उसके होंठ जैसे ही मेरे होंठों से टकराए, सालों पुराना इंतज़ार पलभर में खत्म हो गया। रोहित के शहर के अपार्टमेंट में प्रिया का आना किसी भूखे शेर के मांद में हिरनी के आने जैसा था, पर इस बार हिरनी भी उतनी ही बेताब थी। उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी, वही शैतानी मुस्कान, जिसने कभी मेरे दिल को चुराया था। आज, वह वापस मेरी बाहों में थी, और यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, यह **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** का वो बेकाबू अहसास था, जो मेरी रगों में खून बनकर दौड़ रहा था।
“रोहित,” उसने फुसफुसाया, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर गरमाहट घोल रही थीं। “मैंने तुम्हें कितना याद किया।”
उसकी आवाज़ में वही नशा था जो मुझे हमेशा अपनी ओर खींचता था। मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए रेशमी साड़ी के पल्लू में उलझ गए। प्रिया के हाथ मेरी गर्दन के चारों ओर कस गए, और उसने मुझे और करीब खींच लिया। हमारे जिस्मों के बीच की मामूली दूरी भी अब बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उसकी हल्की-सी खुशबू, जो उसके शरीर से रिस रही थी, मेरे नथुनों में भर गई और मुझे मदहोश करने लगी।
बातें करते-करते हाथ कब एक-दूसरे की तरफ बढ़े, पता ही न चला। मेरे होंठ उसके गले पर उतर गए, हर इंच पर गर्मजोशी से चूमते हुए, उसके जिस्म पर अपनी मुहर लगाते हुए। प्रिया के गले से एक मधुर आह निकली, और उसने अपना सिर पीछे लुढ़का दिया, जैसे मुझे पूरी छूट दे रही हो। मेरी उंगलियाँ उसकी साड़ी के किनारों से खेलती हुई उसकी चिकनी कमर पर फैल गईं। उसकी हर साँस, हर धड़कन मुझे बता रही थी कि वह भी उतनी ही बेचैन थी।
धीरे-धीरे, एक-एक कर उसके कपड़ों के धागे मुझसे अलग होते गए। उसकी रेशमी साड़ी फर्श पर ढीले-ढाले ढेर में सिमट गई, फिर ब्लाउज और पेटीकोट। हर धागे के साथ मेरी बेचैनी और मेरा जुनून बढ़ता गया। जब उसकी ब्रा का फीता खुलने पर उसके दो पुष्ट, गोल स्तन मेरी आँखों के सामने आए, तो मेरी साँसें मानो थम सी गईं। गुलाबी निप्पल उत्तेजना से तनकर खड़े थे, जैसे मुझे अपनी ओर बुला रहे हों। मैंने झुककर उनके सिरों को अपनी ज़बान से छुआ, और प्रिया की जुबान से एक लंबी, गहरी कराह निकली, जो मेरे कानों में संगीत सी गूंज गई।
हम दोनों अब सिर्फ अंतर्वस्त्रों में थे, और फिर वे भी उतर गए। हमारी आँखें एक-दूसरे में झाँक रही थीं, और उनमें शर्म नहीं, बल्कि गहरा प्यार और हवस का तूफान उमड़ रहा था। उसका निर्वस्त्र जिस्म मेरे सामने था, पूरी तरह से मेरे लिए खुला हुआ, वही जिस्म जिसकी हर बनावट, हर मोड़ मुझे याद था। मेरे हाथ उसकी जांघों पर फिरे, फिर उसकी योनि की ओर बढ़े, जो अब गीली और लालसा से भरी हुई थी। उसने अपनी टाँगें फैला दीं, जैसे मुझे अंदर आने का निमंत्रण दे रही हो।
मैं उसे उठाकर बेडरूम तक ले गया, जहाँ हमारे लिए प्यार का एक नया अध्याय इंतजार कर रहा था। प्रिया को बिस्तर पर लिटाकर, मैंने उसके ऊपर खुद को टिका दिया। मेरे पुरुषत्व का प्रतीक उसके स्त्रीत्व के द्वार पर दस्तक दे रहा था, बेताब, आतुर। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं, और उसने अपनी कमर ऊपर उठाई। एक गहरी साँस के साथ, मैंने खुद को उसमें उतार दिया। उसकी गर्मजोशी और कसावट ने मुझे स्वर्ग का अनुभव कराया। एक बार फिर, हम एक-दूसरे में पूरी तरह से विलीन हो चुके थे। उसकी हर आह, हर कराहट मुझे याद दिला रही थी कि **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** का जुनून कितना गहरा और नशीला हो सकता है।
हमारा मिलन सिर्फ जिस्मों का नहीं, रूहों का था। हर धड़कन एक-दूसरे में समा रही थी, हर साँस एक-दूसरे की गवाही दे रही थी। कमरा हमारी आहों और फुसफुसाहटों से भर गया था, जो धीरे-धीरे एक तीव्र ताल में बदल गईं। मैंने अपनी गति बढ़ाई, और प्रिया ने भी मेरा साथ दिया, उसकी हथेलियाँ मेरी पीठ पर कस गईं, उसके नाखूनों ने मेरी त्वचा पर निशान बनाए। हम दोनों एक साथ उस परमानंद के शिखर पर पहुँचे, जहाँ दुनिया की सारी चिंताएँ मिट जाती हैं, जहाँ सिर्फ दो जिस्मों का मिलन ही सत्य होता है।
जब सब कुछ शांत हुआ, तो हम एक-दूसरे में सिमटे रहे, बाहर की दुनिया से बेखबर। उसकी हथेलियाँ मेरे सीने पर टिकी थीं, और उसका सिर मेरी छाती पर। यह रात सिर्फ एक शुरुआत थी, उस अंतहीन सफर की जहां **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** की कहानियाँ लिखी जाती हैं, कहानियाँ जो कभी खत्म नहीं होतीं, बस और गहरी होती चली जाती हैं। मैंने उसके माथे पर एक प्यार भरा चुम्बन दिया, और उसने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में संतुष्टि और भविष्य की उम्मीद साफ झलक रही थी।
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