उसकी आँखें सिर्फ किताबों पर नहीं, प्रिया मैम की दमकती त्वचा और उठती साँसों पर टिकी थीं। दोपहर की शांत ट्यूशन क्लास में, जब रोहन और उसकी शिक्षिका प्रिया के अलावा और कोई नहीं होता था, कमरा एक अजीब सी गर्मी से भर जाता था। प्रिया मैम, अपने हल्के नीले सलवार-कमीज में, उसके सामने बैठी थीं, एक सवाल समझाते हुए झुकी हुई। उनके गले का हल्का खुला हिस्सा, पसीने की छोटी-छोटी बूंदों से चमकती गर्दन, और माथे पर आती जुल्फें, सब रोहन के अंदर किसी आग को हवा दे रही थीं।
“समझ आया, रोहन?” प्रिया ने नर्म आवाज़ में पूछा, उसकी आँखों में देख कर।
रोहन ने सिर्फ “हूँ” कहा, उसकी आवाज़ गले में अटक गई थी। वह जानता था यह गलत है, पर प्रिया की हर अदा उसे मदहोश कर रही थी। प्रिया ने एक हाथ उसकी किताब पर रखा, और उनका हाथ गलती से रोहन की उँगलियों से छू गया। एक बिजली सी कौंध गई दोनों के शरीर में। प्रिया ने तुरंत हाथ हटाया, पर उनके चेहरे पर एक हल्की सी लाली फैल गई थी, जिसे रोहन ने पकड़ लिया। यह सिर्फ एक छात्र और शिक्षिका का संबंध नहीं रहा था, अब यह **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** की दहलीज पर खड़ा था।
अगले ही पल, रोहन ने हिम्मत जुटाई। उसने प्रिया का हाथ थाम लिया, जो पहले से ही मेज पर रखा था। प्रिया ने चौंका कर आँखें उठाईं, उसके चेहरे पर डर और वासना का मिला-जुला भाव था। रोहन ने धीरे से उसका हाथ सहलाया, अपनी उँगलियों को उसकी मुलायम त्वचा पर फेरते हुए। “मैम,” उसकी आवाज़ काँप रही थी, “मुझे और कुछ समझना है… कुछ ऐसा, जो किताबों में नहीं है।”
प्रिया का दिल तेज़ धड़क रहा था। उसकी आँखों में भी वही प्यास थी जो रोहन की आँखों में थी। वह जानती थी कि अब वापसी का कोई रास्ता नहीं। उसने धीरे से अपना हाथ रोहन के हाथ में कस दिया। रोहन ने धीरे से उसे अपनी ओर खींचा, और प्रिया बिना किसी विरोध के उसके करीब आ गईं। उनके होंठ एक दूसरे से जुड़ गए, एक धीमी, गहरी, और भूखी चुंबन में। यह चुंबन सालों की दबी हुई इच्छाओं को बाहर निकाल रहा था।
रोहन ने प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया, उसकी एक बाँह प्रिया की कमर पर कस गई और दूसरी उसके बालों में उलझ गई। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, वह अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। उसके हाथ रोहन की शर्ट के कॉलर को पकड़ कर खींच रहे थे। रोहन ने उसे ज़मीन पर लिटाया, किताबें और कॉपी सब बिखरी पड़ी थीं, पर अब उन्हें किसी चीज़ की परवाह नहीं थी। कमरे में सिर्फ उनकी धड़कनों और साँसों की आवाज़ें गूँज रही थीं।
रोहन ने प्रिया के सलवार-कमीज के बटन खोले, उसकी उँगलियाँ उसकी गर्म त्वचा को छूने लगीं। प्रिया सिहर उठी, उसकी आँखें वासना से भरी थीं। रोहन ने उसके दुपट्टे को एक ओर फेंका, और उसके अधखुले ब्लाउज से झाँकते उसके वक्षों को अपनी हथेली से ढक लिया। प्रिया की आह निकल गई। उसने रोहन के बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया, जब रोहन ने उसके वक्षों पर अपना मुँह रखा। एक अजीब सी गुदगुदी और मीठा दर्द उसे अंदर तक झकझोर गया।
कपड़े एक-एक करके हटते गए, और दोनों के शरीर एक दूसरे के सामने नग्न हो उठे। रोहन की आँखों में आग थी, उसने प्रिया के हर अंग को अपनी आँखों से निहारा, जैसे वह उसे पहली बार देख रहा हो। प्रिया शरमाई नहीं, बल्कि उसकी आँखों में भी वही चुनौती थी, वही भूख थी। यह सिर्फ एक क्षण का जुनून नहीं था, यह एक गहरा, निषिद्ध संबंध था जो उनके बीच अब पूरी तरह से स्थापित हो चुका था। **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** अब अपने चरम पर था।
उनकी साँसें एक हो गईं, उनकी देह एक दूसरे में समाने को बेताब थी। रोहन ने प्रिया की जांघों को धीरे से फैलाया, और उनके बीच की दूरी मिटाने के लिए तैयार हो गया। प्रिया ने एक गहरी आह भरी, अपनी आँखें बंद कर लीं और रोहन को खुद में समाने दिया। पहली बार में एक हल्का सा दर्द हुआ, फिर वह दर्द मीठी सनसनी में बदल गया। कमरे में सिर्फ़ देह से देह के टकराने की आवाज़ें और उनकी कामुक आहें थीं।
जब उनका शरीर शांत हुआ, तो दोनों पसीने में तर थे। प्रिया रोहन की बाहों में लिपटी थी, उसका सिर रोहन के सीने पर था, उसकी धड़कनें सुनती हुई। रोहन ने उसके बालों को प्यार से सहलाया। बाहर सूरज ढल रहा था, पर उनके कमरे में एक नई सुबह हो चुकी थी। उन्हें पता था यह गलत है, यह समाज की नज़रों में पाप है, पर उनके शरीर और आत्मा ने जो सुकून पाया था, वह किसी भी मर्यादा से बड़ा था। यह affair उनकी जिंदगी का सबसे मीठा और सबसे खतरनाक राज बन गया था, जिसे वे रोज़ जीते थे, हर ट्यूशन क्लास में, बंद दरवाजों के पीछे, जहाँ पढ़ाई नहीं, सिर्फ प्यार के पाठ होते थे। उन्हें पता था, यह **टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर** अब उनकी आदत बन चुका था।
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