उसकी साड़ी का पल्लू सरकते ही, विक्रम की निगाहें राधिका की दहकती कमर पर जा टिकीं, और सालों की प्यास एक झटके में उमड़ पड़ी। आज बरसों बाद वे इस एक कमरे के गुप्त ठिकाने में मिल रहे थे, जहाँ उनके अधूरे प्रेम की गाथा को एक निर्णायक मोड़ मिलना था। राधिका, अपनी साड़ी के पल्लू को और नीचे खिसकाती हुई, विक्रम की आँखों में अपनी ही वासना की आग को महसूस कर रही थी।
“इतने साल… कितने बदल गए तुम,” विक्रम फुसफुसाया, उसके करीब आते हुए। उसकी आवाज़ में एक अनकही बेचैनी थी।
“और तुम नहीं?” राधिका ने अपनी उंगलियाँ उसकी शर्ट के बटन पर फिराते हुए कहा। उसकी आवाज़ में शहद सी मिठास थी, जो विक्रम के शरीर में सिहरन पैदा कर गई। उनके बीच की अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत आज रात लिखा जाना था, और दोनों इस सत्य को बिना कहे जानते थे।
विक्रम ने उसके हाथ को पकड़कर अपनी ओर खींचा। राधिका ने अपनी आँखें बंद कर लीं, जब उसके होंठ विक्रम के होंठों से मिले। एक नर्म, धीमी शुरुआत जो पल भर में उग्र ज्वाला में बदल गई। विक्रम के होंठों की गरमी राधिका के पूरे शरीर में फैल गई, और वह अपनी सुध-बुध खोने लगी। उसकी जीभ राधिका के मुँह के हर कोने को तलाशने लगी, और राधिका भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दे रही थी, मानो सालों की तड़प एक साथ मिटा देना चाहती हो।
साड़ी का बंधन एक-एक करके खुलने लगा। रेशमी कपड़े ज़मीन पर फिसले और राधिका का बदन, जो वर्षों से विक्रम की कल्पनाओं में था, अब उसके सामने था। उसकी सांवली त्वचा पर पसीने की बारीक बूँदें मोतियों सी चमक रही थीं। विक्रम ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया, उसकी आँखें राधिका की कामुकता से भरी आँखों में झाँक रही थीं। बिस्तर पर लेटते ही, उनके स्पर्श और भी बेताब हो गए। विक्रम के हाथ राधिका के वक्षों पर फिरे, उनकी उभारों को सहलाते हुए। राधिका के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, जो विक्रम को और भी उत्तेजित कर रही थीं।
राधिका ने अपनी टाँगें फैला दीं, अपने शरीर को विक्रम के लिए खोलते हुए। “अब और इंतज़ार नहीं,” वह हाँफते हुए बोली। विक्रम ने एक पल भी नहीं गँवाया। उसकी गरमी राधिका की गरमी से मिली, और एक गहरी आह राधिका के होंठों से निकली। विक्रम ने धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से अपनी लय पकड़ी। हर धक्के के साथ, उनकी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत और करीब आ रहा था। राधिका अपनी कमर ऊपर उठाती रही, विक्रम के हर वार का पूरी शिद्दत से जवाब देती रही। कमरे में सिर्फ उनके बदन के टकराने की आवाज़, सिसकारियाँ और वासना से भरी साँसों की गरमाहट थी।
विक्रम ने अपने होंठ राधिका की गर्दन पर गड़ा दिए, उसके कानों में फुसफुसाया, “कितना इंतज़ार किया है मैंने इस पल का, राधिका।” राधिका ने अपनी उंगलियाँ उसकी पीठ पर गढ़ा दीं, अपने नख-निशानों से अपनी दीवानगी का सबूत देती हुई। उनकी गति तेज़ होती गई, दोनों ही सुख की उस चरम सीमा की ओर बढ़ रहे थे जहाँ समय और दुनिया का कोई अस्तित्व नहीं होता।
आखिरकार, एक ज़ोरदार धक्के के साथ, विक्रम ने अपने सारे प्यार और वासना को राधिका के भीतर उड़ेल दिया। राधिका के पूरे शरीर में एक सुखद कंपन हुआ, और वह विक्रम की बाहों में ढीली पड़ गई। दोनों कुछ देर तक यूँ ही पड़े रहे, एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते हुए। उनके अधूरे प्रेम को आज एक शानदार और रोमांचक अंत मिल चुका था। उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनके दिलों में हमेशा के लिए एक मीठी याद बस गई थी। आज रात, उन्होंने सचमुच अपनी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत पा लिया था।
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