्वाहिशें, और अनकही मोहब्बत – सब कुछ आज इस एक पल में पूरा हो गया था। यह उनकी अधूरी प्रेम कहानी का सबसे रोमांचक अंत था, जो उनके शरीरों और आत्माओं को हमेशा के लिए एक कर गया था।
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