दोपहर की तपन रीमा के अकेलेपन को और गहरा कर रही थी, जब दरवाज़े पर एक मदहोश कर देने वाली दस्तक हुई। उसने पसीना पोंछते हुए दरवाज़ा खोला और सामने खड़े अर्जुन को देख कर एक पल के लिए साँस लेना भूल गई। अर्जुन, मोहल्ले का नया लड़का, बिजली का बिल देने आया था। उसकी गहरी आँखें, चौड़ा सीना और बेपरवाह मुस्कान, रीमा के भीतर कुछ ऐसा जगा गईं जो अरसे से सोया हुआ था। अपनी अधेड़ उम्र में, रीमा ने कभी नहीं सोचा था कि उसके लिए **अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस** इंतज़ार कर रहा होगा।
“नमस्ते, रीमा जी,” अर्जुन की आवाज़ शहद-सी मीठी थी। “बिल देने आया था।”
रीमा ने उसे अंदर आने का इशारा किया। “अंदर आ जाओ अर्जुन, बाहर बहुत गर्मी है।”
अर्जुन अंदर आया, और उसके पसीने से भीगी टी-शर्ट रीमा की नज़र में बस गई। उसके शरीर की बनावट और पुरुषों वाली भीनी-भीनी गंध रीमा को बेचैन करने लगी। रीमा ने उसे पानी दिया और वे सोफे पर बैठ गए। बातों ही बातों में, अर्जुन ने रीमा की तारीफ करनी शुरू कर दी। “आप तो आज भी बिलकुल वैसी ही दिखती हैं, जैसे कॉलेज के दिनों में रही होंगी।” रीमा शरमा गई, उसके गालों पर हल्की लाली फैल गई। यह लाली सिर्फ गर्मी की वजह से नहीं थी।
अर्जुन की नज़रें रीमा के ढीले सूती कुर्ते से झाँकते उसके वक्षों पर ठहर गईं। उसने जानबूझकर अपनी हथेली रीमा के घुटने पर रख दी, जैसे बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए। रीमा का शरीर सिहर उठा। यह स्पर्श सिर्फ एक बहाना था, और दोनों इसे जानते थे। अर्जुन ने अपनी उंगलियाँ धीरे-धीरे रीमा की जांघों पर चलाईं। रीमा की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अर्जुन की आँखों में देखा, जहाँ गहरा, अनकहा निमंत्रण साफ था।
“रीमा जी, आप कितनी खूबसूरत हैं,” अर्जुन फुसफुसाया, और उसका हाथ अब रीमा की जांघों को सहला रहा था।
रीमा ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखें बंद कर लीं और अर्जुन के हाथ को और अंदर जाने दिया। उसका हाथ अब रीमा की साड़ी के पल्लू के नीचे, उसकी कमर पर फिसल रहा था, जहाँ गर्म त्वचा का एहसास रीमा को बेकाबू कर रहा था।
“अह्ह्ह्ह… अर्जुन,” रीमा के मुँह से एक दबी हुई आह निकली।
अर्जुन ने उसे उठाया और अपने बाज़ुओं में कस लिया। उनके होंठ मिले, एक कामुक, प्यासा चूमन जो सालों की अतृप्त इच्छा को जगा रहा था। अर्जुन के होंठों की गर्मी और उसकी जीभ की चंचलता ने रीमा के भीतर एक तूफ़ान खड़ा कर दिया। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि **अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस** था, जो उसकी प्यासी आत्मा को तृप्त करने आया था।
अर्जुन ने रीमा को उठाया और उसे बेडरूम की ओर ले चला। कमरे में पहुँचते ही, उसने रीमा को बेड पर धकेल दिया और उसके ऊपर झुक गया। रीमा ने उसकी टी-शर्ट उतार दी, और अर्जुन ने पलक झपकते ही उसकी साड़ी और ब्लाउज फेंक दिए। रीमा के भरे हुए स्तन अर्जुन की आँखों के सामने थे, उसकी इच्छा से तड़पते हुए। अर्जुन ने उनके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और एक बच्चे की तरह चूसने लगा, रीमा दर्द और pleasure से सिसकने लगी।
“और… अर्जुन… और,” वह हाँफ रही थी।
अर्जुन के हाथ अब रीमा के पेट से होते हुए उसकी जाँघों के बीच पहुँच गए, जहाँ उसकी योनि गर्मी से लबालब थी। अर्जुन ने धीरे से अपनी उंगली उसकी गीली गहराई में उतारी, और रीमा एक लंबी चीख के साथ तड़प उठी। अर्जुन जानता था कि वह अब तैयार है। उसने अपनी पैंट उतारी और अपनी कठोर मर्दानगी को रीमा की आतुरता से भरी योनि के द्वार पर रख दिया। एक गहरे धक्के के साथ, वह रीमा के अंदर समा गया।
रीमा की आँखों से आँसू छलक पड़े, यह खुशी के आँसू थे। सालों बाद उसे ऐसी संपूर्णता का अनुभव हो रहा था। अर्जुन ने उसे कस कर जकड़ लिया और धीमी, लयबद्ध गति से उसे चोदने लगा। हर धक्के के साथ, रीमा एक नई दुनिया में पहुँच रही थी, जहाँ सिर्फ वासना, सुख और मुक्ति थी। उनकी देह पसीने से भीग गई थी, और उनकी आहें कमरे में गूंज रही थीं। रीमा ने अपनी जाँघों से अर्जुन को कस लिया, उसे और गहराई तक खींचने लगी।
जब चरमोत्कर्ष आया, तो दोनों एक साथ गगनभेदी चीख के साथ काँप उठे। रीमा के भीतर अर्जुन का गर्म वीर्य फैल गया, और उसने आँखें मूंद कर गहरे संतोष का अनुभव किया। अर्जुन ने उसे कस कर गले लगा लिया और उसके माथे पर चूमा। वह जानती थी कि यह सिर्फ शुरुआत थी। अर्जुन ने उसे एक ऐसी दुनिया में पहुँचा दिया था जहाँ उसकी हर दबी हुई इच्छा, हर अधूरी ख्वाहिश पूरी हो रही थी। यह सचमुच **अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस** था, जो ज़िंदगी में नई जान भर गया था। उसकी देह और आत्मा, दोनों तृप्त हो चुके थे, और वह अर्जुन की बाहों में एक गहरी, मीठी नींद में डूब गई।
Leave a Reply