उस बारिश वाली रात, प्रिया के अंदर कुछ ऐसा धधक रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। बाहर बिजली कड़क रही थी, हवा सनसना रही थी और उसके एकाकीपन को और गहरा कर रही थी। शहर की बत्तियाँ कब की गुल हो चुकी थीं और पूरा इलाका अँधेरे में डूबा था, सिवाय दूर कहीं से आती एम्बुलेंस की हल्की रोशनी के। प्रिया अपनी खिड़की से बाहर देख रही थी, बारिश की बूँदें उसके चेहरे पर पड़ रही थीं और उसके होंठों पर एक अजीब सी प्यास जगा रही थीं।
तभी, दरवाजे पर एक हल्की सी दस्तक हुई। प्रिया का दिल एक पल को धड़कना भूल गया। इस आधी रात, इस तूफानी मौसम में कौन होगा? उसने धीरे से दरवाजा खोला और अँधेरे में एक परछाई सी खड़ी देखी। “माफ कीजिएगा,” एक गहरी, मर्दाना आवाज़ सुनाई दी, “मैं ऊपर वाले फ्लैट में नया आया हूँ, रोहन। बिजली जाने से मेरा जेनरेटर नहीं चल रहा और मुझे कुछ मोमबत्तियाँ चाहिए थीं।”
प्रिया ने मोमबत्ती की हल्की रोशनी में उसे देखा। रोहन। उसका चेहरा, उसकी आँखें, उसकी मजबूत काया, सभी में एक ऐसी खिंचाव थी जो प्रिया को अपनी ओर खींच रही थी। यह एक ऐसी **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात** थी, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उसने हिचकिचाते हुए उसे अंदर आने को कहा। “अंदर आइए, मैं देखती हूँ मेरे पास क्या है।”
रोहन अंदर आया और उसके घर की नम गर्मी ने उसे घेर लिया। बारिश का शोर उनके बीच की चुप्पी को और भी कामुक बना रहा था। उनकी आँखें बार-बार एक-दूसरे से टकरा रही थीं, और हर टकराव एक गहरी इच्छा को जन्म दे रहा था। प्रिया ने मोमबत्तियाँ ढूँढीं और जब वह वापस लौटी, तो रोहन उसके काफी करीब खड़ा था। उसका हाथ अनजाने में प्रिया के हाथ से टकराया। एक बिजली सी दौड़ गई, जो उनकी नसों में फैल गई और उनके शरीर में सिहरन पैदा कर गई।
रोहन ने धीमे से प्रिया का हाथ थाम लिया। उसकी उंगलियाँ उसकी हथेली पर रेंगने लगीं। प्रिया की साँसें तेज हो गईं। “तुम कितनी खूबसूरत हो, प्रिया,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक मीठी मदहोशी थी। प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी आँखों से उसे और करीब आने का न्यौता दिया। रोहन ने अपनी कमर से उसे अपनी ओर खींचा। उनके शरीर एक दूसरे से चिपक गए, उनके होंठ आपस में मिल गए।
उनका पहला चुंबन किसी तूफानी समंदर की लहरों जैसा था, जो एक दूसरे से टकराकर शांत होने को बेताब थीं। प्रिया ने अपनी बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं और उसे और कसकर पकड़ लिया। रोहन के होंठों का गर्म स्पर्श उसके पूरे शरीर में आग लगा रहा था। वे एक-दूसरे को चूमते हुए बेडरूम तक पहुँचे, जहाँ मोमबत्ती की लौ धीमी गति से झिलमिला रही थी।
कपड़े एक-एक करके फर्श पर गिर रहे थे, जैसे कि वे उनके बीच की हर बाधा को हटा रहे हों। प्रिया की साँसें तेज हो गईं जब रोहन की उंगलियाँ उसकी कमर पर रेंगती हुई, उसकी साड़ी के पल्लू से नीचे सरकीं और उसके पेट की कोमलता को छू गईं। फिर उसने प्रिया की ब्रा को खोला और उसके भरे हुए वक्षों को अपनी हथेलियों में भर लिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
रोहन ने प्रिया को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर छा गया। उसकी जीभ उसके निप्पल्स पर घूमने लगी, जिससे प्रिया के अंदर एक तीव्र गुदगुदी हुई। प्रिया ने अपनी टाँगें फैला दीं और उसे अपने अंदर समाने को कह दिया। रोहन ने उसकी योनि के द्वार पर अपना लिंग रखा और एक गहरी साँस लेकर, उसे पूरी तरह अपने अंदर ले लिया। प्रिया की चीखें उसके मुँह से निकलीं, आनंद और दर्द का एक अद्भुत मिश्रण।
दोनों एक ही लय में डूब गए, हर धक्के के साथ एक नई ऊँचाई को छू रहे थे। प्रिया अपनी कमर उठा-उठाकर उसे अपने अंदर और गहरा उतरने को कह रही थी। उनकी देहें पसीने से भीग चुकी थीं, लेकिन आग अभी भी धधक रही थी। हर धक्के के साथ, उनके शरीर की गहराइयाँ एक-दूसरे से जुड़ रही थीं। प्रिया ने अपने नाखूनों से उसकी पीठ को खुरचा, उसकी मदहोशी अपनी चरम पर पहुँच चुकी थी।
एक चरम सुख की लहर ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। प्रिया ने कसकर उसे जकड़ लिया, उसके अंदर से एक गर्म धार बह निकली। रोहन भी उसके अंदर अपने कामरस को छोड़ता हुआ, उसी सुख में डूब गया। उनकी यह **अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात**, उनके जीवन का सबसे उत्तेजक क्षण बन गई थी, जिसने उन्हें अकल्पनीय आनंद से भर दिया था।
वे एक दूसरे की बाँहों में सिमट कर लेटे रहे, बारिश अब भी हो रही थी, लेकिन उनके अंदर एक नई सुबह खिल चुकी थी। दो अजनबियों ने एक तूफानी रात में एक-दूसरे में अपना घर ढूँढ लिया था। एक ऐसी शुरुआत, जिसकी उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी, लेकिन जिसे उन्होंने पूरी तरह से स्वीकार कर लिया था। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, और उनके दिल एक-दूसरे के लिए धड़क रहे थे, उस बेकाबू हवस के बाद अब एक अटूट बंधन की शुरुआत हो चुकी थी।
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