दोस्त की बीवी की रसीली देह का चरम सुख

प्रिया की नशीली आँखें जब राहुल से मिलीं, तो कमरे की हवा में एक अनकहा तूफान उमड़ आया। यह रोहित के घर पर एक आम शाम थी, पर आज कुछ भी ‘आम’ नहीं था। रोहित एक अर्जेंट क्लाइंट मीटिंग के लिए अचानक निकल गया था, राहुल और प्रिया को अकेले छोड़कर। राहुल जानता था कि रोहित के साथ उसकी दोस्ती बहुत पुरानी थी, लेकिन प्रिया के लिए उसके मन में जो भावनाएं थीं, उन्हें ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ के अलावा और कोई नाम नहीं दिया जा सकता था।

प्रिया, हल्के नीले रंग की सूती साड़ी में बेहद मोहक लग रही थी। उसका पल्लू थोड़ा ढीला होकर उसके कंधे से सरक रहा था, जिससे उसकी भरी हुई छाती का हल्का सा उभार दिख रहा था। जब रोहित चला गया, तो पहले अजीब सी चुप्पी छाई, फिर प्रिया ने सहज होने की कोशिश करते हुए राहुल से चाय के लिए पूछा। राहुल ने मना कर दिया, उसकी नज़रें प्रिया के होंठों पर टिकी थीं, जो अभी-अभी ‘चाय’ शब्द बोलकर अधखुले रह गए थे।

“तो, रोहित कब तक आएगा?” प्रिया ने पूछा, उसकी आवाज़ में हल्की सी घबराहट थी।

“उसने दो-तीन घंटे का कहा है।” राहुल की आवाज़ में एक गहरापन था, जो उसने खुद भी महसूस किया। वह उठकर प्रिया के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया।

“क्या बात है राहुल? कुछ परेशान लग रहे हो?” प्रिया ने उसकी ओर देखा, उसकी बड़ी-बड़ी आँखें राहुल की गहराई को पढ़ना चाह रही थीं।

“हाँ… बस थोड़ा सा।” राहुल ने धीरे से कहा, और अपने हाथ को प्रिया की हथेली पर रख दिया। प्रिया चौंक गई, पर उसने अपना हाथ हटाया नहीं। उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

राहुल ने हौले से प्रिया की उँगलियों को सहलाया। प्रिया की नरम त्वचा राहुल को मदहोश कर रही थी। उसने देखा प्रिया की पलकें धीरे से झपकीं, एक पल के लिए उसकी साँस रुक सी गई। यह संकेत काफी था। राहुल ने अपना दूसरा हाथ प्रिया की कमर पर रखा, और उसे हल्के से अपनी ओर खींचा। प्रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बस उसकी नज़रें राहुल की आँखों में डूब चुकी थीं।

धीरे-धीरे राहुल ने अपने होंठ प्रिया के होंठों के करीब लाए। उनके बीच की दूरी कम होती जा रही थी, जब तक कि उनके होंठ एक-दूसरे को छू न गए। यह एक नरम शुरुआत थी, एक मीठी सी आहट, पर जल्द ही यह एक तूफानी समंदर में बदल गई। राहुल ने प्रिया के निचले होंठ को चूसना शुरू किया, और प्रिया ने भी जवाब में अपना मुँह खोल दिया। उनकी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं, एक-दूसरे का स्वाद चखने लगीं। प्रिया के जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।

राहुल ने अपने हाथ प्रिया की कमर से ऊपर ले जाकर उसकी साड़ी के पल्लू को धीरे से हटाया। उसका हाथ सीधे प्रिया की गरमागरम त्वचा पर पहुँच गया। प्रिया ने एक सिसकी भरी। राहुल ने उसकी साड़ी को कमर से पकड़कर नीचे खिसकाना शुरू किया। प्रिया ने खुद ही अपने कंधे से ब्लाउज का हुक खोलने में राहुल की मदद की। जैसे ही उसका ब्लाउज ज़मीन पर गिरा, प्रिया की भरी हुई छातियाँ आज़ाद हो गईं, सिर्फ उसकी ब्रा की पतली पट्टी उन्हें थामे हुई थी।

राहुल की आँखें प्रिया के उभारों पर टिक गईं। उसने बिना देर किए ब्रा की पट्टी हटाई, और प्रिया के गुलाब जैसे निप्पलों को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद का मिलाजुला स्वर निकला। राहुल ने झुककर एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया, और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। प्रिया ने राहुल के बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया, उसकी साँसें बेकाबू हो रही थीं। उसका पूरा शरीर थरथरा रहा था। उस रात, जब रोहित काम से बाहर गया था और राहुल प्रिया के साथ अकेला था, तभी से इस ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ की शुरुआत हुई।

राहुल ने प्रिया को गोद में उठाया और बेडरूम की ओर ले चला। कमरे में मंद रोशनी थी। राहुल ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और उसकी बची हुई साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिए। प्रिया अब पूरी तरह से नग्न थी, उसकी गोरी देह चंद्रमा की रोशनी में चमक रही थी। राहुल ने भी अपने कपड़े उतारे, और प्रिया के ऊपर लेट गया। उनके शरीर एक-दूसरे में इस कदर घुल चुके थे कि ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ का अपराध बोध भी उस चरम आनंद के सामने फीका पड़ गया।

राहुल ने धीरे से प्रिया की जाँघों को फैलाया और उनके बीच अपना मर्दाना अंग टिकाया। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और एक गहरी साँस ली। राहुल ने एक झटके में प्रवेश किया। प्रिया के मुँह से एक चीख निकली, पर वह खुशी और दर्द का मिश्रण थी। राहुल धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाने लगा। उनके शरीर एक रिदम में ऊपर-नीचे हो रहे थे। बिस्तर की चरमराहट, उनके जिस्मों की थपथपाहट और प्रिया की कामुक आहें कमरे में गूँज रही थीं।

राहुल ने प्रिया की कमर को कसकर पकड़ा और अपनी गति को चरम पर पहुँचा दिया। प्रिया का शरीर अकड़ गया, उसकी आँखें खुलीं और उसने राहुल की आँखों में देखते हुए अपना अंतिम आनंद प्राप्त किया। राहुल भी कुछ ही पलों में प्रिया के अंदर पूरी तरह से खाली हो गया, उसकी रगों में एक गहरी शांति और तृप्ति फैल गई। वे दोनों एक-दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। उस पल में, दुनिया, रोहित, और समाज के सभी नियम बेमानी लग रहे थे। उनके बीच एक गहरा, अनैतिक लेकिन बेइंतहा सुखद रिश्ता बन चुका था, जिसकी तपिश अभी तक उनके जिस्मों में महसूस हो रही थी।

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