रात का सन्नाटा गहरा रहा था, और उसके साथ ही राधा के अंदर जल रही थी एक अनकही आग। गाँव की नींद में डूबी गलियों में सिर्फ़ झींगुरों की आवाज़ थी, पर राधा के दिल में तो तूफ़ान उठ रहा था। वह जानती थी कि आज मोहन आएगा, उसी नीम के पेड़ के नीचे, जहाँ उनकी आँखें पहली बार मिली थीं, और जहाँ उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी शुरू हुई थी।
आँखों में काजल, होठों पर अधूरी मुस्कान लिए, राधा धीरे से अपने कमरे से निकली। पुरानी लकड़ी की सीढ़ियाँ दबे पाँव उतरते हुए, उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। आँगन में ठंडी हवा चल रही थी, और चाँदनी में नहाया नीम का पेड़ इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही वह वहाँ पहुँची, मोहन की मज़बूत बाँहों ने उसे अपनी ओर खींच लिया। “राधा,” उसकी भारी आवाज़ उसके कान में गूँजी, “कितना इंतज़ार करवाया तुमने।”
राधा मोहन की बाँहों में कसकर सिमट गई, उसकी साँसों की गरमाहट उसे मदहोश कर रही थी। उनकी आँखें मिलीं, और उन आँखों में बरसों का इंतज़ार, बरसों की हसरत तैर रही थी। यह उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी थी, जो बरसों से उनके दिलों में पल रही थी, अनकही, अनदेखी, पर बेहद गहरी। मोहन ने झुककर उसके लबों को चूम लिया। यह कोई साधारण चुम्बन नहीं था; यह भूख का, प्यास का, और बेताब चाहत का चुम्बन था। राधा ने भी उतनी ही शिद्दत से उसका साथ दिया, अपने हाथों से मोहन की गर्दन को जकड़ लिया।
उनके होंठ एक दूसरे में ऐसे खोए कि जैसे कभी अलग थे ही नहीं। मोहन के हाथ राधा की कमर से होते हुए, उसके ब्लाउज के नीचे सरके, उसकी नरम त्वचा को छूते हुए। राधा की देह में सिहरन दौड़ गई। उसने अपना सिर पीछे किया, साँस लेने के लिए, और मोहन ने अपनी ज़ुबान उसकी गर्दन पर फेर दी, जहाँ उसने पहले कभी महसूस न की थी ऐसी उत्तेजना। राधा की आँखों में नशा उतर आया, “मोहन… कोई देख लेगा…” उसकी आवाज़ दबी हुई थी।
“आज नहीं, राधा,” मोहन ने उसके कानों में फुसफुसाया, “आज सिर्फ़ हम हैं, और हमारी चाहत।” उसने राधा को धीरे से उठाया और नीम के पेड़ के पास पड़ी पुरानी चारपाई पर लेटा दिया। चाँदनी में राधा का चेहरा और भी मादक लग रहा था। मोहन ने धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोले, और उसकी साड़ी को सरका दिया। राधा ने शरम से आँखें बंद कर लीं, पर उसके शरीर की हर नस मोहन के स्पर्श के लिए तड़प रही थी। मोहन ने उसके उभारों को अपने हाथ में लिया और उन्हें सहलाना शुरू किया। राधा के मुँह से एक सिसकारी निकल गई।
मोहन नीचे झुका और उसके गुलाब सी कोमल त्वचा को अपने होठों से सहलाया। राधा ने अपनी कमर उठा दी, उसकी हर आह, हर पुकार मोहन को और भी उत्तेजित कर रही थी। मोहन ने राधा के लहंगे की डोरी खोली, और उसे एक तरफ कर दिया। राधा का कामुक शरीर अब सिर्फ़ चाँदनी और मोहन की आँखों के सामने था। मोहन ने एक पल के लिए उसे निहारा, और फिर उसके ऊपर झुक गया।
हर स्पर्श, हर साँस, उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी की गवाही दे रहा था। मोहन ने धीरे से अपनी जगह बनाई। राधा ने अपनी बाँहें उसके चारों ओर कस लीं, अपनी देह को पूरी तरह मोहन के हवाले कर दिया। पहला धँसाव गहरा था, और राधा के मुँह से एक मीठी चीख़ निकल गई। मोहन धीरे-धीरे गति पकड़ने लगा। उनके शरीर एक दूसरे से ऐसे टकरा रहे थे जैसे सदियों से बिछड़े दो प्रेमी आज मिल रहे हों। हवा में एक मीठी-सी गंध फैल गई थी, पसीने की, मिट्टी की, और सबसे बढ़कर, बेपनाह प्यार की।
राधा ने अपनी आँखें खोलीं और मोहन की आँखों में देखा। उन आँखों में उसने खुद को खोते हुए पाया। “मोहन… और… और तेज़…” राधा ने बेकाबू होकर कहा। मोहन ने उसकी बात मानी, और उसकी हर पुकार पर अपनी शक्ति बढ़ाई। उनकी सांसें उखड़ रही थीं, धड़कनें बेकाबू थीं। राधा की देह में एक ज़ोरदार लहर उठी, उसने मोहन को और कसकर जकड़ लिया, उसकी आवाज़ सिर्फ़ एक दबी हुई चीख़ बन कर रह गई। मोहन ने भी उसके साथ ही अपनी सारी शक्ति उड़ेल दी।
दोनों की देह शांत पड़ गई, पर उनके दिल अब भी एक दूसरे के लिए धड़क रहे थे। मोहन ने राधा के माथे पर एक नम चुम्बन दिया। “प्यारी राधा,” उसने फुसफुसाया, “हमारी यह छुप छुप कर प्यार करने की कहानी कभी ख़त्म नहीं होगी।” राधा ने उसकी छाती पर अपना सिर रख लिया, उसे आज रात जितनी संतुष्टि मिली थी, वैसी पहले कभी नहीं। आज रात, उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी ने एक नया अध्याय लिखा था, जो हमेशा उनके दिलों में जिंदा रहेगा, हर रात की चाँदनी में एक नई उम्मीद बनकर।
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