आज तक कभी नहीं सोचा था कि किसी की एक झलक मेरी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेगी। मेरी जिंदगी में प्रिया का आगमन किसी हसीन तूफान से कम नहीं था, जिसने मेरे शांत जीवन में कामुक हलचल मचा दी थी। मैं रूहान, अपने घर की बालकनी में बैठा सुबह की चाय का कप थामे था, जब बगल वाले घर में एक नई किराएदार आई। एक लाल रंग की साड़ी में लिपटी, कमर में झूलती हुई चाबी के गुच्छे के साथ, वो अपने सामान को उतरवा रही थी। उसका नाम प्रिया था। उसकी पहली मुस्कान ने ही मेरे दिल में कुछ अनकहा जगा दिया। यह बस शुरुआत थी, नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें अभी तो शुरू होनी थीं।
अगले कुछ दिन हमारे बीच बस निगाहों का खेल चलता रहा। बालकनी से बालकनी तक, कभी किराने की दुकान पर, कभी शाम की सैर में। हर बार एक गर्मजोशी भरी मुस्कान और एक अजीब सी बेचैनी। मुझे महसूस होने लगा था कि यह सिर्फ एकतरफा नहीं है। एक शाम, जब बिजली गुल थी, प्रिया मेरे दरवाजे पर आई। “रूहान जी, क्या आपके पास मोमबत्ती या लालटेन है? मेरे पास कुछ नहीं है और बिल्कुल अँधेरा है।” उसकी आवाज़ में एक हल्की सी घबराहट थी। यह मेरे लिए मौका था। “अरे! बिल्कुल प्रिया जी। आइए अंदर, मैं अभी निकालता हूँ।”
जैसे ही प्रिया मेरे घर के अंदर आई, कमरे में जलते दीये की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसकी आँखों की चमक और बढ़ गई थी। मैंने उसे बैठने को कहा और मैं मोमबत्ती ढूँढने लगा। लौटते हुए मेरा हाथ गलती से उसके कंधे को छू गया। एक बिजली सी दौड़ गई मेरे पूरे जिस्म में। उसने शरमा कर अपनी पलकें झुका लीं, लेकिन उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। मैं उसके पास ही सोफे पर बैठ गया। “कैसा लग रहा है आपको नए घर में?” मैंने पूछा। “अच्छा है, बस थोड़ी सी आदत पड़ने में देर लगेगी,” उसने दबी हुई आवाज़ में जवाब दिया। उसकी आवाज़ में एक मादकता थी, जो मुझे अपनी ओर खींच रही थी।
हमारी बातें खत्म हो चुकी थीं, लेकिन हम उठने का नाम नहीं ले रहे थे। हवा में एक अजीब सी गर्माहट तैर रही थी। मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उसके मुलायम हाथ को अपनी हथेली में ले लिया। उसने अपना हाथ नहीं हटाया, बल्कि उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों में उलझ गईं। मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने उसका चेहरा अपनी ओर मोड़ा। उसकी आँखें बंद हो चुकी थीं, और होंठ हल्के से खुले हुए थे, जैसे मुझे निमंत्रण दे रहे हों। मैं धीरे-धीरे उसके करीब आया और मेरे होंठ उसके रसीले होंठों पर टिक गए। एक गहरी, नमकीन और मीठी चुंबन, जिसने हमारे भीतर की सारी इच्छाओं को जगा दिया। यह सब नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें ही तो थीं, जो उन्हें इस कदर मदहोश कर रही थीं।
चुंबन गहराता गया। उसके हाथ मेरे बालों में उलझ गए और उसने मुझे अपनी ओर खींचा। मेरी जीभ उसके मुँह के अंदर की हर मीठी जगह को टटोल रही थी, और उसकी जीभ मेरी जीभ से अठखेलियाँ कर रही थी। हमने एक-दूसरे को सोफे पर धकेला और मैं उसके ऊपर आ गया। उसके शरीर की गर्माहट मेरे जिस्म को आग लगा रही थी। मैंने उसके साड़ी के पल्लू को धीरे से सरकाया, और फिर उसके ब्लाउज के हुक खोले। उसकी गोरी त्वचा, उसके सुडौल स्तन, मेरे सामने बेपर्दा थे। मैंने उन पर अपने होंठों से आक्रमण कर दिया, बारी-बारी से उन्हें चूसा, काटा, और मरोड़ा। प्रिया दर्द और आनंद के मिश्रित आवेग में आहें भर रही थी।
उसके हाथों ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। शर्ट, फिर पैंट, और हम दोनों अब सिर्फ अंतरंग वस्त्रों में थे। मैंने उसे गोद में उठाया और अपने बेडरूम की ओर ले गया, जहाँ पलंग हमारी प्रतीक्षा कर रहा था। हमने एक-दूसरे के अंतरंग वस्त्रों को भी उतार फेंका, और हमारे नग्न शरीर एक-दूसरे से लिपट गए। रूहान के हाथ प्रिया के सुडौल जिस्म पर फिसल रहे थे, उसकी कमर, फिर कूल्हों पर, हर स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। प्रिया की टाँगें मेरे कमर पर लिपट गईं। “अब और इंतज़ार नहीं होता,” उसने फुसफुसाया।
मैंने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को प्रिया की गर्माहट में उतारा। एक गहरी आह उसके मुँह से निकली, और उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। पहला धक्का, फिर दूसरा। हर धक्के के साथ एक नई लहर उठ रही थी, दर्द और आनंद का एक अजीबोगरीब मिश्रण। हमारी साँसें तेज़ हो रही थीं, आहें, फुसफुसाहटें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। हम दोनों एक साथ तालमेल बिठाते हुए, एक-दूसरे में गहरे उतरते चले गए। पसीना टपक रहा था, और हमारे शरीर की रगड़ से एक मीठी सी गंध पूरे कमरे में फैल गई थी। और फिर वह क्षण आया, जब दोनों के जिस्म एक साथ थरथरा उठे, चरम सुख की एक तीव्र लहर ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया।
हम एक दूसरे से चिपके पड़े रहे, साँसें अभी भी तेज थीं, लेकिन दिल को गहरा सुकून मिल चुका था। प्रिया ने मेरे सीने पर सिर रखकर मेरी ओर देखा और मुस्कुराई। “यह तो बस शुरुआत है, रूहान,” उसने कहा। मैं जानता था, नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें अभी और गहराने वाली थीं, और मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार था।
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