आँखों में छिपी आग ने उस दिन रवि के सीने में ऐसा दहकना शुरू किया, कि बुझाए न बुझी। दोपहर का समय था। घर में सन्नाटा पसरा था, बड़े-बुजुर्ग दोपहर की झपकी ले रहे थे और बच्चे खेलने गए हुए थे। गीता भाभी आंगन में बैठी, माथे पर पसीने की बूंदें लिए, घुटनों तक उठी साड़ी में प्याज काट रही थीं। उनकी सांवली, गठीली पिंडली पर रवि की निगाहें जा टिकीं। गीता भाभी ने जैसे ही सिर उठाया, उनकी मदमाती निगाहें रवि से टकराईं, और एक बिजली सी दौड़ गई दोनों के बदन में। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, यह तो ‘छुप छुप कर प्यार करने की कहानी’ की पहली चिंगारी थी जो सालों से सुलग रही थी।
रवि ने बहाना बनाया, “भाभी, वो पानी है क्या, प्यास लगी है।”
गीता भाभी बिना कुछ कहे उठीं, उनके सुडौल कमर पर बंधी साड़ी की गांठ कस रही थी, और रवि की आँखें वहीं अटक गईं। मटके से पानी निकालकर देते हुए उनके हाथ रवि के हाथ से छू गए। दोनों के शरीर में सिहरन दौड़ गई। रवि ने जानबूझकर गिलास थोड़ा देर तक पकड़े रखा, ताकि यह स्पर्श कुछ पल और ठहर जाए। गीता भाभी की साँसें तेज हो चुकी थीं, उनके गुलाबी होंठ काँप रहे थे। “भाभी, थोड़ा सर दर्द हो रहा है,” रवि ने धीमे स्वर में कहा, “क्या आप थोड़ा दबा देंगी?”
गीता भाभी हिचकिचाईं, फिर रवि की बेताबी देखकर, “चल, मेरे कमरे में आ जा,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। रवि का दिल खुशी से उछल पड़ा। भाभी के कमरे में कदम रखते ही, उनकी भीनी-भीनी खुशबू ने रवि को मदहोश कर दिया। भाभी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। कमरे में डिम लाइट थी, गर्मी के बावजूद एक अजीब सी गर्माहट महसूस हो रही थी। गीता भाभी ने अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से सरकने दिया, और रवि का हाथ पकड़कर खुद को बिस्तर पर गिरा दिया। रवि उनकी नज़दीकी से काँप उठा। गीता भाभी ने रवि का हाथ अपनी कमर पर रखा, “मेरा सर नहीं, तू मेरी कमर दबा दे।”
रवि के काँपते हाथ उनकी कमर पर फिरे। साड़ी का स्पर्श हटते ही, रवि की उँगलियाँ उनके नरम पेट पर जा टिकीं। गीता भाभी ने आह भरी, उनकी आँखें आधी मुँदी थीं। रवि की उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगीं, उनके ब्लाउज के किनारों को छूती हुई, उनके गर्म, भरे हुए वक्षों तक पहुँचीं। गीता भाभी ने गहरी साँस ली, “रवि… आज रुकना मत… मुझे तरसा मत।” रवि ने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया, उनके होंठों को अपने होंठों से कुचल दिया। यह चुम्बन वर्षों की दबी हुई चाहत का सैलाब था। गीता भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उनकी उँगलियाँ रवि की पीठ पर नाखून गड़ाने लगीं।
रवि ने एक झटके में उनका ब्लाउज खोला, उनके गोल, कड़क स्तन आजाद हो गए। रवि ने अपने होंठ उनके गुलाबी निप्पल पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा। गीता भाभी काँप उठीं, उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, “आह… रवि… बस ऐसे ही… और जोर से।” रवि ने उनके साड़ी और पेटीकोट को भी हटा दिया, और गीता भाभी अब केवल अपनी अधोवस्त्र में थीं। रवि ने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके पैरों के बीच बैठ गया। गीता भाभी ने अपनी आँखें खोलीं, उनके भीतर की वासना अब खुलकर सामने आ चुकी थी। रवि ने उनके अधोवस्त्र को भी खींचकर उतार दिया, और गीता भाभी की नम, गुलाबी योनि रवि के सामने थी।
रवि ने एक पल का भी इंतजार नहीं किया और अपने होंठों से उनकी योनि को चूमने लगा। गीता भाभी चिल्ला उठीं, उनकी कमर ऊपर उठने लगी। रवि अपनी जीभ से उनके अंतरंग हिस्से को सहलाता रहा, चूसता रहा, जब तक गीता भाभी का बदन पूरी तरह से आग की लपटों में न घिर गया। “बस… अब और नहीं… रवि… अब तू अंदर आ जा…” उन्होंने काँपते हुए कहा। रवि ने अपने कपड़े उतारे, अपना कठोर लिंग उनके पैरों के बीच रखा, और एक झटके में खुद को उनके भीतर उतार दिया। गीता भाभी की चीख निकली, पर तुरंत एक गहरी आह में बदल गई।
दोनों एक दूसरे में समा चुके थे। कमरे की हवा कामुक आवाज़ों से भर उठी थी – साँसों का गहराना, अंगों का टकराना, त्वचा पर पसीने की चमक। रवि तेजी से हिलने लगा, गीता भाभी भी अपनी कमर उठाकर उसका साथ दे रही थीं। हर धक्के के साथ, उनकी वर्षों की प्यास बुझ रही थी। कुछ ही पल में, दोनों एक चरम सुख की अनुभूति में एक दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। पसीने से तरबतर, थके हुए, पर संतुष्ट, वे काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। यह उनकी ‘छुप छुप कर प्यार करने की कहानी’ थी, एक ऐसी कहानी जो हर दिन उन्हें एक नई उम्मीद और एक नया रोमांच देती थी, इस उम्मीद के साथ कि अगली बार कब वे फिर से इसी तरह एक-दूसरे में खो जाएंगे।
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