सीमा की उंगलियाँ जब राहुल की बांह से सहसा छू गईं, तो एक बिजली सी उसके पूरे बदन में दौड़ गई। शाम के सात बज चुके थे और ऑफिस खाली हो रहा था। सिर्फ वे दोनों एक ज़रूरी प्रोजेक्ट पर देर तक रुके थे। हवा में एक अजीब सी उत्तेजना घुली थी, जो सिर्फ काम की थकान नहीं, बल्कि कुछ और ही संकेत दे रही थी। राहुल ने जब पलटकर देखा, तो उसकी गहरी आँखों में एक ऐसी ललक थी जिसने सीमा के दिल की धड़कनें तेज़ कर दीं।
“आज रात देर हो जाएगी, सीमा,” राहुल ने कहा, उसकी आवाज़ में एक रसीलापन था।
“लगता तो है,” सीमा ने जवाब दिया, अपनी साँसों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए। उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से थोड़ा खिसक गया, जिससे उसके ब्लाउज की किनार और गहरा गला राहुल की नज़रों के सामने आ गया। उसने जानबूझकर उसे ठीक नहीं किया। यह एक मूक आमंत्रण था, एक ऐसी चुनौती जिसे राहुल ने तुरंत भांप लिया।
धीरे-धीरे वे प्रोजेक्ट पर बात कर रहे थे, लेकिन उनकी आँखों का संपर्क, उनके शरीर की भाषा कुछ और ही बयां कर रही थी। राहुल की उंगलियाँ माउस पर थीं, लेकिन उसकी आँखें सीमा के होंठों पर टिकी थीं। सीमा ने भी महसूस किया कि यह सिर्फ काम नहीं, बल्कि **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** की शुरुआत थी। उसकी देह में आग सी लग गई थी।
अचानक राहुल ने अपना हाथ बढ़ाया और सीमा के हाथ को थाम लिया, जो कीबोर्ड पर था। एक पल को सीमा चौंक गई, लेकिन फिर उसकी उंगलियाँ राहुल की उंगलियों में कस गईं। उनकी हथेलियों की गर्माहट एक-दूसरे में समा गई। राहुल उठा और धीरे-धीरे सीमा की कुर्सी के पास आया। उसकी आँखों में जुनून की आग साफ दिख रही थी। “हम अब और नाटक नहीं कर सकते, है ना सीमा?” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी साँसें सीमा के गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
सीमा ने बस सर हिलाया। शब्दों की अब कोई ज़रूरत नहीं थी। राहुल ने झुककर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था। यह प्यास बुझाने वाला, गहरा और जोशीला चुंबन था जिसने सीमा की हर इंद्रिय को जगा दिया। उसके होंठ राहुल के होंठों का स्वाद ले रहे थे, उसकी जीभ उसकी जीभ से उलझ रही थी। सीमा ने अपने हाथ राहुल की गर्दन में डाल दिए और उसे और करीब खींच लिया।
राहुल ने सीमा को अपनी बांहों में उठाया और उसे अपने डेस्क पर बिठा दिया। उसकी साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह से खिसक चुका था। राहुल ने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए, उसकी आँखें सीमा की आँखों में गड़ी थीं। एक-एक करके बटन खुलते गए और सीमा के उठे हुए वक्ष अब उसके सामने थे, हल्के पसीने से भीगे हुए। राहुल ने झुककर उन्हें चूमना शुरू किया, धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए। सीमा की आहें ऑफिस की शांत हवा में गूंज उठीं। “आह… राहुल,” उसने कराहते हुए कहा।
राहुल ने उसके ब्लाउज को उतार फेंका और फिर उसकी पेटीकोट की डोरी खोली। साड़ी और पेटीकोट राहुल के हाथों से सरककर फर्श पर गिर गए, जिससे सीमा अब सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी। राहुल की आँखें उसकी हर वक्र पर ठहर गईं। उसने झुककर सीमा के पेट पर चुंबन किया, फिर उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी स्त्रीत्व को सहलाया। सीमा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होंठों से बस हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं। राहुल का हर स्पर्श, हर चुंबन बता रहा था कि उनका **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** अब किसी भी सीमा में बंधने वाला नहीं था।
राहुल ने उसकी पैंटी को भी हटा दिया और अब सीमा पूरी तरह से उसके सामने थी, वासना की आग में जलती हुई। राहुल ने अपने कपड़े भी उतार दिए और सीमा की जांघों के बीच अपनी जगह बनाई। उसने धीरे से उसे फैलाया और अपनी ऊँगली से उसकी प्यासी दरार को सहलाया। सीमा ने अपनी कमर ऊपर उठाई, और ज्यादा पाने की चाह में। राहुल ने बिना और इंतज़ार किए, खुद को उसके भीतर उतार दिया।
एक गहरी आह के साथ सीमा ने राहुल को कसकर पकड़ लिया। शुरुआत में हल्का दर्द था, लेकिन जल्द ही वह असीम सुख में बदल गया। राहुल ने धीरे-धीरे, फिर तेज़ गति से अपनी लय बनाई। उनके शरीर एक-दूसरे से टकराते रहे, उनके होंठ आपस में जुड़े रहे, और ऑफिस का केबिन उनके प्यार की गरमाहट से भर गया। सीमा ने अपनी टांगें राहुल की कमर के इर्द-गिर्द कस लीं और उसके हर धक्के के साथ अपनी कमर ऊपर उठाती रही। वे दोनों एक साथ चरम सुख तक पहुँचे, उनकी आहें और चीखें एक मधुर संगीत की तरह गूंज रही थीं। उनका बेकाबू जुनून उस रात ऑफिस की दीवारों को चीरता हुआ आसमान को छू रहा था। जब वे शांत हुए, तो एक-दूसरे की बांहों में निढाल पड़े थे, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे, लेकिन उनके दिल संतुष्टि और एक नए, गहरे बंधन से भरे हुए थे। यह बस शुरुआत थी।
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