सर्द हवा का वो झोंका नहीं, प्रिया की मदहोश कर देने वाली खुशबू थी जिसने राहुल को बरसों बाद फिर से थर्रा दिया। दिल्ली के चांदनी चौक की भीड़ में भी उसकी नज़रें सीधे प्रिया पर जा टिकीं। वही काली आँखें, वही शरारती मुस्कान और वो लहरदार केश जो कभी राहुल की उंगलियों में सिमट जाते थे। समय भले ही गुज़रा हो, प्रिया की काया में एक नई, और भी मादक गरिमा आ गई थी। गुलाबी साड़ी में लिपटी उसकी देह किसी कामुक देवी-सी लग रही थी। राहुल के दिल में दबी हुई आग फिर से सुलग उठी। जब राहुल ने प्रिया को देखा, उसे लगा कि **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** की कहानियाँ सिर्फ़ किताबों में नहीं होतीं, बल्कि सच भी होती हैं।
दोनों की आँखें मिलीं और समय जैसे थम-सा गया। एक पल की झिझक के बाद प्रिया की मुस्कान और गहरी हुई। ‘राहुल, तुम!’ उसकी आवाज़ में एक अनजानी सी कशिश थी। पुरानी यादें किसी ज्वार-भाटे की तरह उमड़ पड़ीं। उन्होंने एक-दूसरे का हालचाल पूछा, अपनी ज़िंदगियों के बीते पन्नों को पलटा और फिर उसी पुराने कैफे में मिलने का वादा किया जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
अगले दिन, कैफे में प्रिया बैठी थी, आज उसने एक गहरा नीला सूट पहना था जो उसकी देह की वक्रता को और उभार रहा था। राहुल उसे देखकर एक बार फिर मदहोश हो गया। घंटों की बातें, हँसी-ठिठोली और फिर वही पुरानी शरारती आँखें। प्रिया ने राहुल के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, ‘आज रात… मेरे यहाँ?’ राहुल के शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। प्रिया की आँखों में वही शरारत और देह में वही नशा था जिसने राहुल को एक बार फिर इस **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** के ख़तरनाक खेल में खींच लिया था।
रात के सन्नाटे में प्रिया के अपार्टमेंट का दरवाज़ा खुला। भीतर एक मद्धम रोशनी थी, जिसने माहौल को और भी अंतरंग बना दिया था। प्रिया ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और राहुल की ओर मुड़ी। उनकी आँखें मिलीं और फिर कोई शब्द नहीं था, बस देह की भाषा थी। राहुल ने धीरे से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके नर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक लंबा, गहरा चुंबन जो वर्षों की प्यास को बुझाने लगा था।
चुंबन गहरा होता गया, दोनों की साँसें एक-दूसरे में घुलने लगीं। राहुल के हाथ प्रिया की कमर पर गए और उसने उसे अपनी ओर खींच लिया। प्रिया की उंगलियाँ राहुल के बालों में उलझ गईं, उसकी ज़ुबान राहुल की ज़ुबान का स्वाद चख रही थी। धीरे-धीरे चुंबन गर्दन तक उतर आया, जहाँ राहुल ने अपनी नम्र ज़ुबान से एक सिहरन पैदा की। प्रिया की हल्की आह उसके होंठों से निकली। ‘राहुल…’ उसकी आवाज़ कामुकता से भरी थी।
राहुल के हाथ प्रिया के सूट के बटनों पर गए। एक-एक करके बटन खुलते गए और फिर सूट नीचे ज़मीन पर आ गिरा। उसके भीतर एक रेशमी ब्रा और पैंटी थी जो प्रिया के सुडौल जिस्म को मुश्किल से ढक पा रही थी। राहुल की आँखें उसकी भरी हुई छाती पर जा टिकीं। प्रिया शर्माई नहीं, बल्कि और उत्तेजित होकर उसकी ओर देखी। उसने अपने हाथ राहुल की शर्ट पर रखे और उसे भी उतार फेंका। दोनों की गर्म देह अब एक-दूसरे के बेहद करीब थी।
राहुल ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसे बेडरूम की ओर ले गया। कमरे में धीमी संगीत की धुन बज रही थी। उसने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया और फिर उसके ऊपर झुक गया। राहुल ने उसकी ब्रा को खोला और उसके भरे हुए स्तनों को आज़ाद कर दिया। गुलाबी निप्पलें हवा में कठोर हो चुकी थीं। राहुल ने धीरे से एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद की मिली-जुली आवाज़ें निकल रही थीं। ‘आह… राहुल… और…’।
राहुल के हाथ उसकी जांघों पर फिरे, पैंटी को उसने धीरे से नीचे सरका दिया। प्रिया की योनि अब पूरी तरह से नंगी और कामुकता से भीगी हुई थी। राहुल ने अपनी उंगलियों से उसे सहलाया, प्रिया की देह में एक अजीब-सी सिहरन दौड़ गई। वह बेचैनी से तड़पने लगी। राहुल ने अपनी जीभ से उसकी कामुकता का स्वाद चखा, प्रिया के मुँह से तेज़ सिसकियाँ निकलने लगीं। ‘उम्म… राहुल… बस अब और नहीं… अंदर आओ… मुझे भर दो…’।
राहुल ने खुद को प्रिया के ऊपर जमाया। उनके जिस्मों की गर्मी एक-दूसरे को महसूस कर रही थी। उसने धीरे से अपनी लिंग को उसकी प्यासी योनि के मुख पर रखा और एक ही धक्के में उसे भीतर उतार दिया। ‘आह… उम्म…’ प्रिया की चीख उसके होंठों से निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं, बेतहाशा आनंद की चीख थी। राहुल धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाने लगा। दोनों के जिस्म एक लय में हिल रहे थे, त्वचा से त्वचा की रगड़ एक कामुक ध्वनि पैदा कर रही थी।
तेज़ होती साँसें, बेकाबू होती आहें, और हर धक्के के साथ एक गहरा आनंद। दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे। उनकी देह का मिलन सिर्फ़ शारीरिक नहीं था, यह वर्षों के बिछोह और फिर से पनपी चाहत का इज़हार था, एक ऐसी कहानी जहाँ **पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी** ने उन्हें पूरी तरह जकड़ लिया था। राहुल ने अपनी गति और तेज़ कर दी, प्रिया भी अपनी कमर उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी। ‘आह… हाँ… और… और तेज़… मैं… आ रही हूँ…’ प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके नाखून राहुल की पीठ पर गढ़ गए। कुछ ही पल में, दोनों एक साथ चरम सुख के अथाह सागर में डूब गए। उनकी देह अकड़ गई, और फिर एक गहरी संतुष्टि से शिथिल हो गई।
दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे, जिस्मों की गर्मी और साँसों की तपन से भरा वो कमरा एक नए, अनकहे वादे का गवाह बन गया था। रात अभी जवान थी, और उनके बीच की आग अभी बुझी नहीं थी। यह तो बस एक नई शुरुआत थी, एक पुरानी लौंडिया से फिर गरम रातों के संगम की।
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