छुप छुप कर प्यार करने की कहानी: मेरा चोरी का बदन, पड़ोसी की प्यास

उसकी आँखें मिलीं और मेरे जिस्म में आग सी लग गई। गर्मियों की गर्म रात थी और हवा में मोगरे की धीमी खुशबू तैर रही थी। मैं अपने घर की बालकनी में बैठा था जब सामने वाली बालकनी से प्रिया ने मुझे एक चोर नज़रों से देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी, जानी-पहचानी प्यास थी जो मेरी रग-रग में दौड़ रही थी। उसका चेहरा हल्का सा लाल था, बालों की एक लट उसके भीगे होंठों को छू रही थी। हम दोनों जानते थे कि यह सिर्फ एक इशारा नहीं था, यह एक निमंत्रण था, हमारे चोरी के इश्क़ का।

मैं धीरे से उठा, दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। घर में सब सो चुके थे। दबे पाँव मैं अपने कमरे में गया और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। मेरा फ़ोन वाइब्रेट हुआ। “आ रही हूँ,” प्रिया का मैसेज था, उसके साथ एक लाल दिल का इमोजी। कुछ ही देर में मेरे कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला। प्रिया अंदर दाखिल हुई, साड़ी से ढका उसका बदन अँधेरे में भी कयामत ढा रहा था। उसकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर शरारती मुस्कान थी।

“इतनी देर क्यों लगाई?” मैंने फुसफुसाते हुए कहा, उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसके शरीर की गर्म खुशबू ने मुझे पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसकी कमर पर मेरी उंगलियों का दबाव पड़ते ही वह सिहर उठी। “डर लग रहा था,” उसने काँपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसकी आँखों की चमक कुछ और ही बता रही थी। “प्रिया, तुम जानती हो न, ये हमारी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी है,” मैंने उसके कान में धीमे से कहा, “डरने की कोई बात नहीं।”

उसके मुलायम होंठों ने मेरे होंठों को छुआ। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, यह एक तूफ़ान था जो हमारी आत्माओं को झकझोर रहा था। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में दाखिल हुई और मैंने उसे कसकर अपनी ओर खींच लिया, जैसे वह मेरे लिए हवा हो। मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाने लगे। उसका पल्लू ज़मीन पर गिरा और उसके चिकने कंधों से होते हुए मेरी उंगलियाँ उसके ब्लाउज तक पहुँचीं। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने हाथों से मेरे शर्ट के बटन खोले और मेरी नंगी छाती पर अपनी उंगलियाँ फिराने लगी।

एक पल में उसके बदन पर से साड़ी और ब्लाउज हट चुका था, और वह सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में मेरे सामने खड़ी थी। चाँदनी की हल्की सी रोशनी में उसका सुडौल बदन चमक रहा था। मैंने उसे गोदी में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसके बदन की हर एक इंच को चूमने की मुझे बेताबी थी। मैंने उसकी ब्रा की हुक खोली और उसके भरे-भरे स्तन आज़ाद हो गए, जो मेरी आँखों के सामने उछल रहे थे। मैं उन पर टूट पड़ा, एक-एक करके उन्हें चूसने और मसलने लगा। प्रिया के मुँह से आहें निकलने लगीं।

उसने अपनी टाँगें मेरे इर्द-गिर्द कस लीं और मुझे अपने ऊपर खींच लिया। उसके पेटीकोट को भी मैंने हटा दिया और अब वह पूरी तरह से मेरे सामने नग्न थी। उसकी साँसों की तेज़ी से पूरा कमरा गूंज रहा था। मैंने धीरे से उसके पैरों को फैलाया और उसके गुप्तांग के पास अपने होंठ ले गया। उसकी गर्म और नम त्वचा को छूते ही प्रिया का बदन काँप उठा। उसने अपने मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख निकाली, जिसे उसने तकिए में दबा दिया। मैंने बिना देर किए अपनी जीभ से उसके अमृतपान का स्वाद चखा, और वह खुशी से झूम उठी।

उसकी आँखें बंद थीं, उसका बदन ऐंठन खा रहा था। मैंने अपने कपड़ों को भी उतारा और फिर से उसके ऊपर आ गया। हमारी त्वचा का मिलन हुआ और मैं उसके अंदर दाखिल हो गया। पहली बार में वह थोड़ी सिकुड़ी, फिर उसने अपनी कमर उठाई और मेरा साथ देने लगी। बाहर की दुनिया से बेखबर, हम दोनों अपनी इस छुप छुप कर प्यार करने की कहानी को पूरी शिद्दत से जी रहे थे। हर धक्के के साथ एक मीठी आह निकल रही थी, जो इस चोरी के लम्हे को और भी गहरा बना रही थी। प्रिया ने अपनी बाहों से मुझे कसकर जकड़ लिया, उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान छोड़ रहे थे, लेकिन मुझे कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था। हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह खो चुके थे, हर एक पल को महसूस कर रहे थे।

आखिरकार, एक गर्म लहर हमारे बदन में दौड़ी और हम दोनों एक साथ चरम सुख को पहुँचे। प्रिया ने मेरे कंधे पर अपना सर रखकर गहरी साँस ली, उसका बदन पसीने से भीगा हुआ था। मैं भी उसके ऊपर निढाल हो गया। कुछ देर हम ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे, इस चोरी के सुकून का मज़ा लेते रहे। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, यह हमारी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी का एक और गहरा अध्याय था, जिसकी यादें हमेशा के लिए हमारी रूह में बस चुकी थीं। प्रिया ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी चमक और एक नई तरह की संतुष्टि थी। हम जानते थे कि यह रात खत्म हो चुकी थी, लेकिन हमारी कहानी का अगला अध्याय बहुत जल्द लिखा जाने वाला था।

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