बंद केबिन, सुलगे जिस्म: ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान

उसकी साड़ी का पल्लू सरकते ही, राहुल की नज़रें प्रिया की गोरी कमर पर ठहर गईं, और कमरे का तापमान अचानक कई डिग्री बढ़ गया। रात के दस बज चुके थे, और ऑफिस में सन्नाटा पसरा था। सिर्फ़ हम दोनों, और हमारे बीच सुलग रही वो ख़ामोश आग। प्रिया, अपनी नई असाइनमेंट पर झुकी हुई थी, लेकिन मैं जानता था कि उसका ध्यान कहीं और था, ठीक मेरी तरह। यह हमारी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** की शुरुआत थी।

“प्रिया, यह रिपोर्ट अभी तक पूरी नहीं हुई?” मैंने जानबूझकर नज़दीक आते हुए कहा, ताकि उसकी कस्तूरी-सी महक मुझे अपने घेरे में ले ले। वह चौंकी, और उसकी गर्दन से बालों का गुच्छा एक तरफ़ खिसका, जिससे उसकी चिकनी त्वचा और भी आकर्षक लग रही थी। “बस सर, थोड़ा बाकी है।” उसकी आवाज़ में हल्की घबराहट थी, जो मुझे और उकसा रही थी।

मैंने उसके पास वाली कुर्सी खींची और बिल्कुल सटकर बैठ गया। मेरी उंगलियां उसकी उंगलियों के बेहद करीब थीं, कीबोर्ड पर। “मुझे दिखाओ कहाँ अटकी हो।” मेरा हाथ जानबूझकर उसकी हथेली से छू गया। एक बिजली सी दौड़ गई हम दोनों में। प्रिया ने नज़रें उठाईं, उसकी बड़ी-बड़ी काली आंखों में एक दबी हुई लपट देखी जा सकती थी। उस पल में, शब्द बेमानी थे। हमारी सांसें तेज़ हो चुकी थीं।

“यहां… यहां थोड़ी दिक्कत है,” प्रिया ने कांपती उंगलियों से स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया। मैंने बहाने से अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया, उसकी मुलायम त्वचा मेरे स्पर्श से सिहर उठी। फिर मैंने धीरे से अपनी उंगलियाँ उसकी हथेली में फँसाईं। उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश नहीं की। बल्कि, उसकी साँसें और तेज़ हो गईं। मैंने उसकी ओर झुककर फुसफुसाया, “लगता है इस रिपोर्ट को पूरा करने के लिए हमें थोड़ी ‘प्राइवेट’ जगह चाहिए।”

वह जानती थी मेरा इशारा कहाँ था। मैंने उसे अपने केबिन की ओर इशारा किया। बिना कुछ कहे, वह धीरे से उठी और मेरे पीछे चल दी। मेरे केबिन का दरवाज़ा बंद होते ही, वहाँ एक अजीब-सा तनाव घुल गया। हवा में कामुकता तैर रही थी। मैंने उसे अपनी डेस्क पर सहारा दिया, और वह धीरे से बैठ गई। मैं उसके बिल्कुल करीब खड़ा था, उसकी साँसों की गरमाहट महसूस करते हुए।

मैंने उसके गाल पर अपनी उंगलियाँ फेरीं, फिर उसकी ठुड्डी ऊपर उठाई। उसकी आँखें बंद हो गईं। उस पल में, मैं खुद को रोक नहीं पाया। मेरे होंठ उसके होंठों पर उतर आए, एक नरम, फिर गहरा चुंबन। प्रिया ने पहले संकोच किया, फिर उसने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और मेरे चुंबन का जवाब पूरी शिद्दत से दिया। उसकी बाँहें मेरी गर्दन के चारों ओर कस गईं। यह हमारी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** का सबसे हसीन मोड़ था।

हमने एक-दूसरे को बेतहाशा चूमा, जब तक कि हमारी साँसें फूलने नहीं लगीं। मेरी जीभ उसके मुँह में अंदर गई, हर कोने को खोजती हुई। प्रिया की एक सिसकी मेरे कानों में गूंजी, जो मुझे और उकसा रही थी। मैंने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू खिसकाया, जो अब उसके कंधों से उतरकर ज़मीन पर गिर चुका था। उसके ब्लाउज के बटन मेरी उंगलियों के इशारे पर खुलने लगे। हर बटन के खुलने के साथ, उसकी गोरी त्वचा का एक नया हिस्सा सामने आता गया।

उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरी छाती पर अपनी उंगलियाँ फेरीं। मेरी नसें तन गईं। उसका ब्रा उसके उभारों को मुश्किल से ढँक पा रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और उसे डेस्क पर लिटा दिया। उसकी साड़ी अब पूरी तरह से उसके जिस्म से अलग हो चुकी थी। उसके भरे-भरे स्तन मेरे सामने थे, मेरी नज़रों का इंतज़ार करते हुए। मैंने धीरे से उसकी ब्रा खोली, और उसके स्तन आज़ाद हो गए, हवा में लहराते हुए। मैंने अपना सिर झुकाया और उसके एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया, उसे चूसना शुरू किया। प्रिया की दर्द भरी आह मेरे कानों में गूँज उठी।

उसकी पेंटी काफ़ी पतली थी, और अब उसमें से उसकी योनि की आकृति साफ़ दिख रही थी। मेरी उंगलियाँ वहाँ से गुज़रीं, और प्रिया पूरी तरह से कांप उठी। वह अब पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी, उसकी आँखें मदहोशी से भरी थीं। मैंने उसकी पेंटी एक ही झटके में नीचे खिसका दी, और अब वह पूरी तरह से मेरे सामने थी। मैंने उसकी योनि पर अपनी उंगलियाँ रखीं, और उसने अपनी कमर ऊपर उठा ली।

अब कोई रोक-टोक नहीं थी। मैं भी अपने कपड़े उतार चुका था। मेरे उत्तेजित लिंग को देखकर उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। मैंने उसे धीरे से उठाया, और वह मेरी कमर पर अपनी टाँगें लपेटकर बैठ गई। मैंने धीरे-धीरे उसे खुद पर लिया। एक मीठा दर्द, एक गहरा आनंद, हम दोनों में एक साथ दौड़ गया। प्रिया की सिसकियाँ अब खुशी की चीखों में बदल चुकी थीं। हम दोनों एक साथ डेस्क पर धँसे जा रहे थे। ऑफिस की सन्नाट भरी रात में, हमारी साँसों की तेज़ आवाज़ें और जिस्मों के मिलने की थपकियाँ गूंज रही थीं।

कुछ देर बाद, जब हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ चुके थे, तो प्रिया ने मेरे कान में फुसफुसाया, “यह… यह तो बस शुरुआत है, है ना?” मैंने उसे और कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और उसके होंठों पर एक चुंबन अंकित कर दिया। “बिल्कुल, हमारी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** अभी-अभी शुरू हुई है।” रात भर के प्यार के बाद, हम एक-दूसरे में खोए हुए थे, एक ऐसा रहस्य जो सिर्फ़ हम दोनों जानते थे, और जो हर गुज़रते दिन के साथ और गहरा होने वाला था।

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