उसकी साड़ी के पल्लू से झाँकती कमर, आँखों में ऐसी शरारत कि मेरे अंदर कुछ जल उठा। काव्या, मेरी नई पड़ोसन, जब पहली बार अपने अपार्टमेंट में सामान शिफ्ट कर रही थी, तभी मैंने उसे देखा। उसके हर कदम, उसकी हर अदा में एक अजीब-सा आकर्षण था, जो मुझे अपनी ओर खींच रहा था। मेरी रातों की नींद उड़ चुकी थी, और मैं बस **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** करने के बहाने ढूंढ रहा था।
एक दिन, मैंने देखा कि वह अपने बालकनी के गमलों में पानी डाल रही थी और एक भारी गमला उठाते हुए लड़खड़ा गई। यह मेरे लिए सही मौका था। मैं तुरंत उसके दरवाजे पर पहुँच गया और मदद की पेशकश की। “काव्या जी, मैं रोहन, आपका पड़ोसी। कोई मदद चाहिए?” मैंने अपनी आवाज़ को जितना हो सके, विनम्र बनाने की कोशिश की।
वह मुस्कुराई, एक ऐसी मुस्कान जो सीधे मेरे दिल में उतर गई। “ज़रूर रोहन जी, यह गमला बहुत भारी है। अगर आप थोड़ी मदद कर दें तो।”
जब मैंने गमला उठाया, तो हमारा हाथ छू गया। उसकी उँगलियों का स्पर्श मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ा गया। मैंने जानबूझकर थोड़ी देर तक उसका हाथ पकड़े रखा। उसकी आँखों में एक पल के लिए शरारत की चमक देखी, जिसने मेरी हिम्मत और बढ़ा दी।
अगले कुछ दिनों तक, हम छोटी-मोटी बातों पर मिलते रहे – दूध, अखबार, या बस एक कप चाय के बहाने। हर मुलाकात पर आँखों-आँखों में बातें होतीं, और मैं उसकी खूबसूरती में और गहरे उतरता जाता। उसकी घुंघराली ज़ुल्फ़ें, उसके अधरों की हल्की-सी थरथराहट, और उसके वक्षों का हल्का उभार – सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था।
एक शाम, जब शहर में हल्की बारिश हो रही थी और बिजली गुल हो गई, मैंने काव्या के दरवाजे पर दस्तक दी। “क्या सब ठीक है काव्या?”
“हाँ रोहन, बस थोड़ी अंधेरा है। मोमबत्तियाँ जला रही हूँ।” उसने दरवाज़ा खोला। मोमबत्ती की पीली रोशनी में वह और भी हसीन लग रही थी। उसकी हल्की गीली साड़ी उसके शरीर से चिपकी हुई थी, जो उसके हर उभार को साफ़ दिखा रही थी। मेरे भीतर की आग और भड़क उठी।
“अगर तुम्हें डर लग रहा हो तो मैं रुक सकता हूँ।” मैंने उसके करीब आते हुए कहा।
उसने अपनी नज़रें उठाईं और हमारी आँखें मिलीं। उस पल, सारी दुनिया थम गई। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत थी। “अगर आप रुकना चाहें तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी,” उसने फुसफुसाया।
मैं उसके लिविंग रूम में चला गया। मोमबत्ती की रौशनी में हमने बातें शुरू कीं, फिर धीरे-धीरे हमारी बातें और गहरी होती गईं। उसका हाथ मेरे हाथ को छू गया और इस बार न तो मैंने इसे हटाया और न उसने। मैंने धीरे से उसके हाथ को अपनी मुट्ठी में ले लिया और अपनी उँगलियों को उसकी उँगलियों में फँसा दिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“काव्या…” मेरे मुँह से बस इतना ही निकला।
वह मेरे और करीब आई। उसकी साँसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी। मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींच लिया। हमारी देह एक-दूसरे से सट गई। साड़ी के बावजूद, मैंने उसके शरीर की कोमलता महसूस की।
