रोहन अपनी बालकनी में खड़ा था जब उसने देखा कि सामने वाले फ्लैट में कोई नया आ रहा है। एक कार आकर रुकी और उसमें से एक खूबसूरत औरत निकली। उसकी साड़ी का पल्लू सरका और मेरी साँसें वहीं अटक गईं। प्रिया, उसका नाम उसे बाद में पता चला, उसकी आँखें किसी हिरनी सी थीं, और उसकी चाल में एक अजब सी नज़ाकत थी। रोहन को लगा, उसकी नीरस ज़िंदगी में अब कुछ रोमांचक होने वाला है। उसकी कल्पनाओं में पहले ही **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** शुरू हो चुकी थीं।
अगले कुछ दिनों तक, बालकनी से ही उनकी नज़रें मिलतीं, हल्की मुस्कान का आदान-प्रदान होता। एक दिन प्रिया ने रोहन को आवाज़ दी, “क्या आप मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं? यह भारी बक्सा मुझसे हिल नहीं रहा।” रोहन के लिए यह निमंत्रण किसी जन्नत के दरवाज़े खुलने जैसा था। वह फौरन प्रिया के फ्लैट में पहुँचा। प्रिया ने एक स्लीवलेस टॉप और शॉर्ट्स पहन रखे थे, जो उसकी सुडौल देह पर बखूबी जँच रहे थे। उसकी हल्की पसीने की खुशबू रोहन को मदहोश कर रही थी।
बक्सा उठाने के बहाने, रोहन का हाथ जानबूझकर प्रिया के नितंबों से छू गया। प्रिया हल्की सी सिहर उठी, पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह मौन स्वीकृति रोहन के लिए एक हरा संकेत था। उसने बक्सा रखा और मुड़ा। प्रिया अब उसके बिल्कुल करीब खड़ी थी, उसकी आँखें रोहन की आँखों में झाँक रही थीं। “शुक्रिया, रोहन,” उसने धीमे से कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी लज़्ज़त थी।
“कोई बात नहीं, प्रिया,” रोहन ने कहा, और उसकी उँगलियाँ प्रिया के चेहरे पर फैले एक लट को हटाकर उसके गाल से जा लगीं। त्वचा पर त्वचा का वह स्पर्श किसी चिंगारी से कम नहीं था। प्रिया की आँखें बंद होने लगीं, उसके होंठ हल्के से खुल गए। रोहन अब और सब्र नहीं कर सकता था। उसने प्रिया की पतली कमर को अपनी बाहों में भरा और उसे अपने बेहद करीब खींच लिया। उनके शरीर एक दूसरे से ऐसे चिपक गए जैसे बरसों से बिछड़े प्रेमी मिल रहे हों।
रोहन ने प्रिया के अधरों को अपने होंठों में भर लिया। वह चुंबन शुरुआत में नरम था, फिर धीरे-धीरे वासना की आग में बदल गया। जीभें एक दूसरे से उलझ गईं, हर साँस में एक गहरी चाहत भरी थी। प्रिया की उँगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं, उसकी देह में एक कंपन दौड़ रहा था। रोहन के हाथ प्रिया की कमर से नीचे खिसकते हुए उसके गोल नितंबों पर पहुँच गए, और उसने उन्हें ज़ोर से अपनी तरफ़ भींच लिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
कपड़े एक-एक करके ज़मीन पर गिरने लगे। प्रिया अब सिर्फ़ एक पतली ब्रा और पैंटी में थी, उसका सुडौल बदन रोहन की आँखों को अपनी तरफ़ खींच रहा था। रोहन ने उसे अपनी बाहों में उठाया और सीधा बेडरूम की तरफ़ चल पड़ा। बिस्तर पर जाते ही, रोहन ने प्रिया को अपने नीचे ले लिया। उसकी गर्म साँसें प्रिया के गले पर महसूस हो रही थीं। रोहन का कठोर अंग प्रिया की जांघों के बीच अपनी जगह तलाशने लगा, जो अब उत्तेजना से गीली हो चुकी थीं।
प्रिया ने अपनी टाँगें फैलाईं, रोहन को पूर्ण रूप से आमंत्रित करते हुए। एक गहरी साँस भर कर, रोहन ने खुद को प्रिया में समाहित कर दिया। प्रिया की मुँह से एक तेज चीख निकली, जो तुरंत रोहन के होंठों में दब गई। अब सिर्फ़ शरीर की भाषा थी – धक्के पर धक्का, साँसों की तेज़ आवाज़, बिस्तर की चरमराती आवाज़। प्रिया ने अपनी कमर ऊपर उठाई, रोहन के हर धक्के का स्वागत करते हुए, और उसे खुद में और गहराई तक समाहित करने का इशारा किया।
कमरा वासना की तेज़ गंध से भर गया था। दोनों पसीने से भीग चुके थे, और उनकी हर रग में काम की आग धधक रही थी। “आह… रोहन… और तेज़…” प्रिया ने फुसफुसाया, उसकी उँगलियाँ रोहन की पीठ पर निशान बना रही थीं। रोहन ने उसकी बात मानी, और अपनी गति और तेज़ कर दी। हर धक्के के साथ प्रिया की देह थरथरा रही थी, उसके होंठों से निकलती सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
कुछ ही देर में, दोनों एक साथ एक तीव्र सुख की पराकाष्ठा पर पहुँचे। प्रिया के पूरे शरीर में एक ऐंठन आई और वह रोहन के नीचे ढीली पड़ गई। रोहन ने भी एक गहरी आह के साथ अपने प्रेम रस को प्रिया में खाली कर दिया। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे, थके हुए, पर संतुष्टि की चरम सीमा पर।
“मुझे नहीं पता था कि **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** इतनी हसीन हो सकती हैं,” रोहन ने हाँफते हुए कहा। प्रिया ने मुस्कुराते हुए अपना सिर उसके सीने पर रख दिया। “यह तो बस शुरुआत है, मेरे रोहन,” उसने फुसफुसाया। और उस रात, दोनों ने यह जान लिया कि यह उनके बीच की शरारतें अभी बहुत दूर तक जानी थीं, और हर रात उनके बिस्तर में एक नई कहानी लिखने वाली थी।
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