उस बारिश वाली रात, जब किताबों से ज़्यादा, जिस्मों की बातें होने लगीं, माया मैडम जानती थी कि आज अर्जुन सिर्फ़ छात्र नहीं रहेगा। देर शाम हो चुकी थी। बाहर मूसलाधार बारिश चल रही थी और उनके छोटे से बंगले में बिजली जा चुकी थी। मोमबत्ती की पीली रौशनी में अर्जुन का चेहरा पहले से कहीं ज़्यादा आकर्षक लग रहा था। वह उनके सामने बैठा था, गणित की एक समस्या सुलझाने की कोशिश कर रहा था, पर उसकी आँखें बार-बार माया के खुले, भीगे बालों और साड़ी के पल्लू से झाँकती उसकी भरी हुई छाती पर टिक रही थीं।
“मैम, यह सवाल समझ नहीं आ रहा,” अर्जुन ने धीमी, भारी आवाज़ में कहा। माया उसके पास झुकी, उसकी कॉपोपी में देखने के लिए। उसके बालों की महक, उसके शरीर की गरमाहट अर्जुन तक पहुँची। उसका हाथ अनजाने में अर्जुन की जाँघ से छू गया। एक बिजली का करेंट दोनों के शरीर में दौड़ गया। अर्जुन ने सहमकर ऊपर देखा। माया की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने होंठ काटते हुए नज़रें हटाईं, पर देर हो चुकी थी। उस छूअन ने बरसों से दबी प्यास को जगा दिया था। उनके बीच का **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** की आग अब भड़क उठी थी।
“अर्जुन…” माया की आवाज़ काँप रही थी। उसने महसूस किया कि अर्जुन का हाथ उसकी जाँघ पर धीरे से ऊपर सरक रहा था। वह रुकना चाहती थी, पर उसका शरीर आज्ञा मानने को तैयार नहीं था। उसकी नस-नस में एक मीठा दर्द उठ रहा था। अर्जुन की उँगलियाँ उसकी साड़ी के नीचे से उसकी गर्म जाँघ को सहलाने लगीं। माया की आँखें बंद हो गईं, एक सिसकी उसके गले से निकल गई। अर्जुन ने अपनी कुर्सी आगे खींची और माया को अपनी बाहों में भर लिया।
“मैम, मैं आपको बहुत चाहता हूँ,” अर्जुन की आवाज़ में जुनून भरा था। माया ने उसकी आँखों में देखा, जहाँ वही प्यास थी जो उसकी अपनी आँखों में चमक रही थी। उसने अर्जुन के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो एक लम्बा, गहरा चुम्बन था, जिसमें बरसों की दबी हुई चाहत और वर्जित प्रेम का स्वाद था। उनके शरीर एक दूसरे से ऐसे चिपक गए, जैसे दो प्यासी आत्माएँ सदियों बाद मिली हों। माया की साड़ी का पल्लू कब गिरा, उसे पता ही नहीं चला। अर्जुन के मज़बूत हाथ उसके बदन पर ऐसे फिर रहे थे, जैसे वो कोई अनमोल खज़ाना ढूँढ रहे हों।
मोमबत्ती की मंद रौशनी में उनके कपड़े धीरे-धीरे उनके जिस्मों से जुदा होने लगे। माया का साँवला बदन, अर्जुन की आँखों में और भी आग लगा रहा था। जब वे पूरी तरह नग्न हुए, तो अर्जुन ने माया को गोद में उठा लिया और उन्हें बेडरूम की तरफ ले गया। नरम बिस्तर पर गिरते ही, उनके होंठ फिर एक हो गए। अर्जुन का हर स्पर्श, हर चुम्बन माया के भीतर की आग को और भड़का रहा था। वह खुद को पूरी तरह अर्जुन के हवाले कर चुकी थी। उनके जिस्मों का मिलन इतना तीव्र और गहरा था कि दोनों की आहें और सिसकियाँ बारिश की आवाज़ में घुलमिल गईं। यह एक ऐसा पल था जब दुनिया की सारी मर्यादाएँ, सारे नियम टूट चुके थे। **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** अब अपने चरम पर था, एक ऐसी सच्चाई जो उनके हर रोम-रोम में समा चुकी थी।
पसीने से लथपथ, हाँफते हुए वे एक दूसरे की बाहों में थे। बाहर बारिश धीमी हो चुकी थी, पर उनके भीतर जुनून की आग अभी भी धधक रही थी। अर्जुन ने माया के माथे को चूमा। “क्या यह ग़लत है, मैम?” उसने पूछा। माया ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी आँखों में देखा। एक मुस्कान उसके होंठों पर आई। “आज रात के लिए कुछ भी ग़लत नहीं है, मेरे अर्जुन,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, और फिर से उसके होंठों पर झुक गई। उन्हें पता था कि उनके बीच यह रिश्ता अब कभी सिर्फ़ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहेगा। यह उनकी ज़िंदगी का सबसे रोमांचक और बेकाबू **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** बन चुका था।
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