उसकी हर नज़र, हर मुस्कान प्रिया के जिस्म में एक धीमी आग सुलगा देती थी, एक ऐसी आग जिससे वह अंजान नहीं रहना चाहती थी। राज, उसका सीनियर मैनेजर, दफ्तर में एक कड़क मिजाज बॉस के रूप में जाना जाता था, पर प्रिया के लिए वह एक ऐसी हसरत था जो उसकी रातों की नींद हराम कर देती थी। पिछले कुछ हफ्तों से, उनकी निगाहें अक्सर टकरातीं, और हर बार प्रिया के पेट में तितलियाँ उड़ने लगतीं। यह थी प्रिया और राज की ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान की शुरुआत, जो दफ्तर के सख्त नियमों को तार-तार कर रही थी।
एक शाम, जब दफ्तर लगभग खाली हो चुका था, प्रिया अपने डेस्क पर बैठी देर रात तक काम कर रही थी। राज अचानक उसके कैबिन में आया, “अभी तक घर नहीं गई, प्रिया?” उसकी आवाज में एक अजीब सी गर्माहट थी।
प्रिया ने गर्दन उठाई, उसकी धड़कनें तेज हो गईं। “बस थोड़ा काम रह गया है सर।”
राज उसके करीब आया, उसकी कुर्सी के पीछे खड़ा हो गया। प्रिया को उसकी साँसों की गरमाहट अपनी गर्दन पर महसूस हुई। उसने जानबूझकर अपना हाथ प्रिया की कुर्सी के हैंडल पर रखा, उसकी उंगलियाँ प्रिया की उंगलियों से छू गईं। एक बिजली सी दौड़ी प्रिया के जिस्म में।
“लगता है तुम्हें मदद की जरूरत है,” राज ने धीमे से फुसफुसाया, और प्रिया की गर्दन पर झुककर उसके कान के पास अपने होंठ ले आया। उसकी साँसों की गरमाहट ने प्रिया के रोंगटे खड़े कर दिए। प्रिया का बदन काँप गया।
“सर…” प्रिया मुश्किल से बोल पाई।
राज ने उसके बालों को धीरे से सहलाया और फिर प्रिया की कुर्सी को थोड़ा घुमाकर उसे अपनी ओर कर लिया। उनकी आँखें मिलीं, और उस पल में दफ्तर की सारी मर्यादाएं टूट गईं। राज ने अपना एक हाथ प्रिया की कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींचा। प्रिया ने बिना सोचे समझे खुद को उसके हवाले कर दिया। उनके होंठ एक-दूसरे से जा मिले, एक गहरी, प्यासी चुंबन। राज के होंठों की गरमाहट, उसकी जुबान का स्पर्श प्रिया को मदहोश कर गया। वह भी उतनी ही शिद्दत से उसका साथ दे रही थी, मानो सालों की प्यास बुझा रही हो।
चुंबन गहरा होता चला गया, और राज के हाथ प्रिया के जिस्म पर बेबाकी से घूमने लगे। उसने प्रिया की कमर को जकड़ लिया और उसे अपनी गोद में उठा लिया। प्रिया ने अपनी टाँगें राज की कमर के चारों ओर कस लीं, और उसके होंठों को और भी जोश से चूमने लगी। राज उसे अपने कैबिन की ओर ले गया, जो अब उनकी हवस का गुप्त ठिकाना बन चुका था। कैबिन के दरवाजे को अंदर से बंद करते ही, राज ने प्रिया को मेज पर लिटा दिया। मेज की ठंडी सतह पर भी प्रिया के जिस्म में आग लगी हुई थी।
राज ने तेजी से प्रिया के टॉप के बटन खोले और उसे उतार फेंका। प्रिया की गुलाबी ब्रा में कसे उसके सुडौल स्तनों को देखकर राज की साँसें तेज हो गईं। उसने बिना देर किए ब्रा को भी एक झटके में हटा दिया। प्रिया के नग्न स्तन उसकी आँखों के सामने थे, और राज ने अपनी हवस भरी निगाहों से उन्हें निहारा। वह जानता था कि यही उनकी ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान को आगे बढ़ाने का सबसे सही पल था, जब कोई देखने वाला नहीं था।
उसने अपने होंठ प्रिया के एक स्तन पर टिका दिए, और उसे बच्चे की तरह चूसने लगा। प्रिया के मुँह से दर्द भरी आह निकली, जो धीरे-धीरे सुख में बदल गई। “राज…आह्ह्ह्…” प्रिया के हाथ राज के बालों को कसकर पकड़ रहे थे, उसके नाखून उसकी खोपड़ी में गड़ रहे थे। राज ने उसके दूसरे स्तन को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया, और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा, प्रिया के स्कर्ट को भी उतार फेंका। अब प्रिया पूरी तरह से उसके सामने थी, सिर्फ एक छोटी सी पैंटी पहने। राज ने उसे भी एक झटके में खींच दिया। प्रिया शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में काँप रही थी, उसकी आँखें बंद थीं।
राज ने खुद के कपड़े भी तेजी से उतारे और बिना देर किए प्रिया के ऊपर आ गया। उसके गरम जिस्म का स्पर्श पाते ही प्रिया की उत्तेजना चरम पर पहुँच गई। राज ने प्रिया की टाँगों को उठाया और उन्हें फैलाकर उसके बीच अपनी जगह बना ली। प्रिया की योनि पहले से ही गीली और तैयार थी। राज ने धीरे-धीरे खुद को प्रिया में धंसाना शुरू किया। “आह्ह्ह्ह्… राज…” प्रिया की चीख उसके होंठों से निकलकर कैबिन की दीवारों में गूँज गई। पहली धमक के साथ ही प्रिया की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। राज ने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई। मेज पर उनके जिस्मों के टकराने की आवाजें और प्रिया की कामुक आहें दफ्तर की चुप्पी को तोड़ रही थीं। हर धक्के के साथ प्रिया का जिस्म उछल रहा था, और वह राज को और कसकर अपनी ओर खींच रही थी। उनकी सांसें तेज हो चुकी थीं, पसीना उनके जिस्मों से बह रहा था, और कमरा उनकी हवस की गंध से भर गया था।
कुछ देर बाद, एक तीव्र झटके के साथ, दोनों एक-दूसरे में सिमट गए। प्रिया के पूरे जिस्म में एक गहरी सिहरन दौड़ गई, और वह राज के साथ ही चरम सुख को प्राप्त हुई। राज भी प्रिया के ऊपर ढेर हो गया, उसकी साँसें अभी भी भारी थीं। दोनों कुछ देर तक यूँ ही पड़े रहे, एक-दूसरे की गर्माहट में खोए हुए। यह दफ्तर की बंद दीवारों में उनके चोरी छिपे प्यार का एक नया अध्याय था, एक ऐसा अध्याय जो अब हर रात लिखा जाएगा। उनकी यह ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान अब एक नियमित जरूरत बन चुकी थी, एक ऐसा नशा जिससे वे कभी बाहर नहीं निकलना चाहते थे।
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