जब शहर पर बारिश की बूँदें पड़ रही थीं, तब ऋतु के एकाकी कमरे में वासना की एक अनकही प्यास जाग रही थी। उसकी उंगलियाँ अपने गीले होंठों पर फिर रही थीं, और आँखें खिड़की से बाहर बरसते पानी को निहार रही थीं, पर मन में कुछ और ही तूफ़ान उठ रहा था। आज उसे एक **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** की तीव्र इच्छा हो रही थी, एक ऐसी मुलाकात जो उसकी आत्मा को झकझोर दे, उसके जिस्म की हर नस को जगा दे।
तभी दरवाज़े पर एक धीमी-सी दस्तक हुई। ऋतु चौंकी, इतनी रात गए कौन हो सकता है? उसने हिचकिचाते हुए दरवाज़ा खोला, और सामने एक लंबा, सुगठित पुरुष खड़ा था, जिसकी आँखों में एक रहस्यमयी चमक थी। उसका नाम विक्रम था, और वह पड़ोस की बिल्डिंग में रहता था, बस पानी की पाइप में कुछ दिक्कत बताने आया था, जो दोनों के फ़्लैट्स को जोड़ती थी। पर ऋतु को लगा जैसे उसकी आँखों ने उसके जिस्म की हर परत को बेध दिया हो। एक हल्की-सी मुस्कान उसके होठों पर आई, “अंदर आइए ना, बाहर बहुत बारिश है।”
विक्रम अंदर आया, और कमरे में उसकी मर्दाना खुशबू फैल गई, जिसने ऋतु की साँसों को और तेज़ कर दिया। बातें धीरे-धीरे सामान्य पाइप प्रॉब्लम से हटकर, जीवन, अकेलेपन और अनकही इच्छाओं पर आ गईं। उनकी आँखें एक-दूसरे में खो गईं, और समय जैसे थम-सा गया। विक्रम ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और ऋतु की गीली लटों को उसके चेहरे से हटाया। इस हल्के से स्पर्श से ऋतु के पूरे जिस्म में एक सिहरन दौड़ गई। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और आँखें अर्ध-खुली रह गईं, जो विक्रम के अगले कदम का इंतज़ार कर रही थीं।
विक्रम ने धीमे से उसके गाल को छुआ, उसकी उंगलियाँ उसके होंठों की ओर बढ़ीं। “तुम बहुत खूबसूरत हो, ऋतु,” उसकी आवाज़ में एक मादक खनक थी, जिसने ऋतु के दिल की धड़कनों को और बढ़ा दिया। इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, विक्रम के होंठ उसके होंठों पर उतर आए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था, यह वासना और बेकाबू इच्छाओं का संगम था। उसकी जीभ ने ऋतु के मुँह में अपनी जगह बनाई, और ऋतु ने भी उतनी ही तीव्रता से जवाब दिया। उनके होंठों का यह युद्ध उनके जिस्मों में आग लगा रहा था।
विक्रम ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया, उसके नख शरीर से चिपक गए। उसके हाथ धीरे-धीरे ऋतु की कमर से होते हुए उसकी पीठ पर फिरे, फिर ऊपर की ओर बढ़ते हुए उसके ब्लाउज के किनारों को टटोला। ऋतु की आहें उसके मुँह में ही दब गईं जब उसने ब्लाउज के हुक खोल दिए। विक्रम ने उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स नीचे सरका दीं, और ऋतु के सुडौल स्तन आज़ाद हो गए। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया, उसके निप्पल को धीरे-धीरे चूसा और हल्के से काटा। ऋतु ने अपनी कमर को आर्क देते हुए अपनी सारी लज़्ज़त उसके मुँह में उड़ेल दी। उसके दूसरे हाथ ने ऋतु की साड़ी खोली, और वह कुछ ही पलों में अपने अंतर्वस्त्रों में खड़ी थी।
विक्रम ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, और खुद भी अपने कपड़े उतारने लगा। ऋतु की आँखें उसकी मर्दानगी को निहार रही थीं, जो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था। वह एक पल भी बर्बाद नहीं करना चाहती थी। उसने विक्रम को अपनी ओर खींचा, उसके उत्तेजित फण को अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। विक्रम की आँखें बंद हो गईं, और उसने एक गहरी साँस ली। “ऋतु,” वह बस इतना ही कह पाया, उसकी आवाज़ वासना से भरी हुई थी।
ऋतु ने उसे अपने ऊपर खींच लिया, उसकी जाँघें खोल दीं। विक्रम ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया, और अपने मजबूत अंग को ऋतु की रसीली गुफा के द्वार पर टिका दिया। एक पल का इंतज़ार, और फिर उसने धीरे-धीरे भीतर पैठ बनानी शुरू की। ऋतु ने एक गहरी आह भरी, उसकी आँखों से खुशी के आँसू छलक आए। भीतर की गर्माहट और कसाबट ने विक्रम को मदहोश कर दिया। उसने लयबद्ध तरीके से आगे-पीछे होना शुरू किया, हर धक्का ऋतु की आत्मा को हिला रहा था। “आह… हाँ… और तेज़…” ऋतु फुसफुसाई, उसकी आवाज़ वासना और पीड़ा के मिश्रण से भरी थी।
यह **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** उसकी कल्पना से कहीं बढ़कर थी। वे दोनों एक दूसरे में इस कदर समा गए थे कि उन्हें किसी और चीज़ का होश नहीं था। जिस्मों का संगम चरम पर था। विक्रम ने अपनी पूरी ताक़त से भीतर पैठ बनाई, और ऋतु के शरीर में कंपन होने लगा। उसकी आँखें पलट गईं, और एक तीव्र चीख उसके गले से निकली, जब उसने चरमसुख का अनुभव किया। विक्रम ने भी अपनी सारी मर्दानगी ऋतु की गहराइयों में उड़ेल दी, और फिर वे दोनों एक-दूसरे की बाँहों में हाँफते हुए पड़े रहे।
बारिश अभी भी बाहर बरस रही थी, पर अंदर का तूफ़ान शांत हो चुका था। ऋतु ने विक्रम को कस कर अपनी बाँहों में भर लिया। वह जानती थी कि यह **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** उसकी आत्मा पर हमेशा के लिए अंकित हो चुकी थी। यह सिर्फ़ जिस्मों का मिलन नहीं था, बल्कि दो प्यासी आत्माओं का एक अनकहा, मदहोश संगम था, जिसने उन्हें हमेशा के लिए बदल दिया था। उनकी साँसें अभी भी एक-दूसरे की गर्माहट में खोई हुई थीं, और वे दोनों एक दूसरे की बाहों में उसी संतुष्टि के साथ सो गए, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
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