आज वो रात थी जिसका अंजली ने बरसों इंतज़ार किया था – अपनी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात। पलंग पर फूलों की सेज, मन में हज़ारों अरमान, और सामीप्य की एक मीठी बेचैनी उसके रोम-रोम में समाई हुई थी। कमरे में हल्की रोशनी थी, गुलाब की पंखुड़ियों से सजी सेज और हवा में मोगरे की भीनी-भीनी खुशबू का जादू फैला था। दरवाज़े पर हल्की आहट हुई और फिर विक्रम भीतर आए, दरवाज़ा बंद किया और अंजली की ओर बढ़े। अंजली, लाल जोड़े में सजी, घूँघट की आड़ में शरमा रही थी, उसकी धड़कनें बेकाबू थीं।
विक्रम ने धीरे से उसका घूँघट उठाया। अंजली की आँखों में इंतज़ार और थोड़ा डर था, लेकिन होठों पर एक हल्की सी मुस्कान। विक्रम ने उसकी आँखों में देखा, फिर झुककर उसके अधरों को अपने अधरों से छू लिया। यह एक मीठा, कोमल स्पर्श था जो धीरे-धीरे गहराता गया, जिसमें सालों की प्यास समाई थी। उनके होंठ एक-दूसरे में उलझ गए, साँसें तेज़ होने लगीं, और उनके शरीर की गर्मी बढ़ने लगी। विक्रम के हाथ अंजली की कमर पर सरके, उसकी रेशमी साड़ी को धीरे-धीरे उतारते हुए। अंजली ने भी हिचकिचाते हुए उसके कुर्ते के बटन खोले। हर एक कपड़ा जो उनके शरीर से अलग होता, कामुकता की अग्नि को और भड़काता।
कुछ ही पलों में, वे दोनों एक-दूसरे के सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थे। अंजली के सुडौल वक्ष, उसकी चिकनी जांघें, सब विक्रम की आँखों में वासना जगा रहे थे। विक्रम ने अंजली को अपनी बांहों में उठाया और उसे फूलों से सजी सेज पर लिटा दिया। अंजली की आँखें बंद थीं, उसका चेहरा शर्म और आनंद से लाल था। विक्रम के होंठ अंजली की गर्दन पर फिरे, फिर धीरे-धीरे उसके वक्षों की ओर बढ़े। अंजली की साँसें उखड़ रही थीं, हर स्पर्श एक नई सनसनी दे रहा था। विक्रम ने अंजली के गुलाबी निपल्स को अपने मुँह में भरा, उन्हें सहलाया, चूसने लगा। अंजली की ज़ुबान से सिसकियाँ निकल रही थीं, ‘आह… विक्रम… और…’
विक्रम धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा, अंजली की नाभि पर अपनी ज़ुबान फिराई, फिर उसकी जांघों के बीच की गीली गर्मी को महसूस किया। अंजली की योनि के द्वार पर पहुँचते ही, उसने उसे अपने होठों से सहलाया, अपनी ज़ुबान से उसे चाटा। अंजली का शरीर मरोड़ खाने लगा, वह कामुकता के चरम पर पहुँचने लगी थी। उसकी आहें अब और ज़ोरदार हो गईं। अब इंतज़ार की कोई गुंजाइश नहीं थी। विक्रम ने अंजली की टाँगें फैलाईं, उसकी कामुक पुकार को समझते हुए। उसने अपनी उँगली से अंजली के प्रवेश द्वार को टटोला, फिर धीरे से अपने मर्दाना औज़ार को वहाँ टिकाया। अंजली ने कसकर उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
एक गहरी साँस भरकर, विक्रम ने पहला धक्का दिया। अंजली की ज़ुबान से एक तीखी चीख निकली, जो दर्द और आनंद के मिश्रण से भरी थी। वह दर्द कुछ ही पलों में अनमोल सुख में बदल गया। विक्रम धीरे-धीरे भीतर और बाहर होने लगा। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए, हर धक्के के साथ पलंग चरमराने लगा। यह उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात थी, जहाँ हर सीमा टूट चुकी थी, जहाँ दो शरीर और दो आत्माएँ एक-दूसरे में विलीन हो रही थीं।
उनकी गति तेज़ होती गई, आहें और सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। अंजली ने विक्रम को अपनी ओर और खींचा, उसकी कूल्हों को अपने हाथों में भर लिया। विक्रम ने अपनी पूरी ताक़त से आख़िरी वार किया और दोनों एक साथ कामुक उन्माद के शिखर पर पहुँच गए। उनके शरीर काँपते रहे, फिर धीरे-धीरे शांत हो गए, एक-दूसरे की बांहों में लिपटे हुए। विक्रम अंजली के ऊपर ही लेटा रहा, अपने माथे को उसके गीले बालों में दबाए। अंजली ने उसे कसकर गले लगाया। ‘विक्रम… यह अद्भुत था,’ उसने धीमी आवाज़ में कहा। विक्रम ने उसके होंठों पर एक हल्का चुंबन दिया। उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात ने उन्हें हमेशा के लिए एक कर दिया था, एक अटूट बंधन में बाँध दिया था। रात अभी बाकी थी, और उनके पास एक-दूसरे को खोजने के लिए, एक-दूसरे में खो जाने के लिए अनगिनत पल थे। पलंग की चरमराहट और अंजली की मदहोश कर देने वाली आहों ने यह साबित कर दिया था कि यह बस शुरुआत थी एक ऐसी यात्रा की, जहाँ उनका प्यार और वासना हर रात नई ऊँचाइयों को छुएगा।
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