उसकी आँखों में छिपी शरारत मेरी देह में एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रही थी, और मैं जानती थी कि आज का ट्यूशन बस किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। मैं, मधुरी, एक सम्मानित शिक्षिका, आज अपने ही छात्र राहुल की नज़रों की आग में पिघलने को तैयार थी। शाम ढल चुकी थी, घर में कोई और नहीं था। राहुल ने किताबों से नज़रें हटाकर मुझे देखा, उसकी आवाज़ शहद सी मीठी लगी, “मैडम, मुझे एक सवाल पूछना था।”
मैंने उसे देखा, उसकी जवानी मेरे भीतर दबी वासना को जगा रही थी। हमारी इस चोरी-छुपे पनपते टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर की शुरुआत शायद कुछ हफ़्तों पहले ही हो चुकी थी, जब उसकी बेबाक निगाहें मेरे साड़ी के आँचल के नीचे मेरे उभरते वक्षों पर ठहरने लगी थीं। आज उसकी आँखों में केवल सवाल नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत थी। मैं धीरे से उसकी ओर सरकी, “बोलो राहुल, क्या पूछना है?”
वह मेरे बिलकुल करीब आ गया, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। “मैडम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, “यह दिल आजकल किताबों से ज़्यादा आपको पढ़ना चाहता है।” उसके हाथ ने धीरे से मेरी हथेली को छुआ। एक बिजली सी मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैंने अपना हाथ नहीं खींचा, बल्कि उसकी उँगलियों को अपनी उँगलियों में कस लिया। मेरे होंठ थरथरा रहे थे।
“राहुल…” मेरी आवाज़ मुश्किल से निकली।
“चुप रहिए मैडम,” उसने मेरे होठों पर अपनी उंगली रखी, “आज कुछ भी कहने की ज़रूरत नहीं है।” और फिर, बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने अपने अधरों को मेरे प्यासे होंठों से जोड़ दिया। वह एक मीठी, गहरी चूम थी, जिसमें वर्षों की दबी वासना बाहर फूट पड़ी। मैंने भी अपनी आँखें बंद कर लीं और उसे अपनी ही वासना में भीगने दिया। मेरे भीतर का गुरु आज शिष्य की कामाग्नि में जलने को तैयार था।
उसका एक हाथ मेरी कमर पर कस गया, और दूसरा मेरी पीठ सहलाता हुआ धीरे-धीरे मेरे साड़ी के पल्लू से नीचे खिसक गया, मेरे नितंबों को टटोलने लगा। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मैं उसे और कसकर अपनी ओर खींचने लगी। साड़ी का आँचल कब मेरे कंधे से खिसका, मुझे पता ही नहीं चला। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह के अंदर गहराई तक उतर चुकी थी, मेरे हर कोने को छू रही थी, मेरी प्यास बुझा रही थी।
उसने मुझे धीरे से सोफे पर धकेला, और मेरे ऊपर झुक गया। उसके भारी बदन का वज़न मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरे हाथों ने उसकी टी-शर्ट खींच कर उतार दी। उसकी कसी हुई छाती मेरे सामने थी, जिसे देखकर मेरे भीतर की आग और तेज़ हो गई। मेरे हाथ उसकी छाती पर फिरे और फिर उसके कस कर खड़े निप्पल को सहलाने लगे। राहुल की साँसों की गति बढ़ गई।
“मैडम…” उसने एक सिसकते हुए कहा, और फिर मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा। एक-एक करके हुक खुले, और मेरे भारी, कामुक स्तन उसकी आँखों के सामने आ गए। उसने अपनी आँखों में एक जंगली सी चमक के साथ उन्हें देखा, और फिर अपने होंठों से मेरे एक स्तन को कसकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा माँ का दूध पीता है। मेरी जीभ से एक आह निकल पड़ी। मेरे दूसरे स्तन को उसका हाथ सहला रहा था, निप्पलों को खींच रहा था।
आज हम दोनों अपने टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर की सारी सीमाओं को तोड़ने वाले थे। उसने मेरी साड़ी हटाई, फिर पेटीकोट और अंत में मेरी पैंटी। मैं पूरी तरह निर्वस्त्र उसके सामने थी। उसकी आँखें मेरे पूरे शरीर पर घूम रही थीं, और उसकी एक कामुक मुस्कान मेरे भीतर के हर डर को मिटा रही थी। उसने खुद को भी नंगा किया, और उसका तना हुआ लिंग मेरे सामने इठला रहा था।
“मैडम, क्या आप तैयार हैं?” उसने फुसफुसाया।
मैंने जवाब में केवल अपनी टांगें खोलीं और उसे अपने पास आने का इशारा किया। उसने धीरे-धीरे अपने लिंग को मेरी योनि के द्वार पर रखा, और एक धक्का मारा। मैं दर्द और सुख के मिले-जुले एहसास से कराह उठी। उसका लिंग मेरे भीतर गहराई तक उतर चुका था। उसने अपनी कमर की गति तेज़ की, और हम दोनों एक लय में झूलने लगे। हमारी देह की हर रग आज केवल एक दूसरे को चाहती थी।
कमरे में सिर्फ हमारे मिलन की आवाज़ें गूँज रही थीं – थप-थप, आहें, सिसकियाँ और एक गहरी वासना से भरी सांसें। मैं उसे अपनी जाँघों में कसकर पकड़ चुकी थी, और उसे अंदर-बाहर आने-जाने दे रही थी। हर बार जब वह मुझसे टकराता, मेरे भीतर एक अजीब सी तड़प उठती। कुछ ही पलों में मेरा शरीर अकड़ गया और मैं चरम सुख की असीम गहराई में डूब गई। राहुल ने भी अपनी सारी ऊर्जा मेरे भीतर उड़ेल दी, और हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर शिथिल हो गए।
उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और मैंने अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया। यह रात सिर्फ एक शुरुआत थी, हमारे इस टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर की एक नई, बेकाबू और अदम्य दास्तान की। हम दोनों जानते थे कि यह वर्जित रिश्ता हमें कहाँ ले जाएगा, पर आज हमें किसी बात की परवाह नहीं थी, सिवाय एक-दूसरे की देह और आत्मा में खो जाने के।
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