उस दोपहर, जब प्रिया ने झुककर चाय की ट्रे उठाई, उसकी साड़ी का पल्लू सरक कर उसके भरे-भरे वक्षों की गहराई में खो गया, और मेरी आँखें वहीं अटक गईं। एक अजीब सी आग मेरे भीतर धधक उठी, जिसे मैं सालों से दबाए हुए था। अमित मेरा लंगोटिया यार था, पर उसकी खूबसूरत बीवी प्रिया, हमेशा से मेरी कमज़ोरी रही थी। आज जब अमित को अचानक एक ज़रूरी कॉन्फ्रेंस कॉल आ गया और वह अपने स्टडी रूम में बंद हो गया, तो हम दोनों अकेले रह गए, और मुझे लगा जैसे कुदरत ने खुद यह मौका दिया है।
प्रिया ने मुस्कुराते हुए मुझे चाय दी। उसकी नज़रें मेरी आँखों से टकराईं, और एक पल के लिए मुझे लगा जैसे उसने मेरे मन की बात भांप ली हो। हवा में एक अजीब सा तनाव घुल गया था, एक अनदेखा निमंत्रण। मैंने कप रखते हुए धीरे से उसका हाथ थाम लिया। उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों में ऐसे घुल गईं, जैसे वे एक-दूसरे के लिए ही बनी हों। उसकी नर्म त्वचा पर मेरा स्पर्श एक सिहरन पैदा कर गया, जो हमारे पूरे जिस्म में फैल गई। प्रिया ने अपना हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसकी उंगलियों ने हल्की सी पकड़ बनाई। यह एक अपराध था, एक वर्जित खेल, **दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध** का वो पहला पड़ाव, जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।
“अमित को देर लगेगी,” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और उसके वक्षों का उतार-चढ़ाव साफ दिख रहा था। मैंने धीरे से उसे अपनी ओर खींचा। उसके रेशमी बालों की खुशबू ने मुझे पूरी तरह से मदहोश कर दिया। मैं उसे अपने और करीब खींचता गया, और हमारे होंठ एक-दूसरे को ढूंढने लगे। यह एक लंबी, गहरी चुंबन थी, जिसमें बरसों की प्यास घुली हुई थी। उसके नरम होंठ मेरे होंठों पर ऐसे पिघल रहे थे, जैसे वे हमेशा से वहीं रहने के लिए बने हों।
उसकी आँखों में आज एक नई चमक थी, एक वर्जित सुख की चमक। उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरी छाती पर अपना हाथ फेरने लगी। उसकी उंगलियों का स्पर्श मेरे भीतर एक तूफ़ान जगा रहा था। वह धीमे-धीमे मुझे बेडरूम की ओर धकेलने लगी, उसकी आँखों में एक निमंत्रण था जिसे मैं ठुकरा नहीं सकता था। कमरे में पहुंचते ही मैंने उसकी साड़ी का पल्लू एक झटके में हटा दिया। उसके ब्लाउज के भीतर, उसके उभार, मेरी हथेली में समा जाने को बेताब थे। मैंने धीरे से ब्लाउज के हुक खोले, और उसके पूर्ण विकसित वक्ष मेरे सामने प्रकट हुए, जैसे दो परिपक्व फल, जिनकी फाँकें आज मेरे लिए ही खुली थीं। मैंने एक निवाले में उन्हें अपने मुँह में भर लिया, और प्रिया की सिसकी मेरे कानों में गूँज उठी।
हम दोनों ने एक-दूसरे के वस्त्र उतारे, और हमारी नग्न देहें एक-दूसरे में समा गईं। उसके गर्म, मुलायम शरीर का हर स्पर्श मुझे पागल कर रहा था। मैंने उसे बिस्तर पर धकेला, और उसके ऊपर आ गया। उसकी टाँगें मेरे कमर के इर्द-गिर्द कस गईं, जैसे मुझे कहीं जाने ही न देना चाहती हों। हमारे शरीर एक अगम्य वासना की आग से जल रहे थे, जिसे बुझाना नामुमकिन था। मैंने अपनी पूरी शक्ति से उसके भीतर प्रवेश किया, और प्रिया की एक लंबी, गहरी आह पूरे कमरे में गूँज उठी। यह **दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध** था, हाँ, पर उस पल हमें इसकी कोई परवाह नहीं थी। हम बस उस चरम सुख में डूबे थे, जहाँ दुनिया की कोई सीमा नहीं थी।
उसकी हर सिसकी, मेरे हर धक्के के साथ और गहरी होती जा रही थी। हमारे शरीर पसीने से भीग चुके थे, और हम एक-दूसरे में खोए हुए थे, उस चरम सुख की तलाश में, जो अब बस कुछ ही पलों की दूरी पर था। जब हमारी साँसें शांत हुईं और देह ढीली पड़ी, तो उस कमरे में केवल हमारे पसीने की खुशबू और एक गहरी संतुष्टि का अहसास था। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे, और प्रिया ने मेरे कान में फुसफुसाया, “हमें यह फिर से करना होगा, रोहन।” मैं जानता था कि यह अंत नहीं था, यह तो बस एक नई शुरुआत थी, उस वर्जित रिश्ते की, जो अब हमारे भीतर गहरे जड़ें जमा चुका था, और हाँ, **दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध** की यह आग अब बुझने वाली नहीं थी।
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