संगीन रातें: बॉस के केबिन में प्रिया की हवस भरी दास्तान

आज प्रिया की धड़कनें कुछ ज्यादा ही तेज थीं, क्योंकि आज ऑफिस में उसे रोहन सर के साथ अकेले रुकना था। बाहर घुप अंधेरा था और ऑफिस के सारे कर्मचारी जा चुके थे। सिर्फ वही दोनों थे, एक प्रोजेक्ट पर काम करने का बहाना लिए रोहन के निजी केबिन में। प्रिया ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया, जिसकी छुअन से ही उसके शरीर में अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। रोहन सर, जो उसके सामने लैपटॉप पर झुके हुए थे, अचानक सिर उठाकर उसकी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी, जो प्रिया को अंदर तक झकझोर गई।

“प्रिया, यह फाइल यहाँ दे दो,” रोहन की आवाज़ ने उस चुप्पी को तोड़ा, पर आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी। प्रिया जब फाइल देने आगे बढ़ी, तो रोहन का हाथ ‘गलती से’ उसके नितंबों से छू गया। प्रिया एक पल के लिए कांप उठी, पर उसने अपने होंठ भींच लिए। रोहन ने तुरंत माफ़ी मांगी, पर उसकी आँखों में शरारत भरी मुस्कान थी। प्रिया को लगा जैसे उसकी साँसें अटक जाएंगी। वह समझ चुकी थी कि आज की रात सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहने वाली।

जैसे-जैसे काम खत्म होता गया, केबिन में तनाव बढ़ता गया। रोहन ने लैपटॉप बंद किया और प्रिया के सामने आकर खड़े हो गए। “प्रिया, तुम्हें देर हो गई है। मैं तुम्हें घर छोड़ दूँ?” उसने कहा, पर उसकी निगाहें प्रिया के होठों पर टिकी थीं। प्रिया ने धीरे से सिर उठाया और उसकी आँखों में देखा। उन आँखों में सिर्फ इच्छा थी, वासना थी और एक अदम्य आकर्षण था। प्रिया के भीतर भी एक अनकही हवस अंगड़ाई ले रही थी। “जी सर,” वह मुश्किल से कह पाई।

रोहन ने बिना कुछ कहे, केबिन का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। “प्रिया,” उसने धीरे से कहा, उसका हाथ प्रिया की कमर पर आ टिका। प्रिया का पूरा शरीर जैसे बिजली के झटके से थरथरा उठा। रोहन ने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह भूख, प्यास और कई दिनों की दबी हुई वासना का विस्फोट था। प्रिया ने भी पूरी तरह से समर्पण कर दिया, उसकी उंगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं।

चुंबन गहरा होता गया, और रोहन के हाथ उसकी साड़ी के पल्लू में घुस गए, उसकी मुलायम पीठ पर फैल गए। उसने प्रिया को हल्का सा उठाया और उसे अपने डेस्क पर बिठा लिया। प्रिया की साँसें तेज़ हो चुकी थीं। उसकी साड़ी धीरे-धीरे सरकने लगी और रोहन ने उसे अपनी बाहों में जकड़कर उसकी गर्दन और कंधों पर अपने होंठों से निशान बनाने शुरू कर दिए। “तुम्हारे लिए पागल हो गया हूँ, प्रिया,” रोहन फुसफुसाया, उसकी आवाज़ हवस से भरी थी। यह थी उनकी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** की पहली रात।

प्रिया की ब्रा के हुक खुलने में देर न लगी और उसके उभार रोहन के हाथों में भर गए। वह उन्हें सहलाने लगा, मसलने लगा, और प्रिया के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई। ऑफिस की ठंडी हवा में भी प्रिया को अपने शरीर में आग सी महसूस हो रही थी। रोहन ने प्रिया को डेस्क पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गए। प्रिया ने अपनी टाँगें उसके कमर के इर्द-गिर्द कस लीं। उसने रोहन की शर्ट के बटन खोले और उसके सीने पर अपनी उंगलियाँ फेरने लगी।

“रोक लो सर, कोई आ जाएगा,” प्रिया ने अपनी टूटती साँसों के बीच कहा, पर उसकी आवाज़ में रोकने की बजाय और उत्तेजित करने की इच्छा थी। रोहन ने उसकी बात अनसुनी कर दी, उसकी उंगलियाँ प्रिया की साड़ी के नीचे से होती हुई उसकी सलवार तक जा पहुँचीं। प्रिया की सलवार और पैंटी एक पल में हट चुकी थी, और रोहन की उंगलियाँ उसकी देह की गहराइयों को टटोलने लगीं। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी चीत्कार उसके गले से निकली, जब रोहन ने उसे अपनी उंगलियों से उत्तेजित करना शुरू किया।

केबिन में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें, उनके होंठों की चुंबन की आवाज़ें, और प्रिया की सिसकियाँ गूँज रही थीं। रोहन ने अपने पैंट उतारे और प्रिया की देह पर अपना गर्म अंग रख दिया। प्रिया की हवस भरी आहों के बीच रोहन ने अपनी कमर से एक तेज़ धक्का दिया और उसकी गर्म देह में समा गया। प्रिया की आँखें फैल गईं, उसके शरीर में जैसे एक भूकंप आ गया। रोहन ने उसे अपनी बाहों में कस लिया और दोनों एक-दूसरे में खो गए, अपनी हर दबी इच्छा को पूरा करते हुए।

ऑफिस की चारदीवारी के भीतर, उनकी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी। एक के बाद एक धक्के, प्रिया की चीत्कारें और रोहन की फुसफुसाहटें केबिन में गूँजती रहीं। कई मिनटों तक चले इस हवस भरे खेल के बाद, दोनों एक-दूसरे में लिपटकर हाँफते रहे। प्रिया ने रोहन के सीने पर सिर रख दिया, उसके शरीर में अभी भी सिहरन दौड़ रही थी।

रोहन ने प्रिया को अपनी बाहों में जकड़ा और फुसफुसाया, “हमारी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** अभी तो बस शुरू हुई है, जान।” प्रिया ने ऊपर देखा, उसकी आँखों में तृप्ति और एक नई भूख थी। यह रात उनके लिए एक नई शुरुआत थी, जहाँ ऑफिस सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि उनके गुप्त प्रेम का वासना-भरा मंदिर बन चुका था।

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