मीरा के भीतर की सदियों पुरानी प्यास, जिसे वो बरसों से सूखा रेगिस्तान समझ बैठी थी, आज अचानक एक झटके से जैसे झरने-सी फूट पड़ी थी। दोपहर की तपती धूप, और खिड़की से झाँकता रोहन, उनका नया पड़ोसी। उसकी नंगी, पसीने से भीगी पीठ और मजबूत भुजाएँ मीरा की आँखों में एक अजीब सी चमक जगा गई थीं। पिछले कुछ सालों से वो अकेली थी, अपने शरीर की ज़रूरतों को दफ़न करती आई थी, पर आज कुछ अलग ही था। रोहन ने एक भारी गमला उठाया और जैसे ही उसने अपनी गर्दन मोड़ी, उनकी नज़रें मिलीं। रोहन की आँखों में एक शरारती, पर गहरा आकर्षण था, और मीरा के गाल अनायास ही सुर्ख़ हो गए।
शाम को, जब हल्की बूंदा-बांदी शुरू हुई, मीरा अपने बरामदे में बैठी चाय पी रही थी। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। रोहन था। “दीदी, मेरा नल टपक रहा है, आप किसी अच्छे प्लंबर को जानती हैं क्या?” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी, जो मीरा के कानों में शहद घोल रही थी। “अरे, अंदर आओ, रोहन। यहाँ बैठो, मैं अभी पता करती हूँ।” मीरा ने उसे सोफे पर बैठने को कहा। रोहन अंदर आया तो उसकी देह से आती पुरुषार्थ की गंध ने मीरा को मदहोश कर दिया। उसकी शर्ट के बटन थोड़े खुले थे, जिससे उसकी छाती के कुछ बाल झाँक रहे थे। मीरा को लगा जैसे उसके भीतर कोई ज्वालामुखी फूटने वाला हो। “बैठो, मैं पानी लाती हूँ।”
जब मीरा पानी लेकर लौटी, रोहन सोफे पर झुका, कुछ सोच रहा था। मीरा ने पानी का गिलास आगे बढ़ाया तो उनकी उंगलियाँ छू गईं। एक हल्की सी सिहरन, जो दोनों के शरीर में दौड़ गई। रोहन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “दीदी, आप आज बहुत सुंदर लग रही हैं,” उसने धीमे स्वर में कहा, उसकी आँखें मीरा की आँखों में गहराई से झाँक रही थीं। मीरा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसका शरीर कामुकता से थरथरा रहा था। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जो उसकी कल्पना से भी परे था। रोहन ने मीरा को धीरे से अपनी ओर खींचा। मीरा ने विरोध नहीं किया, बस अपनी आँखें मूंद लीं, उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी।
रोहन ने उसे बांहों में भरा और उसके लबों पर अपने होंठ रख दिए। एक लंबा, गहरा चुंबन। मीरा ने भी पूरी शिद्दत से उसका जवाब दिया। बरसों का सूखा आज खत्म हो रहा था। रोहन ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ गया। कमरे में हल्की रोशनी थी, पर्दों से छनकर आती एक धीमी सी धुंधलकी। उसने मीरा को धीरे से बिस्तर पर लिटाया और खुद भी उसके ऊपर आ गया। “दीदी,” उसने फुसफुसाया, “आज मैं आपको जन्नत दिखाऊंगा।”
रोहन ने मीरा की साड़ी हटाई, फिर ब्लाउज और पेटीकोट। मीरा का शरीर, जो कभी सिर्फ माँ और पत्नी का शरीर था, आज एक प्रेमी के सामने पूरी कामुकता के साथ प्रस्तुत था। रोहन ने उसकी अधेड़ देह को निहारा, उसकी आँखों में वासना और प्यार दोनों थे। उसने अपने कपड़े भी उतारे। दोनों नग्न थे, एक-दूसरे की गर्मी में डूबे हुए। रोहन ने मीरा के स्तनों को अपने हाथों में भरा, उन्हें दबाया, चूमा। मीरा की आहें उसके कानों में मधुर संगीत सी गूँज रही थीं। वह अपने हाथों से रोहन के मजबूत शरीर को सहला रही थी, उसकी चिकनी छाती, उसकी चौड़ी कमर।
रोहन ने मीरा की जांघों को फैलाया और धीरे से उसके भीतर उतर गया। मीरा की देह का हर कोना जैसे झूम उठा। एक अजीब सी संतुष्टि, एक गहरा आनंद। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस उसे एक ऐसे अनुभव की ओर ले जा रहा था, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। रोहन की हर धकेल से मीरा की आत्मा तक में कंपन हो रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, होंठों से निकलती सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं। रोहन ने अपनी गति बढ़ाई, और मीरा भी उसके साथ ताल मिलाने लगी। वह पूरी तरह से मुक्त हो चुकी थी, अपने शरीर की हर इच्छा को जी रही थी। कुछ ही पल में, एक तीव्र, मीठी पीड़ा के साथ, मीरा अपने चरम पर पहुँच गई। उसके बाद रोहन भी एक गहरी साँस के साथ उसके ऊपर ढीला पड़ गया।
दोनों पसीने से लथपथ थे, एक-दूसरे की बांहों में सिमटे हुए। मीरा के भीतर एक शांति थी, एक संतुष्टि थी। रोहन ने उसके माथे को चूमा। “कैसा लगा, दीदी?” उसने पूछा। मीरा ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी आँखों में देखा। “तुमने मुझे फिर से जीना सिखा दिया, रोहन,” उसने धीमे से फुसफुसाया। यह एक नया अध्याय था, मीरा के जीवन में अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस, जो उसके तन और मन दोनों को हमेशा के लिए तरोताज़ा कर गया था।
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