ऑफिस की दीवारों में सुलगता, बेकाबू प्यार का धुआँ

उसकी आँखों में आज एक ऐसी आग थी, जो मुझे जलाकर राख करने को बेताब थी। समीर की वह तीखी, चाहत भरी नज़रें पिछले कुछ हफ़्तों से मेरे भीतर कुछ ऐसा जगा रही थीं, जिसे मैं ऑफिस के माहौल में दबाए रखने की कोशिश करती थी। पर आज रात, जब हम दोनों एक ज़रूरी प्रेजेंटेशन पर देर रात तक काम कर रहे थे, तो दीवारें भी जैसे हमारी खामोश जुबान पढ़ने लगी थीं।

घड़ी रात के ग्यारह बजा रही थी। पूरा ऑफिस सन्नाटे में डूबा था, सिवाय हमारे केबिन के जहाँ की डिम लाइट हमारे चेहरों पर एक अजीब-सा आकर्षण पैदा कर रही थी। समीर ने अपनी कुर्सी खिसकाई और मेरे करीब आ गया। “रीना, तुम बहुत थक गई होगी,” उसने आवाज़ में एक अजीब-सी नर्मी घोलकर कहा। उसकी उँगलियाँ मेरे माथे से हटकर, मेरे गाल पर आ टिकीं। उस एक स्पर्श से मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई। हम दोनों के बीच पनप रहा यह **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** अब अपनी सीमाओं को तोड़ने को तैयार था।

मैंने आँखें उठाकर उसे देखा। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं, इतनी करीब कि मैं उसके दिल की धड़कनें सुन सकती थी। उसकी आँखों में एक सवाल था, एक निमंत्रण था, और एक वादा भी। मैंने धीरे से अपना सिर हिलाया, मानो कह रही हूँ, ‘हाँ।’ अगले ही पल, उसके होंठ मेरे होंठों पर ऐसे टूट पड़े, जैसे सदियों की प्यास बुझा रहे हों। यह चुंबन गहरा था, उमस भरा था, और मुझे पूरी तरह से बेकाबू कर रहा था। मेरे हाथ खुद ब खुद उसके बालों में उलझ गए, और मैं उसे और कसकर अपनी ओर खींचने लगी।

“चलो यहाँ से,” समीर ने मेरे होंठों से अपने होंठ हटाकर फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक तीव्र इच्छा थी। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे उसका हाथ थाम लिया और हम ऑफिस से बाहर निकल गए, जैसे कोई चोरी करने निकला हो। पर हम तो आज अपनी ही भावनाओं की चोरी कर रहे थे। हम सीधा समीर के अपार्टमेंट पहुँचे। दरवाज़ा बंद होते ही, जैसे ही मैंने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। “आज कोई सीमा नहीं,” उसने मेरे कान में गर्म साँसें छोड़ते हुए कहा।

मेरे ब्लाउज के हुक बड़ी मुश्किल से खुले, और मेरी रेशमी साड़ी ज़मीन पर गिर पड़ी। समीर की आँखें मेरी बेबाक खूबसूरती पर ठहर गईं। उसने मेरे वक्षों को अपनी हथेलियों में भरा और उनके उभार पर अपनी उंगलियाँ फेरने लगा। मेरे मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। कब हमारी दोस्ती इस **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** में बदल गई, यह हम दोनों को पता ही नहीं चला था, पर आज रात इसकी हर हद पार होने वाली थी।

उसने मुझे गोद में उठाया और सीधा बेडरूम में ले गया, जहाँ की मद्धिम रोशनी में उसका हर स्पर्श मुझे एक नई दुनिया में ले जा रहा था। मेरे शरीर का हर हिस्सा उसकी चाहत में तड़प रहा था। जब वह धीरे-धीरे मेरे ऊपर झुका, मैंने महसूस किया कि उसके शरीर की गर्मी मेरे पूरे अस्तित्व को अपनी चपेट में ले रही थी। हमारे शरीर एक-दूसरे में इस तरह समा गए जैसे सदियों से बिछड़े हुए प्रेमी आज फिर मिले हों।

हर धक्का एक मीठी पीड़ा देता, एक गहरे आनंद में बदल जाता। मेरी चीखें और उसकी आहें कमरे की दीवारों से टकराकर लौटतीं, और हमें और करीब लातीं। समीर की हर साँस, हर हरकत मेरे भीतर एक तूफ़ान जगा रही थी। मेरा शरीर एक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा, और मैं अपने चरम पर पहुँच गई। वह भी मेरे साथ उसी उन्माद में खोया हुआ था। हम दोनों एक साथ उस आनंद की गहराइयों में डूबे, जहाँ सिर्फ़ हम थे और हमारा यह बेकाबू प्यार।

थके-हारे, पर संतुष्ट, हम एक-दूसरे की बाँहों में सिमट गए। मेरे सिर उसके कंधे पर था, और मैं उसकी धड़कनों को सुन सकती थी। आज रात हमने अपने इस **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** को उसकी असली पहचान दी थी। यह सिर्फ़ एक रात का जुनून नहीं था, बल्कि एक ऐसी शुरुआत थी, जिसका इंतज़ार हमारी रूहें सदियों से कर रही थीं। बाहर सुबह की किरणें फूट रही थीं, पर हमारे भीतर का सूरज अभी-अभी उगा था, एक नए, तूफानी, और बेकाबू रिश्ते की दस्तक के साथ।

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