माया मैडम की खुली ज़ुल्फ़ें, और उनके पसीने से भीगी त्वचा ने रोहन का दम घोंट दिया था। रात के दस बज चुके थे। गर्मी और उमस से उनके छोटे से फ्लैट का कमरा भी तपने लगा था। गणित के समीकरणों से ज्यादा रोहन की आँखों में माया मैडम के वक्षों का उतार-चढ़ाव कैद हो रहा था, जो उनकी पतली कॉटन की साड़ी के नीचे से साफ़ दिख रहा था। माया ने पढ़ाते हुए अपने पल्लू को कंधे से हटा दिया था, जैसे उसे भी इस गर्मी से कोई परवाह न थी। या शायद वह जानती थी कि रोहन की आँखों में क्या चल रहा है।
“रोहन, समझ में आया?” माया की आवाज़ ने उसके कानों में शहद घोला, लेकिन उसकी नज़रें अभी भी मैडम की कमर पर थीं, जो साड़ी के खुले हिस्से से दिख रही थी। “जी… मैडम… थोड़ा और…” रोहन की आवाज़ में एक अजीब-सी थर्राहट थी। माया मुस्कुराई, एक ऐसी मुस्कान जिसमें कुछ शरारत और बहुत सारी चुनौती छुपी थी। वह अपनी जगह से उठीं और रोहन के क़रीब आ गईं, इतनी क़रीब कि उनकी साँसों की गर्माहट रोहन के गालों पर महसूस होने लगी। “क्या थोड़ा और?” उन्होंने फुसफुसाते हुए पूछा, और रोहन ने पाया कि उनका दाहिना हाथ अनजाने में माया की जांघों को छू गया था।
एक बिजली का झटका दोनों में दौड़ा। यह सिर्फ़ ट्यूशन नहीं था, यह तो माया मैडम और रोहन के बीच पनप रहा एक ‘टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर’ था। माया ने अपनी पलकें झुकाईं, लेकिन उनके होंठों की हल्की-सी थरथराहट ने रोहन को हिम्मत दे दी। उसने अपना हाथ माया की जांघों पर धीरे से ऊपर सरकाया, और इस बार माया ने उसे रोका नहीं, बल्कि एक गहरी साँस ली। उसका शरीर तपने लगा था। रोहन ने अपनी नज़रें ऊपर उठाईं, और इस बार माया की आँखें मिलीं। उन आँखों में एक भूखी प्यास थी, वैसी ही प्यास जैसी रोहन के दिल में उमड़ रही थी।
“मैडम…” रोहन का स्वर काँपा। माया ने एक हाथ उठाया और रोहन के गाल पर रखा। उसका स्पर्श बिजली जैसा था। “श…श… आज कोई गणित नहीं, रोहन।” माया ने कहते ही रोहन का सिर अपनी ओर खींचा और उसके अधरों को अपने अधरों में भर लिया। वह चुंबन गहरा, नम और बेहद वासनामय था। रोहन ने अपने होंठों को आजाद होते ही माया की कमर पर अपने हाथ कस दिए और उसे अपनी ओर खींचा। माया की नरम देह रोहन से सट गई। साड़ी का पल्लू पहले ही सरक चुका था, और अब ब्लाउज़ के अंदर से माया के वक्षों की गर्मी रोहन को महसूस हो रही थी।
माया ने एक हाथ से रोहन के बाल सहलाए और दूसरे से उसके कमीज़ के बटन खोलने लगी। रोहन ने भी अपनी उँगलियाँ माया की साड़ी के हुक पर दौड़ाईं। साड़ी गिरी, फिर ब्लाउज़। माया का सुडौल शरीर अब रोहन के सामने था, बस एक पेटीकोट में। उसकी साँसें तेज हो चुकी थीं। उसने रोहन को ज़मीन पर धकेल दिया और खुद उसके ऊपर झुक गई। उसके होंठ रोहन की गर्दन से होते हुए उसके सीने पर आ टिके। रोहन के शरीर में सनसनी दौड़ रही थी। उसने माया के पेटीकोट की डोरी खोली, और वह भी ज़मीन पर सरक गया।
अब दोनों नग्न थे, बस एक-दूसरे की वासना की आग में जल रहे थे। माया ने रोहन के लिंग को अपने हाथों में लिया और उसे सहलाने लगी। रोहन की आँखों में अब सिर्फ़ माया थी, उसकी भूख थी। माया ने धीरे से अपनी टाँगें फैलाईं और रोहन को इशारा किया। रोहन ने बिना देर किए माया की दोनों टाँगों के बीच अपनी जगह बनाई और एक झटके में उसके अंदर उतर गया। माया की चीख निकली, जो तुरंत रोहन के होंठों में दब गई।
उनकी हर साँस, हर स्पर्श यह चिल्ला रहा था कि उनके बीच का ‘टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर’ अब अपनी चरम सीमा पर था। कमरे की हवा में पसीने और वासना की गंध घुल गई थी। हर धक्के के साथ माया की आहें और रोहन की सिसकियाँ गूँज रही थीं। दोनों एक-दूसरे में इस कदर समा गए थे कि दुनिया-जहान की सुध-बुध भूल चुके थे। गर्मी और उमस अब उन्हें और उत्तेजित कर रही थी। जब दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से खोकर चरम सुख को पहुँचे, तो कमरे में एक गहन शांति छा गई, जो सिर्फ़ उनकी तेज धड़कनों से भंग हो रही थी। माया रोहन के ऊपर ही ढीली पड़ गई थी, उसकी साँसें अभी भी तेज थीं, और उसके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। रोहन ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया। उन्हें पता था कि यह तो बस शुरुआत थी।
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