जैसे ही गेस्ट हाउस के कमरे का दरवाजा बंद हुआ, बाहर की दुनिया की सारी हलचल थम सी गई और हमारी साँसों की धड़कनें तेज होने लगीं। राहुल ने मेरी आँखों में देखा, उसकी आँखों में वही बेताबी थी जो मेरी रग-रग में दौड़ रही थी। दिल्ली की गर्मी से दूर, इस शांत पहाड़ी गेस्ट हाउस में हम दोनों सिर्फ एक-दूसरे के लिए आए थे, एक ऐसी रात बिताने के लिए जिसकी कल्पना भर से मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे। मैंने देखा कि उसका हाथ मेरी कमर की ओर बढ़ रहा है।
उसकी उंगलियों के स्पर्श से एक सिहरन मेरे बदन में दौड़ गई। राहुल ने मुझे अपनी ओर खींचा और बिना एक पल भी इंतज़ार किए, उसके होंठ मेरे होंठों पर ऐसे टूट पड़े मानो वर्षों से प्यासे हों। हमारी साँसों में घुली गर्माहट, एक-दूसरे की वासना को और हवा दे रही थी। मैंने उसकी गर्दन को अपनी बाहों में कस लिया, जवाब में राहुल ने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। हमारी जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं, हर चुंबन गहरा और मदहोश कर देने वाला था। मेरे दुपट्टे को उसने एक झटके में उतारा और वह ज़मीन पर गिर पड़ा, हमारे प्यार का पहला गवाह।
मेरे कुर्ती के बटन धीरे-धीरे खुलने लगे, उसकी उंगलियाँ मेरी त्वचा को छूती हुई नीचे जा रही थीं। जैसे ही मेरी कुर्ती ज़मीन पर गिरी, मैंने भी बिना देर किए राहुल की शर्ट उतार दी। हम दोनों एक-दूसरे के सामने सिर्फ अंदरूनी वस्त्रों में खड़े थे, हमारे जिस्मों पर पसीने की बारीक बूँदें चमक रही थीं। उसकी नज़रों ने मेरे पूरे बदन को टटोला, मेरी वक्ष पर, मेरी पतली कमर पर, और फिर मेरी जांघों पर आकर ठहर गईं। मेरे गाल शर्म और उत्तेजना से लाल हो रहे थे, पर मेरी आँखों में साफ दिख रहा था कि मैं कितनी आतुर थी। राहुल ने धीरे से मेरी ब्रा की स्ट्रैप्स हटाईं और मेरे वक्ष आज़ाद हो गए। उसकी आँखें चमक उठीं, और उसने हल्के से मेरे निप्पल को अपनी उंगली से सहलाया।
एक आदिम चीख मेरे गले से निकली। उसने मुझे गोद में उठा लिया और हम दोनों पलंग की ओर बढ़े। गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात की हमारी कल्पना अब हकीकत बनने जा रही थी। मुलायम गद्दों पर गिरते ही, राहुल ने मेरे होंठों को फिर से चूमना शुरू कर दिया, इस बार और ज़्यादा बेताबी से। उसका एक हाथ मेरे वक्षों पर था, उन्हें सहलाता हुआ, दबाता हुआ। दूसरा हाथ मेरी कमर से होता हुआ मेरी पैंटी के भीतर जा पहुँचा, और उसकी उंगलियाँ मेरी योनि को टटोलने लगीं। मैं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, उसकी छुअन ने मेरी वासना की आग को चरम पर पहुँचा दिया था। मेरी आहें कमरे में गूँजने लगीं।
राहुल ने मेरे ऊपर से खुद को हटाकर अपनी पैंटी उतारी। उसका कठोर लिंग मेरे सामने था, पूरी तरह से उत्तेजित और मुझ में समाने के लिए बेताब। उसने मेरे पैरों को फैलाया और धीरे से मेरे भीतर प्रवेश किया। एक गहरी साँस मेरे भीतर समा गई, और फिर एक सुखद दर्द की सिहरन पूरे शरीर में दौड़ गई। “आह… राहुल,” मैं फुसफुसाई। उसने पहले धीमी गति से शुरुआत की, फिर उसकी धक्के तेज़ होने लगे। पलंग चरमराने लगा, हमारी साँसों की लय एक हो चुकी थी। मैं अपनी कमर उठा-उठा कर उसके हर धक्के का जवाब दे रही थी। उसकी गर्म साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं, और उसकी हर चाल मेरे अंदर एक गहरा सुख भर रही थी। गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात सचमुच जादुई थी।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, और पूरी तरह से उस एहसास में डूब गई। उसके धक्के और तेज़ होते गए, गहरे होते गए। मेरी योनि उसकी कठोरता को पूरी तरह से महसूस कर रही थी, और मैं जानती थी कि हम दोनों अपने चरम सुख के करीब पहुँच चुके हैं। “राहुल… मैं… मैं आ रही हूँ,” मैंने काँपते हुए कहा। कुछ ही पलों में, हम दोनों एक साथ चरम सुख के अथाह सागर में डूब गए। उसकी गर्म धारा मेरे भीतर फैल गई, और मेरा शरीर ऐंठन के साथ शांत हो गया।
हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे, हमारी साँसें अभी भी तेज़ थीं। सूरज की हल्की किरणें खिड़की से कमरे में झाँक रही थीं, पर हमें कोई जल्दी नहीं थी। यह रात सिर्फ़ हमारे लिए थी, वासना और प्रेम से भरी एक अविस्मरणीय रात। राहुल ने मेरे माथे को चूमा और कहा, “यह गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात हमेशा याद रहेगी, प्रिया।” मैंने मुस्कुराकर उसकी ओर देखा और अपनी उंगलियों से उसकी पीठ सहलाई। अभी तो यह सिर्फ़ शुरुआत थी।
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