दोपहर की ढलती धूप सरिता के खिड़की से रिसकर उसके अकेलेपन को और गहरा रही थी, लेकिन आज यह सूनापन एक नई चिंगारी में बदलने वाला था। चालीस पार कर चुकी सरिता ने अपनी ज़िंदगी के कई बसंत देखे थे, लेकिन शरीर की वह आग जो कभी शांत हो गई थी, आज एक नए पड़ोसी के आने से फिर सुलगने लगी थी। रोहन, जो सामने वाले घर में नया आया था, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक चुनौती, एक निमंत्रण।
सरिता अक्सर बालकनी में खड़े होकर उसे देखती रहती थी, जब वह अपनी बाइक पार्क करता या सब्ज़ियां लाता। उसका कसा हुआ बदन, उसकी युवा ऊर्जा सरिता के भीतर कुछ हलचल मचाती थी। एक शाम, जब सरिता अपनी भारी बाल्टी लेकर छत पर जा रही थी, रोहन ने उसे देखा और तुरंत मदद के लिए आगे बढ़ा। “अरे, भाभी जी, आप क्यों तकलीफ कर रही हैं? लाइए मैं पहुंचा देता हूं।” उसके हाथों ने बाल्टी संभाली और अनजाने में सरिता की कलाई को छू लिया। वह स्पर्श बिजली की तरह सरिता के पूरे शरीर में दौड़ गया। उसकी साँसें अटक गईं।
अगले कुछ दिनों तक, उनके बीच यह हल्की-फुल्की बातचीत एक गहरे आकर्षण में बदलती गई। रोहन बहाने से सरिता के घर आने लगा—कभी पानी का मीटर ठीक करने, कभी कूलर की मरम्मत के लिए। हर मुलाकात में उनकी आँखें कुछ ऐसा कह जाती थीं, जो जुबान पर नहीं आता था। सरिता के अंदर का सूखा पन अब प्यास में बदल रहा था, और रोहन की आँखें उस प्यास को बुझाने का वादा कर रही थीं। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जो धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था।
एक दिन, जब शाम ढल चुकी थी और मद्धम रोशनी कमरे में पसरी थी, रोहन एक छोटी सी शिकायत के बहाने सरिता के घर आया। उसने सोफे पर बैठकर बात शुरू की, लेकिन उसकी आँखें सरिता के होंठों पर टिकी थीं। सरिता ने हल्की गुलाबी साड़ी पहन रखी थी, जो उसके भरे-भरे बदन पर कसकर सिमटी थी। रोहन की नज़रें उसके वक्ष पर ठहर गईं, जो साड़ी के आँचल के नीचे से झाँक रहे थे। सरिता की धड़कनें तेज हो गईं। उसने महसूस किया कि अब इंतज़ार की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
“रोहन,” सरिता की आवाज़ में एक अजीब सी थरथराहट थी, “मुझे… मुझे आज कुछ अलग महसूस हो रहा है।”
रोहन तुरंत समझ गया। वह अपनी जगह से उठा और धीरे-धीरे सरिता के पास आया। उसने अपना हाथ सरिता के गाल पर रखा। उसकी उंगलियों का स्पर्श इतना नर्म, इतना मोहक था कि सरिता की आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं। रोहन ने झुका और उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया। यह एक लंबा, गहरा और भूखा चुंबन था, जिसमें सालों की प्यास और नई इच्छा का मिलन था। सरिता ने अपनी बाहें रोहन की गर्दन में डाल दीं और उसे और करीब खींच लिया। उसकी साड़ी का आँचल कब उसके कंधे से खिसक गया, उसे पता ही नहीं चला।
उनकी साँसें एक-दूसरे में घुल गईं। रोहन के हाथ सरिता की पीठ पर कस गए, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकते हुए उसकी कमर पर आकर टिक गए। उसने सरिता को अपनी गोद में उठा लिया, जो एक पल को चौंक उठी लेकिन फिर खुद को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया। वह उसे बेडरूम की तरफ ले गया, जहाँ खिड़की से आती हल्की चाँदनी एक रहस्यमय माहौल बना रही थी। रोहन ने सरिता को बेड पर धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसके होंठ फिर से सरिता के होंठों से मिले, और इस बार चुंबन की गहराई और भी बढ़ गई।
रोहन ने धीरे-धीरे सरिता की साड़ी को उसके बदन से हटाना शुरू किया। हर परत के हटते ही, सरिता का दहकता जिस्म रोहन की आँखों के सामने खुलता जा रहा था। उसका ब्लाउज, फिर पेटीकोट… सरिता की उम्र ने उसके जिस्म में एक खास तरह की परिपक्वता भर दी थी, एक ऐसी गोलाई, एक ऐसा आकर्षण जो युवा लड़कियों में नहीं होता। रोहन की आँखें उसके हर कर्व को निहार रही थीं, और उसकी उंगलियाँ हर जगह को छूकर उसे और उत्तेजित कर रही थीं। सरिता की चूड़ियाँ खनक रही थीं, उसके होंठों से धीमी-धीमी सिसकियाँ निकल रही थीं।
जब वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई, तो रोहन ने अपनी कमीज और पैंट भी उतार दी। उनके नंगे बदन एक-दूसरे से सटे, त्वचा से त्वचा का स्पर्श इतना मादक था कि दोनों एक-दूसरे में खो गए। रोहन ने अपने होंठ सरिता के गले पर रखे, फिर नीचे उतरते हुए उसके उभरे हुए वक्ष पर आ गए। सरिता ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, उसके बदन में एक मीठी सी टीस उठ रही थी। वह उसे अपनी बाँहों में कसकर भींच रही थी, मानो वह कभी उसे खुद से दूर जाने नहीं देगी।
रोहन की उंगलियाँ सरिता की जांघों पर प्यार से सहला रही थीं, और फिर धीरे-धीरे वह उस अंतरंग जगह पर पहुँच गईं, जो प्यासी थी। सरिता के जिस्म का हर कण अब रोहन के स्पर्श के लिए बेताब था। उसकी आहें अब तेज हो चुकी थीं, उसकी नस-नस में एक अनकहा रोमांच दौड़ रहा था। रोहन ने धीरे से प्रवेश किया, और सरिता के मुँह से एक गहरी चीख निकल गई, जो खुशी और राहत दोनों से भरी थी। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जो उसे एक नई दुनिया में ले जा रहा था।
वे दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे। उनके शरीर एक लय में झूल रहे थे, एक-दूसरे को अपनी पूरी ऊर्जा से देते और लेते हुए। सरिता को ऐसा महसूस हुआ जैसे वह सालों बाद जी उठी हो। उसकी आत्मा, उसका शरीर, सब कुछ तृप्त हो रहा था। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और गहरी होती जा रही थी, उनकी इच्छाएं चरम पर पहुँच रही थीं। आखिरकार, जब उनकी साँसें तेज हो गईं और शरीर पसीने से भीग गए, तो वे एक-दूसरे की बाँहों में सिमट गए, उनकी आत्माएँ एक हो चुकी थीं।
उनकी अधेड़ उम्र का यह नया रोमांस बस एक शुरुआत था, एक ऐसी कहानी जिसका अंत कोई नहीं चाहता था। सरिता की आँखों में अब एक नई चमक थी, उसके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि। उसने रोहन को कसकर गले लगाया और उसके कानों में फुसफुसाई, “मुझे फिर से जीना सिखाने के लिए धन्यवाद।” रोहन ने जवाब में उसके होंठों पर एक मीठा चुंबन दिया, यह वादा करते हुए कि यह सिर्फ शुरुआत है।
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