“रोहन…” उसकी आवाज़ एक काँपते हुए फुसफुसाहट में बदल गई।
मैंने धीरे से उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। शुरू में एक नर्म चुंबन, फिर वह एक गहरी, जंगली प्यास में बदल गया। उसके होंठ नर्म और मीठे थे, और वह भी उतनी ही शिद्दत से मेरा साथ दे रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी पीठ पर गए, और मैंने उसकी साड़ी का पल्लू सरका दिया। उसकी नंगी, मुलायम कमर मेरे स्पर्श से सिहर उठी। वह मेरे कंधे पर अपने हाथ रखकर मुझे और कसने लगी।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बेडरूम की ओर चला। उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस लीं। मोमबत्ती की रोशनी में, मैंने धीरे-धीरे उसकी साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। उसके सुंदर, सुडौल वक्ष मेरे सामने थे। गुलाबी निप्पल प्यास से उभरे हुए थे। मैं उन पर टूट पड़ा, एक को चूसता, दूसरे को सहलाता। काव्या के मुँह से दर्द भरी आहें निकलने लगीं। वह अपने सिर को पीछे कर चुकी थी और अपनी उँगलियों से मेरे बालों को नोंच रही थी।
“आह… रोहन… और तेज़…”
मैंने उसके पेटीकोट और पैंटी को भी उतार दिया। अब वह पूरी तरह नग्न थी। उसकी जाँघों के बीच का नर्म, गुलाबी मांस मेरे सामने खुला था। मैं उसके ऊपर झुक गया और उसकी योनि को अपनी ज़ुबान से चाटना शुरू कर दिया। काव्या अपने कूल्हे उछालने लगी। उसकी मीठी, कामुक गंध मुझे पागल कर रही थी।
“बस… अब और नहीं रुक सकती…” वह चिल्लाई।
मैंने अपने कपड़े उतारे और उसके ऊपर आ गया। हमारी त्वचा का स्पर्श बिजली जैसा था। मैंने अपनी उँगलियों से उसके रस से तर-बतर योनि को टटोला और फिर धीरे से अपने लिंग को उसके प्रवेश द्वार पर रखा।
“धीरे… रोहन… धीरे से…” उसने काँपते हुए कहा।
मैंने उसकी बात सुनी, और धीरे-धीरे अपने मज़बूत लिंग को उसकी गरम, नम गुफा में धकेलना शुरू किया। वह कसकर बंद थी, पर जैसे-जैसे मेरा लिंग अंदर गया, वह फैलती गई। एक गहरी आह भरकर मैंने पूरा प्रवेश कर लिया। हमारी **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** अब एक गहरे जुनून में बदल चुकी थीं।
मैंने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। काव्या अपनी टाँगों से मेरी कमर को कसकर पकड़ी हुई थी और हर धक्के के साथ मेरे होंठों को चूम रही थी। उसके वक्ष मेरे सीने से टकरा रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों और देह के टकराने की आवाज़ें थीं। मैंने उसे अपने ऊपर उठाया, फिर उसे पलट कर उसकी कमर को थाम लिया और उसे अपनी गोदी में ऊपर-नीचे करने लगा। वह अपनी कमर को मेरे हर धक्के के साथ तालमेल बिठा रही थी। हम दोनों एक ही लय में खो चुके थे, एक-दूसरे को असीम सुख दे रहे थे। जब हम दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँचकर एक-दूसरे में सिमट गए, तो कमरे में सिर्फ संतुष्टि की गहरी साँसें बची थीं। वह मेरी बाँहों में पूरी तरह ढीली पड़ी थी, और मैं उसके बालों को सहला रहा था। वह सिर्फ मेरी पड़ोसन नहीं, मेरे जीवन की आग बन चुकी थी, और मैं इस आग में खुशी-खुशी जलना चाहता था।
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