आज की रात सपना के जिस्म में कुछ अजीब सी बेचैनी थी, एक अनकही प्यास जो उसे अंदर से जला रही थी। गांव के मेले से लौटते हुए हल्की बारिश और ठंडक ने उसके बदन में एक सिहरन पैदा कर दी थी, पर यह सिहरन सिर्फ मौसम की नहीं थी। उसके भीतर कुछ और ही सुलग रहा था। वह अपने छोटे से कमरे में अंधेरा होते ही और भी अकेली महसूस कर रही थी, जब अचानक बिजली चली गई। घना अंधेरा और बाहर बरसती बूँदें उसकी उत्सुकता को और बढ़ा रही थीं।
तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। सपना थोड़ी सहमी, इतनी रात गए कौन हो सकता है? उसने हिचकिचाते हुए दरवाज़ा खोला। सामने एक लंबी, चौड़ी छाती वाला पुरुष खड़ा था, उसकी आँखें अँधेरे में भी चमक रही थीं। वह गाँव में नया आया हुआ राहुल था, जिसे सपना ने शायद एक-दो बार दूर से देखा था। “माफ़ करना, बिजली नहीं है और रास्ता भटक गया हूँ। क्या थोड़ी देर ठहरने की जगह मिल सकती है?” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी जो सपना के दिल को छू गई।
सपना ने बिना कुछ सोचे-समझे उसे अंदर आने दिया। दीये की मंद रोशनी में उनके चेहरे एक-दूसरे के बेहद करीब थे। राहुल की आँखों में एक ऐसी लपट थी जो सपना की अनकही चाहत को पहचान गई। यह एक **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** थी, जिसकी कल्पना भी सपना ने कभी नहीं की थी। राहुल ने धीरे से उसके कंधे को छुआ, एक बिजली सी दौड़ी सपना के बदन में। उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“तुम परेशान दिख रही हो,” राहुल ने फुसफुसाते हुए कहा और उसका हाथ सपना की कमर की तरफ बढ़ गया। सपना के होंठों से एक धीमी आह निकली। उसकी कमर पर राहुल की उँगलियाँ जादू कर रही थीं। उसने बिना किसी रोक-टोक के खुद को उसके हवाले कर दिया। राहुल ने उसे अपनी बाहों में कस लिया, उनके जिस्मों की गरमी एक-दूसरे में घुलने लगी। उसके होंठ सपना के नर्म होंठों पर उतरे, एक गहरा, मदहोश कर देने वाला चुंबन। सपना ने भी अपनी आँखें बंद कर लीं और उस पल में पूरी तरह डूब गई।
राहुल के होंठ धीरे-धीरे उसकी गर्दन से होते हुए उसके कानों तक पहुँचे, जहाँ उसने हल्के से काटते हुए कहा, “तुम्हारी हरारत मुझे पागल कर रही है।” सपना के बदन में एक लहर दौड़ गई। उसके हाथ राहुल की चौड़ी पीठ पर घूमने लगे, उसकी शर्ट के नीचे की त्वचा की गर्माहट महसूस करते हुए। राहुल ने उसे धीरे से बिस्तर पर धकेला। दीये की रोशनी में उनके साये एक-दूसरे में समा रहे थे। उसने सपना की साड़ी खोली, फिर ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतार दिए। सपना अब सिर्फ अपने अंतरवस्त्रों में थी, उसका जिस्म दीये की रोशनी में चमक रहा था, हर साँस के साथ उसके उभरे हुए वक्ष ऊपर-नीचे हो रहे थे।
राहुल ने झुककर उसके वक्ष को अपने होंठों से छुआ, फिर धीरे-धीरे उसके निप्पलों को अपनी ज़ुबान से सहलाया। सपना ने एक गहरी सिसकी भरी, उसका पूरा बदन राहुल के स्पर्श से कांप रहा था। उसकी हर हरकत में एक ऐसा जादू था कि सपना बस खोती चली गई, यह **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** उसके हर अंग में बसी थी। राहुल ने उसके पैंटी को भी हटा दिया, और सपना अब पूर्ण रूप से नग्न थी, उसकी जांघों के बीच की नमी राहुल को साफ महसूस हो रही थी। उसने अपनी उँगलियाँ वहाँ फेरनी शुरू कीं, सपना के होंठों से धीमी आहें निकलती रहीं। वह पूरी तरह से भीग चुकी थी, अपनी प्यास बुझाने के लिए तड़प रही थी।
राहुल ने अपनी पैंट भी उतार दी, और उसका सख्त, उत्तेजित अंग सपना के सामने था। सपना ने थोड़ी सी शरम से आँखें बंद कर लीं, पर उसके दिल में एक तीव्र चाहत थी। राहुल ने उसे अपने ऊपर खींचा और फिर धीरे-धीरे खुद को उसके अंदर उतारा। एक तेज़ दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा सुकून सपना के पूरे वजूद में फैल गया। उसने कसकर राहुल को जकड़ लिया। राहुल ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए, उनकी साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं, आहों और सिसकियों का शोर कमरे में गूँज रहा था।
उनके जिस्मों की धमक और प्यास उन्हें चरम सुख की ओर ले जा रही थी। हर धक्के के साथ सपना को लग रहा था जैसे उसकी रूह पिघल रही हो। राहुल ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई, और सपना की चीख उसके मुँह से निकली जब उसके अंदर का सारा पानी बाहर आ गया। वह पूरी तरह से शांत हो गई, राहुल भी कुछ पलों बाद उसके ऊपर गिर गया, गहरी साँसें लेते हुए।
आज की रात उसकी जिंदगी की सबसे यादगार रात बन गई थी – एक **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** जिसने उसे पूरी तरह से भर दिया। उसने कभी नहीं सोचा था कि एक अंजान स्पर्श उसके भीतर की इतनी गहरी प्यास बुझा देगा। अँधेरे में भी उनके जिस्मों से निकली गर्माहट ने उस रात को एक अमर याद बना दिया। सपना जानती थी कि यह रात हमेशा उसके ज़हन में ज़िंदा रहेगी, उस अंजान शख्स के साथ उसकी पहली और शायद आखिरी, पर सबसे रोमांचक मुलाकात।
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