शाम ढल चुकी थी, लेकिन ऑफिस में फैली सन्नाटे से ज़्यादा घना कुछ था तो वो थी राहुल की आँखें जो प्रिया पर गड़ी थीं। प्रिया, लैपटॉप पर अपनी उँगलियाँ चला रही थी, मगर उसे महसूस हो रहा था कि राहुल की साँसों की गरमाहट उसके कंधे पर पड़ रही है। आज काम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था और इसी बहाने उनकी दबी हुई हसरतें जाग उठी थीं।
“प्रिया, बहुत देर हो गई, चले?” राहुल की आवाज़ ने उस सन्नाटे को तोड़ा। प्रिया ने सिर उठाकर देखा, राहुल उसके ठीक सामने खड़ा था, उसकी शर्ट की खुली कॉलर से झाँकती छाती और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो प्रिया के दिल की धड़कनों को तेज़ कर रही थी। “बस पाँच मिनट, राहुल,” प्रिया ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में एक अनकही गुहार थी। राहुल मुस्कुराया, “ठीक है, मैं अपनी गाड़ी निकालता हूँ। तुम्हें ड्रॉप कर देता हूँ।”
गाड़ी में खामोशी थी, लेकिन उस खामोशी में हज़ारों अनकहे शब्द तैर रहे थे। प्रिया के अपार्टमेंट के पास गाड़ी रुकते ही राहुल ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। एक हल्की सी सिहरन प्रिया के पूरे बदन में दौड़ गई। “कॉफी पियोगी?” प्रिया ने धीरे से पूछा, उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी, पर दिल एक ख़ास पल चाहता था। राहुल की आँखों में लालच उभर आया। “ज़रूर,” उसने कहा और प्रिया ने चाभी घुमाई।
घर के अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद होते ही, राहुल ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। “यह क्या कर रहे हो, राहुल?” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा, पर उसके होंठ राहुल के होंठों की ओर खिंचे चले जा रहे थे। उनकी साँसें एक-दूसरे में उलझ गईं और फिर उनके होंठ एक-दूसरे से जा मिले। यह कोई आम चुंबन नहीं था। यह उनके भीतर सालों से पनप रहे **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** का इजहार था। राहुल की जीभ ने प्रिया के मुँह का रास्ता खोज लिया, मीठे रस की तरह वह उसे चूसने लगा। प्रिया के हाथ राहुल की गर्दन पर कस गए, और वह उसके शरीर में समाती चली गई।
राहुल ने प्रिया को गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ बढ़ने लगा। प्रिया ने अपने पैर राहुल की कमर में कस लिए और उसके गले पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाई, “और नहीं रुका जाता, राहुल!” राहुल ने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। उसके हाथ प्रिया के टॉप के बटन खोलने लगे, और प्रिया ने भी बड़ी फुर्ती से उसकी शर्ट उतार दी। राहुल का मर्दाना, गठीला बदन उसके सामने था। प्रिया की आँखें राहुल के सीने पर अटकीं जहाँ बाल उसके पसीने से चिपके थे। राहुल ने प्रिया के टॉप को पूरी तरह हटा दिया, उसके ब्रा में क़ैद सुडौल वक्षों को देखकर उसकी साँखों की गति और तेज़ हो गई। उसने धीरे से ब्रा खोली और प्रिया के उभरे हुए स्तनों को आज़ाद कर दिया। “कितनी खूबसूरत हो तुम, प्रिया,” राहुल ने फुसफुसाते हुए एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद से भरी एक सिसकी निकल गई।
राहुल के हाथ प्रिया की पैंटी में फिसल गए और उसने उसे एक झटके में उतार दिया। प्रिया का कामाग्नि से दहकता योनि मार्ग राहुल की उँगलियों का इंतज़ार कर रहा था। राहुल ने अपनी एक उँगली उसके भीतर उतारी। प्रिया तड़प उठी, उसकी आँखें मुँद गईं और मुँह से आहें निकलने लगीं। राहुल ने अपनी उँगलियों का खेल जारी रखा, उन्हें अंदर-बाहर करते हुए और प्रिया के बदन में आग लगाते हुए। प्रिया के पूरे शरीर में बिजली दौड़ रही थी। वह छटपटा रही थी, “और नहीं राहुल, अब और नहीं… आ जाओ मुझमें।”
राहुल ने अपनी पैंट उतार दी, उसका खड़ा लिंग प्रिया को पुकार रहा था। उसने प्रिया की टांगों को थोड़ा और फैलाया और अपने लिंग को धीरे-धीरे प्रिया की योनि के द्वार पर लगाया। प्रिया ने अपनी कमर उठाई और राहुल को अपने भीतर समा लेने को बेताब थी। राहुल ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उसका पूरा लिंग प्रिया के भीतर समा गया। “आह!” प्रिया के मुँह से चीत्कार निकल गई। दोनों के शरीर एक-दूसरे में जकड़ गए। राहुल ने अपनी गति बढ़ाई, अंदर-बाहर होते हुए वह प्रिया को उस परम सुख की ओर ले जा रहा था। प्रिया की आवाज़ें, उसकी आहें, राहुल को और तेज़ होने के लिए उकसा रही थीं। उनके शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे, पसीना बह रहा था और कमरे में वासना की गहरी ख़ुशबू फ़ैल चुकी थी।
राहुल ने प्रिया को पलट दिया और उसे डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा। उसने पीछे से अपना लिंग प्रिया के भीतर धंसाया और फिर से अपनी गति बढ़ा दी। प्रिया की कमर मटक रही थी, उसकी नितंबों से राहुल के कूल्हे टकरा रहे थे। उनकी हर धक्के के साथ एक गहरी, संतुष्टि भरी आह निकल रही थी। उनका **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** अपनी चरम सीमा पर था। दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उनकी साँसें तेज़ थीं और शरीर थरथरा रहे थे। फिर एक आख़िरी ज़ोरदार धक्के के साथ, दोनों एक साथ चरम सुख को प्राप्त हुए। राहुल का वीर्य प्रिया के भीतर भर गया और प्रिया का बदन शिथिल होकर राहुल के ऊपर गिर पड़ा।
वे दोनों कुछ देर तक यूँ ही एक-दूसरे में जकड़े रहे, उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन अब उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और असीम प्रेम की चमक थी। राहुल ने प्रिया के माथे को चूमा, और प्रिया ने उसके सीने पर अपना सिर रखकर एक गहरी साँस ली। यह रात केवल कामुकता की नहीं थी, बल्कि दो दिलों के बेकाबू प्यार की एक मुकम्मल कहानी थी, जिसने दफ़्तर की मर्यादाओं को तोड़कर उन्हें एक कर दिया था।
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