नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें: मेरी प्यासी रातों की रानी

उसकी साड़ी का पल्लू सरका और मेरी साँसें वहीं अटक गईं। नई पड़ोसन, प्रिया, जब पहली बार अपने सामान के साथ मेरे सामने से गुज़री, तो मुझे लगा जैसे मेरे शांत जीवन में किसी ने एक उग्र ज्वालामुखी जगा दिया हो। उसकी कमर की हलकी सी झलक, उसके पसीने से भीगी त्वचा पर चिपकी साड़ी और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक—सब कुछ मुझे एक ही पल में बेकाबू कर गया। मेरा नाम रोहन है और मैं अपने अपार्टमेंट में अकेला रहता था, जब तक कि वह बगल वाले फ्लैट में नहीं आ गई।

पहले कुछ दिन सामान्य रहे। मैंने उसे शिफ्टिंग में थोड़ी मदद की, पानी ऑफर किया, और छोटी-मोटी बातें हुईं। लेकिन हर बार जब हमारी नज़रें मिलतीं, एक अनदेखी चिंगारी सुलग उठती। उसकी हँसी, उसके होंठों की बनावट, और जब वो बात करते हुए अपनी ज़ुबान को उन होंठों पर फेरती, तो मेरे अंदर का पुरुष चीखने लगता था। मैं जानता था कि यह सिर्फ़ एक पड़ोसन से बढ़कर कुछ और होने वाला है। मेरे मन में बार-बार घूम रहा था, यह हैं **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** की पहली आहट।

एक शाम, जब ज़ोरदार बारिश हो रही थी और बिजली भी चली गई थी, मैंने हिम्मत करके उसे अपने घर कॉफी के लिए बुलाया। “प्रिया, क्या तुम यहाँ अकेली हो? कॉफी पीनी है? मैंने अभी-अभी बनाई है,” मैंने कहा। कुछ पल की चुप्पी के बाद, उसने जवाब दिया, “ज़रूर, रोहन। यहाँ बहुत अंधेरा है।” और फिर, मोमबत्ती की रोशनी में, वह मेरे लिविंग रूम में आ गई। उसकी गीली साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी, हर उभार साफ दिख रहा था। उसकी भीगी हुई ज़ुल्फ़ें उसके चेहरे पर बिखरी थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सी कामुकता तैर रही थी।

हमने कॉफी पीते हुए मौसम और अपनी ज़िंदगी की बातें कीं। मोमबत्ती की रोशनी में उसकी त्वचा सुनहरी लग रही थी। “तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो, प्रिया,” मैंने बिना सोचे-समझे कह दिया। उसके गालों पर हल्की सी लाली छा गई। उसने अपनी नज़रें झुका लीं, फिर धीरे से कहा, “तुम भी, रोहन।” मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके हाथ पर रख दिया। उसकी त्वचा गर्म थी और उसने अपना हाथ नहीं हटाया। एक करंट पूरे कमरे में दौड़ गया। उसने अपनी आँखें उठाईं और हमारी नज़रें मिलीं। उस पल, मुझे लगा कि दुनिया थम गई है।

धीरे-धीरे, मैंने अपने अंगूठे से उसके हाथ को सहलाना शुरू किया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने होंठ खोले, कुछ कहने वाली थी, लेकिन मैंने उसे बोलने नहीं दिया। मैंने अपना हाथ उसके गाल पर रखा और धीरे से उसके होठों की ओर झुका। वह हिचकिचाई नहीं, बल्कि अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे होंठ उसके होंठों से मिले। एक नर्म, प्यासा चुंबन। शुरू में धीमा, फिर जैसे ही हमारे शरीर एक-दूसरे की गर्माहट में डूबे, वह जंगली हो गया। उसके होंठ खुले, और मेरी ज़ुबान ने उसके अंदर प्रवेश कर लिया। वह एक लंबी आह के साथ मेरे गले से लिपट गई।

मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और उसे बेडरूम की तरफ ले गया। उसकी साड़ी का पल्लू मेरे कंधों से गिर गया। मैंने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसके अधखुले होंठों से निकलती साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं। मैंने उसके चेहरे पर बिखरी ज़ुल्फ़ों को हटाया और उसके कानों के पीछे एक चुंबन दिया। वह सिसकने लगी। मैंने उसकी साड़ी खोली और धीरे-धीरे उसके शरीर से उसे अलग किया। फिर उसकी चोली और पेटीकोट। अब वह मेरे सामने सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैंटी में थी। उसके भरे-भरे स्तन मेरे सामने उभरे हुए थे, उसकी नाभि की गहराई मुझे मदहोश कर रही थी।

मैं उसके शरीर के हर इंच पर चुंबन करने लगा। उसके गले से लेकर उसके स्तनों के बीच, उसकी नाभि और फिर उसके पेट पर। वह अपनी कमर मटका रही थी, “और… और नीचे रोहन,” उसने फुसफुसाया। मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। उसके पैरों के बीच का हिस्सा, बालों की घनी झाड़ी से ढका हुआ, मुझे और अधिक उत्तेजित कर रहा था। मैंने अपने होंठ उसके उस गुप्त स्थान पर रखे और उसे चूमना शुरू किया। वह कसकर बिस्तर को पकड़ने लगी और उसकी सिसकियाँ आहों में बदल गईं। “बस… रोहन… मैं… मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती,” उसने हाँफते हुए कहा।

मैं अपने कपड़े उतार चुका था। हमारा शरीर एक-दूसरे से चिपक गया। उसकी गरमाहट, उसकी नमी, सब कुछ मुझे बेकाबू कर रहा था। मैंने धीरे से उसके पैरों को खोला और उसके ऊपर आया। मैंने अपनी कमर झुकाई और धीरे-धीरे अपने औजार को उसके अंदर डाला। वह एक चीख के साथ मेरे गले से लिपट गई। शुरुआत में थोड़ा दर्द हुआ, फिर वह पूरी तरह से मुझमें समा गई। मैंने अपनी गति बढ़ाई। उसकी आहें, उसकी मदहोश कर देने वाली आवाज़, और उसके नाखूनों का मेरी पीठ पर गड़ना, मुझे और भी जोश से भर रहा था।

हम दोनों एक लय में चल रहे थे, एक-दूसरे में खोए हुए। उसकी कामुकता ने मुझे पूरी तरह से वश में कर लिया था। हमने कई बार एक-दूसरे को चरम सुख तक पहुँचाया, जब तक कि हमारे शरीर पूरी तरह से थक नहीं गए। हम एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर बिस्तर पर पड़े रहे, हमारी साँसें तेज़ थीं और शरीर पसीने से भीगे हुए थे। मैंने उसके माथे पर एक चुंबन दिया। “तुम शानदार हो, प्रिया,” मैंने फुसफुसाया। उसने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें खोलीं। “ये तो बस शुरुआत थी, रोहन। **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** अभी और आगे जानी थीं।” उसकी आँखों में एक नई शरारत चमक रही थी, जो वादा कर रही थी आने वाली रातों की बेकाबू वासना का। आज तो बस शुरुआत थी, एक ऐसी रात की जिसकी मुझे कभी उम्मीद नहीं थी।

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