उसकी आँखों में आज एक अजीब सी चमक थी, जो मेरे अंदर आग लगा रही थी। प्रिया, मेरे जिगरी दोस्त विक्रम की पत्नी, हमेशा से खूबसूरत थी, पर आज वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। उसका लाल सूट उसके बदन पर ऐसे लिपटा था कि हर मोड़, हर उभार मुझे साफ़ दिख रहा था। पिछले कुछ महीनों से, जब से विक्रम अपने काम में ज़्यादा व्यस्त रहने लगा था, मेरा उसके घर आना-जाना बढ़ गया था। और इस दौरान, हमारी आँखों के बीच एक ऐसी भाषा विकसित हो चुकी थी, जिसे शब्दों की ज़रूरत नहीं थी।
आज विक्रम एक ज़रूरी क्लाइंट मीटिंग के लिए शहर से बाहर गया था। प्रिया अकेली थी। उसने मुझे फ़ोन करके खाने पर बुलाया था, “आज खाने पर आओगे, राहुल? विक्रम नहीं है तो मैं अकेली क्या खाऊँगी।” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गुदगुदी थी। मैं जानता था कि यह सिर्फ़ खाने का बुलावा नहीं था। मेरे अंदर एक रोमांच की लहर दौड़ गई। मन ही मन राहुल जानता था कि वो जिस आग से खेल रहा है, वो ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ की आग थी, जिसे बुझाना मुश्किल था।
जब मैं उसके घर पहुँचा, तो दरवाज़ा खुला था। अंदर से धीमी संगीत की धुन आ रही थी और पूरे घर में इत्र की मोहक सुगंध फैली हुई थी। प्रिया बरामदे में खड़ी थी, अपने लंबे खुले बालों को सहलाते हुए। उसने मुझे देखा और एक हल्की सी शरारती मुस्कान दी। “आओ राहुल, इंतज़ार कर रही थी।” उसकी आवाज़ में आज एक अलग ही नशा था। हम डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। खाना स्वादिष्ट था, पर मेरा ध्यान उसकी खुली कमर पर था, जो उसके पल्लू से झाँक रही थी। हमारी आँखें बार-बार मिलतीं और एक बिजली का झटका दोनों में दौड़ जाता।
खाना खत्म होने के बाद, हम लिविंग रूम में सोफे पर बैठे थे। उसने मेरे लिए कॉफ़ी बनाई। जब वह कप देने झुकी, तो उसके वक्ष मेरे करीब आ गए। मैंने उसकी साँसों की गर्माहट महसूस की और एक पल के लिए मेरा हाथ अनायास ही उसके हाथ पर चला गया। उसने अपना हाथ नहीं हटाया, बल्कि उसकी उंगलियों ने हल्की सी प्रतिक्रिया दी। मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने धीरे से उसके हाथ को सहलाना शुरू किया। उसकी नज़रें नीचे थीं, पर उसके चेहरे पर एक हल्की सी लाली फैल गई थी। “प्रिया…” मेरे मुँह से फुसफुसाहट निकली। उसने आँखें उठाईं, उसकी गहरी काली आँखों में वासना का स्पष्ट संकेत था।
मैंने अपना हाथ उसके गाल पर रखा और उसे अपनी तरफ़ खींचा। वह थोड़ा हिचकिचाई, फिर खुद को मेरे हवाले कर दिया। हमारे होंठ मिले, और यह कोई साधारण चुंबन नहीं था। यह एक प्यासे का पानी पीने जैसा था, एक जुनून की आग को शांत करने जैसा। उसके होंठ नर्म और मीठे थे, और मैंने उन्हें ऐसे चूसा जैसे मेरी ज़िंदगी उन्हीं पर टिकी हो। प्रिया ने एक आह भरी और मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया। उसका शरीर काँप रहा था। ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ का ये अहसास मुझे एक ऐसे नशे में ले जा रहा था जहाँ से वापसी नामुमकिन थी।
मेरे हाथ उसकी कमर पर गए और मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया। उसका नर्म बदन मेरे कठोर बदन से सट गया। मैंने उसके रेशमी बालों में अपनी उंगलियाँ फेरीं और उसकी गर्दन पर हल्के चुंबन देने लगा। उसकी सिसकियाँ अब तेज़ हो गई थीं। मैंने उसे गोद में उठा लिया और वह मेरे गले से लिपट गई। हम बेडरूम की तरफ़ बढ़े, जहाँ हल्की रोशनी और हवा में भीनी-भीनी खुशबू थी। मैंने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटाया।
उसकी साड़ी का पल्लू पहले ही गिर चुका था। अब मैंने उसके ब्लाउज़ के हुक खोले। उसके गोरे, भरे हुए स्तन मेरे सामने उभरे, गुलाबी निप्पल मुझे अपनी ओर बुला रहे थे। मैंने झुककर उन्हें अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। प्रिया मदहोश होकर आहें भर रही थी, “आह… राहुल… और… और तेज़…” मैंने उसके पेट से होते हुए उसकी कमर तक अपने होंठ चलाए, फिर उसके नाभि में अपनी जीभ फेरने लगा। वह तड़प उठी। मैंने उसकी पेटीकोट और पैंटी भी हटा दी। उसकी कामोत्तेजित योनि, जो अब थोड़ी गीली हो चुकी थी, मेरे सामने खुली थी।
मैं उसके पैरों के बीच आ गया और अपनी जीभ से उसकी योनि को सहलाने लगा। प्रिया चिल्ला उठी, उसके पूरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। उसकी मदहोश आवाज़ मेरे कानों में शहद घोल रही थी। मैं उसे हर वो सुख देना चाहता था जो उसने कभी सोचा भी नहीं था। मैंने धीरे-धीरे अपनी जीभ से उसके हर कोने को टटोला, और उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठाना शुरू कर दिया। उसकी हर साँस में एक मदहोशी थी, और राहुल को लगा कि ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ का यह सुख किसी भी चीज़ से बढ़कर था।
जब वह चरम सुख के करीब थी, मैंने अपना पैंट उतारा और अपने उत्तेजित लिंग को उसके प्रवेश द्वार पर रखा। एक पल के लिए हमारी नज़रें मिलीं, और उस पल में एक सहमति, एक वासना, एक गहरा जुड़ाव था। मैंने एक धक्का दिया और मेरा लिंग धीरे-धीरे उसकी गर्म, गीली योनि में समा गया। प्रिया ने एक गहरी साँस ली, “आह… राहुल… हाँ… अंदर तक…” मैंने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई। बिस्तर की चरमराती आवाज़ और हमारी कामोत्तेजित आहें कमरे में गूँज रही थीं। मैं उसे तेज़ धक्कों से गहरे तक संतुष्ट कर रहा था, और वह मेरे हर वार पर अपनी कमर उठा रही थी। उसका बदन आग बन चुका था और मैं उस आग को अपनी हदों तक ले जा रहा था।
कुछ देर बाद, जब हम दोनों एक साथ चरम सुख की ऊँचाइयों पर पहुँच गए, तो हम हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक गए। उसकी गर्म साँसें मेरे सीने पर पड़ रही थीं। उसका सिर मेरे कंधे पर था और उसके हाथों ने मुझे कसकर पकड़ रखा था, जैसे वह कभी मुझे जाने नहीं देना चाहती। उस रात के बाद, ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ की सच्चाई उनके बीच एक मीठे रहस्य की तरह बस गई थी, जो अब हमेशा के लिए उनके दिलों में ज़िंदा रहने वाला था। यह तो बस एक शुरुआत थी, उनके चोरी-छिपे प्यार की एक नई दास्तान की।
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