रीना की सूनी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी, जो उसकी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत को चीख-चीख कर बयां कर रही थी। दोपहर का सन्नाटा उसके भीतर की खामोशी से भी गहरा था, और हर गुज़रते पल के साथ उसके तन में एक अनजानी सी आग सुलग उठती थी। पति अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर रहते, और घर की ये चार दीवारी रीना के लिए सोने का पिंजरा बन चुकी थी।
आज जब अर्जुन, पड़ोस वाला नौजवान, बिजली के मीटर का बहाना बनाकर आया, तो रीना के दिल की धड़कनें अचानक तेज़ हो गईं। उसकी पैनी निगाहें रीना के ढीले कुर्ता-पायजामे के भीतर छिपी भरी-पूरी काया पर कुछ पल के लिए ठहरीं, और उस नज़र में एक ऐसी भूख थी जो रीना ने अपने पति की आँखों में कभी नहीं देखी थी। “भाभी, सब ठीक है?” अर्जुन की आवाज़ शहद सी मीठी थी, और उसके शब्दों में एक अनकही आमंत्रित करने वाली गर्माहट थी।
रीना ने नज़रें झुका लीं, पर उसके गालों पर हल्की लाली तैर गई। “हाँ, सब ठीक है। आप बताओ, मीटर में क्या हुआ?” उसकी आवाज़ काँप रही थी, और उसे खुद पर गुस्सा आया। अर्जुन मुस्कुराया, उसकी नज़रें रीना के होठों पर कुछ पल टिकीं। “मीटर तो ठीक है भाभी, पर आपके चेहरे पर ये उदासी…” वह एक कदम आगे बढ़ा, और रीना का दिल धक से रह गया। अर्जुन ने धीमे से रीना का हाथ पकड़ लिया। उसकी उंगलियों का स्पर्श बिजली की लहर की तरह रीना के पूरे बदन में दौड़ गया। रीना ने अपना हाथ खींचने की कोशिश भी नहीं की। उसकी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत इस एक स्पर्श से जैसे जाग उठी थी।
“भाभी, मुझे पता है आपकी आँखों में क्या है… वो तड़प जो कोई नहीं समझता,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए कहा, और रीना की साँसें तेज़ हो गईं। वह उसे घसीटकर घर के भीतर खींच लाई, और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। उसके भीतर की वर्षों पुरानी प्यास आज किसी भी दीवार को तोड़ने को बेताब थी। अर्जुन ने रीना को अपनी बाहों में भर लिया, और उसके गुलाबी अधरों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह भूख, प्यास, और बरसों की अतृप्त वासना का संगम था। रीना की आँखों से आँसू बहने लगे, ये सुख के आँसू थे, जो उसे इस आज़ाद कर देने वाले पल की खुशी दे रहे थे।
अर्जुन के हाथों ने रीना की कमर पर कसकर पकड़ बनाई, और वह उसे उठाकर दीवार से सटा दिया। रीना के हाथ उसके बालों में उलझ गए, और वह एक गहरी आह भरकर अर्जुन के चुंबन का जवाब देने लगी। अर्जुन ने रीना के कुर्ते का नाड़ा खोल दिया, और वह उसके बदन से फिसल कर ज़मीन पर आ गिरा। उसके भरे हुए वक्ष, जिनके ऊपर वर्षों से किसी ने प्यार से हाथ नहीं फेरा था, अर्जुन की नज़रों के सामने आ गए। अर्जुन ने अपने होंठ रीना की गर्दन पर, फिर कंधों पर, और फिर उसके वक्षों पर रख दिए। रीना की चीख उसके मुँह से निकल गई, एक मीठी, मदहोश कर देने वाली चीख।
अर्जुन ने धीरे-धीरे रीना के पायजामे को नीचे सरका दिया, और वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई। उसकी आँखों में एक नई चमक थी, एक आज़ादी की चमक। अर्जुन ने भी अपने कपड़े उतार दिए, और उनके नग्न बदन एक दूसरे से लिपट गए। रीना ने महसूस किया कि वर्षों बाद उसके शरीर को कोई इतने प्यार, इतनी हवस और इतनी शिद्दत से छू रहा था। अर्जुन ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, और उसके ऊपर छा गया। उनके बदन के हर इंच से पसीना टपकने लगा, और कमरे में वासना की एक मादक खुशबू फैल गई।
“मेरी रानी, तुम्हें क्या चाहिए?” अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाया, और रीना ने अपनी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत को एक शब्द में बयां किया, “सब कुछ!” अर्जुन ने उसकी जाँघों को फैलाया, और एक गहरी साँस लेकर अपनी कमर को आगे बढ़ाया। रीना के मुँह से एक तीखी चीख निकली, और फिर वह चीख आहों में बदल गई। अर्जुन की हर थाप के साथ रीना का शरीर ऐंठ रहा था, और वह खुद को पूरी तरह अर्जुन के हवाले कर चुकी थी। वह चाहती थी कि यह पल कभी ख़त्म न हो, यह आग कभी बुझे नहीं। एक के बाद एक, तीव्र झटके उसके शरीर में उतरते गए, और रीना ने अपने पैरों से अर्जुन की कमर को कसकर जकड़ लिया। उसकी साँसें उखड़ चुकी थीं, पर उसके चेहरे पर एक अलौकिक सुख का भाव था। अर्जुन ने अपनी पूरी ताकत से उसे अपनी वासना के चरम पर पहुँचाया, और रीना ने चिल्लाते हुए खुद को उसके प्यार में, उसकी बाहों में, पूरी तरह से मुक्त कर दिया।
जब वे दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़े थे, तब रीना की आँखों में एक नई चमक थी। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक पल था, पर इस एक पल ने उसकी वर्षों की अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत को एक ऐसी गहराई से भर दिया था, जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी। अर्जुन ने उसके माथे को चूमा, और रीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, इस अनकही, अनजानी तृप्ति की मधुर यादों को अपने भीतर समेटते हुए।
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