आज शाम की नम हवा में रिया की खुशबू घुल कर मेरी साँसों में उतर गई थी। विनय की आँखें अपनी बालकनी से सामने वाले फ्लैट में नई शिफ्ट हुई रिया पर टिकी थीं। सलवार-कमीज़ में भी उसका गठा हुआ बदन हर मोड़ पर एक निमंत्रण देता प्रतीत हो रहा था। उसके लम्बे, खुले बाल कभी हवा में लहराते तो कभी उसके गुलाबी होठों को छू जाते, और विनय के मन में एक अजीब सी हलचल पैदा करते। उसके आने के बाद से, मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में “नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें” शुरू हो चुकी थीं, बस उसे बेडरूम तक पहुंचाना बाकी था।
एक दिन, जब रिया अपने भारी फर्नीचर को अंदर लाने में थोड़ी परेशान दिख रही थी, विनय ने झटपट मदद का हाथ बढ़ाया। पास आते ही रिया के जिस्म की मादक महक ने विनय को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसकी मुस्कान में एक भोलापन था, पर आँखों में शरारत भरी एक चिंगारी भी जो विनय ने पहचान ली। बातों ही बातों में उनके बीच की झिझक कम होने लगी। कभी लिफ्ट में अचानक टकरा जाना, कभी सीढ़ियों पर आँखें चार होना, हर मुलाक़ात उनके बीच एक अनकही जुबान तैयार कर रही थी। विनय को अक्सर लगता कि रिया जानबूझकर अपनी कमर या कूल्हों को थोड़ा और घुमा कर चलती जब वह उसे देख रहा होता।
बीते कुछ दिनों से, रात को अक्सर बालकनी में रिया की मौजूदगी महसूस होती। एक रात, जब पूरा शहर घनघोर बारिश की आगोश में था, विनय बालकनी में खड़ा उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। तभी सामने वाली बालकनी की हल्की रोशनी में रिया नज़र आई। उसने एक पतली सी नाइटी पहनी थी, जो बारिश की ठंडी हवा में उसके भीगे जिस्म से चिपक रही थी। विनय की साँसें तेज़ हो गईं। रिया ने अपनी निगाहें विनय पर डालीं और उसकी आँखों में बिना कुछ कहे एक न्योता था। विनय से रहा नहीं गया। उसने हिम्मत की और अगले ही पल खुद को रिया के दरवाज़े पर खड़ा पाया।
दरवाज़ा खुला, रिया की आँखें चमक उठीं। “विनय? इतनी रात को?” उसकी आवाज़ में एक मीठी उत्तेजना थी।
“बस… सोचा कहीं कुछ और तो नहीं चाहिए तुम्हें,” विनय ने हकलाते हुए कहा, पर उसकी नज़रें रिया के जिस्म पर दौड़ रही थीं।
“अंदर आओ न,” रिया ने मुस्कुराते हुए कहा। जैसे ही विनय अंदर आया, रिया ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
कमरे में मंद रोशनी थी और हवा में अगरबत्ती की हल्की खुशबू। रिया सीधे विनय के करीब आई, उसकी आँखों में देखा और एक झटके में उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह पल जिसके लिए विनय हफ्तों से तड़प रहा था, आखिरकार आ गया था। रिया के होंठ गरम और नम थे, और उनकी कामुकता विनय को अपनी गिरफ्त में ले रही थी। विनय के हाथों ने रिया की कमर को थामा और उसे अपनी ओर खींच लिया, उसके नरम वक्ष विनय की छाती पर दब गए।
रिया ने एक आह भरी और विनय की टी-शर्ट उतार दी। उसके हाथ विनय के गठे हुए जिस्म पर घूमने लगे। उसके नाखून विनय की पीठ पर हल्का निशान छोड़ते, उसे और उत्तेजित करते रहे। विनय ने रिया की नाइटी के फीते खोले और वो रेशमी कपड़ा उसके बदन से फिसल कर ज़मीन पर आ गिरा। रिया का पूरा जिस्म अब विनय की आँखों के सामने था – सुडौल जांघें, कामुक कूल्हे और कसकर उठे हुए स्तन। विनय ने उसके स्तनों को अपने हाथों में भरा और उनके निप्पलों को अपनी उँगलियों से छेड़ा, जिससे रिया के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं।
विनय ने रिया को गोद में उठाया और उसे बेडरूम की तरफ ले गया, जहां पहले से ही एक नरम बिस्तर उनका इंतज़ार कर रहा था। उसने रिया को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। उसके अधरों ने रिया के पेट, फिर उसकी नाभि और फिर उसकी जांघों को छुआ। रिया का जिस्म आग की तरह दहक रहा था। “विनय… अब… और नहीं रुका जाता…” रिया की आवाज़ धीमी, दबी हुई और बेताब थी।
विनय ने अपने पैन्ट भी उतार दिए। रिया की आँखों में प्यास थी, और उसके अंगों में मदहोशी। विनय ने धीरे से रिया की जांघों को फैलाया और उसके केंद्र बिंदु पर अपना स्पर्श दिया। रिया एक गहरी साँस लेकर अपनी कमर ऊपर उठाने लगी। “उम्म… आह्ह्ह्ह…” उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसके मुँह से केवल कामुक आवाज़ें निकल रही थीं। विनय ने खुद को रिया के अंदर उतारा। पहले धीमे, फिर तेज़ धक्कों के साथ वह रिया के जिस्म में उतरता चला गया। रिया की कमर अब विनय की ताल पर उठती-गिरती, उसके हर वार पर अपने जिस्म को और खोलती जा रही थी। “और तेज़… हाँ… ऐसे ही…” रिया के मुँह से निकली आवाज़ें विनय को और ऊर्जा दे रही थीं।
कुछ ही देर में दोनों के जिस्म एक कामुक आवेश में झूल रहे थे। उनकी साँसें, उनकी आवाज़ें, और उनके जिस्म की रगड़न एक ही धुन में बज रही थी। जब दोनों एक साथ चरम सुख की गहराइयों में डूबे, तो पूरा कमरा उनकी कामुक चीखों से गूँज उठा। उनके जिस्म पसीने से भीगे हुए थे, पर आत्माएं संतुष्टि से भरी हुई थीं। विनय ने रिया के माथे को चूमा। “हमारी नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें अभी तो बस शुरू हुई हैं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। रिया ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं, एक गहरी, संतुष्टि भरी साँस ली, और विनय के आलिंगन में कसकर सिमट गई। यह रात उनकी कामुक शरारतों की शुरुआत थी, जिसके बाद कई और बेकाबू रातें आने वाली थीं।
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