उसकी आँखों में आज भी वही नशा था, जिसने मुझे सालों पहले मदहोश किया था। प्रिया, मेरी पुरानी प्रेमिका, आज अचानक मेरी आँखों के सामने थी, सालों बाद। समय ने उसे और भी खूबसूरत, और भी मोहक बना दिया था। हमारी मुलाक़ात एक दोस्त की पार्टी में हुई थी, और जैसे ही हमारी आँखें मिलीं, हवा में एक अनकही चिंगारी दौड़ गई। थोड़ी झिझक के बाद, हमने बात शुरू की, और धीरे-धीरे बातों का सिलसिला बढ़ता गया। पुरानी यादें ताज़ा होने लगीं, और उन यादों के साथ, दबी हुई इच्छाएँ भी जागृत हो उठीं।
“रवि, क्या तुम मुझे घर छोड़ दोगे?” पार्टी खत्म होने पर उसने धीरे से पूछा। मेरी धड़कनें तेज हो गईं। यह निमंत्रण सिर्फ़ घर तक छोड़ने का नहीं था, यह पुरानी आग को फिर से सुलगाने का था। मैंने बिना कुछ कहे सहमति में सिर हिला दिया।
मेरी कार में खामोशी थी, लेकिन वह खामोशी बेचैनी और उम्मीद से भरी हुई थी। मेरे फ्लैट के सामने आकर, मैंने पूछा, “कॉफी?”
उसने मुस्कुराकर देखा, “कॉफी के लिए तो हाँ कहूँगी, लेकिन पहले बाथरूम।”
मेरे घर में घुसते ही, उसने अपनी साड़ी का पल्लू संभाला और मुस्कुराई। मैंने उसे देखा, उसके खुले बालों से आती हुई भीनी-भीनी खुशबू ने मुझे पूरी तरह घेर लिया। दिल में एक अजीब सी हलचल हो रही थी। मुझे मालूम था, कि **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** की कहानियों से कहीं ज़्यादा गहरा और नशीला हो सकता है।
कॉफी का बहाना तो था, लेकिन हम दोनों जानते थे कि अब और कोई बहाना काम नहीं आएगा। मैंने उसके हाथ को पकड़ा, और एक धीमी सी सिहरन उसके जिस्म में दौड़ गई। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसने अपनी निगाहें ऊपर उठाईं। उसकी आँखों में वासना और लालसा साफ झलक रही थी। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके अधरों पर अपने होंठ रख दिए। एक पल की झिझक के बाद, उसने भी मेरा साथ दिया। यह सिर्फ़ एक चुंबन नहीं था, यह सालों की प्यास, सालों की अधूरी कहानी का मिलन था।
हमारे होंठों ने एक-दूसरे को चूसना शुरू किया। मेरी जीभ उसके मुँह में अंदर गई, और उसने भी मेरी जीभ का स्वागत किया। एक गहरा, गीला चुंबन जिसने मेरे पूरे शरीर में आग लगा दी। मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी पीठ पर गए, और मैंने उसे और करीब खींच लिया। उसकी साड़ी का पल्लू कब गिरा, मुझे पता ही नहीं चला। उसके मुलायम वक्ष मेरे सीने से कसकर चिपके हुए थे। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बेडरूम की ओर चल पड़ा।
बिस्तर पर गिरते ही, हमारे हाथों ने एक-दूसरे के कपड़ों से जंग छेड़ दी। साड़ी, ब्लाउज, शर्ट, सब पल भर में ज़मीन पर ढेर हो गए। प्रिया का नग्न जिस्म मेरे सामने था – वही चिकनी त्वचा, वही उभरे हुए वक्ष, वही चौड़ी कमर और मांसल जाँघें जिन्हें मैं सालों से भूलने की कोशिश कर रहा था। मेरी नज़रें उसके हर अंग पर घूम रही थीं, और मेरी वासना चरम पर पहुँच चुकी थी।
मैंने उसके ऊपर झुककर उसके वक्षों को अपने मुँह में भर लिया। वह सिसकियाँ भरने लगी, उसके हाथ मेरे बालों को कसकर पकड़ रहे थे। मैं एक-एक वक्ष को चूमता, चूसता रहा, जब तक कि उसके निप्पल कड़े न हो गए। मेरे हाथ उसकी कमर से नीचे खिसकते हुए उसकी जाँघों के बीच पहुँच गए, जहाँ उसकी योनि नमी से भरी हुई थी। मैंने अपनी उंगलियों से उसे सहलाना शुरू किया, और प्रिया की आहें तेज हो गईं।
“रवि… और नहीं… मुझसे और इंतज़ार नहीं होता…” वह हाँफते हुए बोली।
मैंने उसके पैरों को उठाया और अपनी कमर को उसके बीच में फिट किया। मेरे कठोर मर्दानी अंग उसकी गीली योनि पर रगड़ खा रहे थे। एक गहरी साँस लेकर, मैंने एक ही झटके में खुद को उसके भीतर उतार दिया।
एक चीख प्रिया के गले से निकली, जो तुरंत ही एक गहरी आह में बदल गई। उसने मुझे कसकर जकड़ लिया। मेरे भीतर एक सनसनी दौड़ गई। यह एहसास, यह गर्मी, यह अपनापन…
मैंने धीमे-धीमे धक्के देने शुरू किए। हर धक्का उसे और मुझे, दोनों को एक अलग ही दुनिया में ले जा रहा था। प्रिया की आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे और वह सिर्फ़ आहें भर रही थी। उसकी कमर मेरे हर ताल के साथ ऊपर उठ रही थी। मैं अपनी गति बढ़ाता गया, और वह भी मेरे साथ उतनी ही तीव्रता से झूल रही थी।
“तेज… रवि… और तेज… आह्ह्ह्ह्!” उसने चीखकर कहा।
मैंने उसकी बात मानी। हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे, पसीने की बूँदें एक-दूसरे में मिल रही थीं। बिस्तर की चादरें सिकुड़ चुकी थीं। उस पल, उनके जिस्मों का मिलन सिर्फ़ शारीरिक नहीं था, बल्कि **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** का एक जीता-जागता प्रमाण था, जो हर साँस, हर धड़कन में घुल गया था।
हम दोनों ने एक साथ चरम सुख को प्राप्त किया। उसके जिस्म में एक तीव्र कंपन हुआ, और वह मेरे नीचे ढीली पड़ गई। मैं भी उसके अंदर ही छूट गया, और उसके ऊपर ही बेजान सा गिर गया।
कुछ देर तक हम वैसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे, हमारी साँसें तेज़ थीं, हमारे दिल ज़ोर से धड़क रहे थे। प्रिया ने अपना सिर मेरे कंधे पर रखा और मेरे बालों को सहलाया।
“मैंने तुम्हें बहुत मिस किया, रवि,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने उसे और कसकर गले लगा लिया। आज रात सिर्फ़ शरीर नहीं मिले थे, हमारी आत्माएँ भी एक हो गई थीं। यह सिर्फ़ एक रात की कहानी नहीं थी, यह एक नई शुरुआत थी, एक अधूरे प्रेम को पूरा करने का वादा। हम दोनों जानते थे कि यह सिर्फ़ पहला कदम था, और अभी तो हमें इस दोबारा मिले प्यार के कई और रंग देखने बाकी थे।
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