पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क: बेकाबू चाहत का पुनः मिलन

कमरे में फैली मंद रौशनी ने प्रिया के उभरे हुए वक्षों पर एक सुनहरी चमक बिखेर दी थी, जो आकाश के भीतर बरसों से सुलग रही आग को फिर से भड़का गई। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और आँखों में वही पुरानी, जानी-पहचानी भूख तैर रही थी। “तुम… यहाँ…” आकाश ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, जैसे उसे अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं हो रहा था। प्रिया ने धीरे से अपने होंठों पर उँगली रखी, फिर धीरे-धीरे कमरे का दरवाज़ा बंद किया और उसकी ओर बढ़ी, उसकी चाल में एक अजीब सी मादकता थी, जो आकाश को अपनी ओर खींच रही थी।

“इंतज़ार करवा दिया ना?” प्रिया फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में शहद घुला था, जो सीधे आकाश के रोंगटे खड़े कर गया। वो बिना कुछ कहे बस उसे देखता रहा, उसकी आँखों में अपने लिए वही असीम चाहत देखकर। प्रिया ने आगे बढ़कर अपने नर्म हाथ आकाश के गालों पर रखे, उसका स्पर्श बिजली की तरह आकाश के शरीर में दौड़ गया। फिर उसने अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन से नीचे उतारीं, शर्ट के कॉलर पर। आकाश ने सहजता से अपनी आँखें बंद कर लीं, उस स्पर्श का आनंद लेते हुए। “पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी में सिर्फ कहानियों में होता है, मैंने सोचा था…” आकाश ने कहते-कहते अपनी आँखें खोलीं, उसकी आँखों में वासना और विश्वास का मेल था।

प्रिया ने उसकी बात काटते हुए उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह बरसों की प्यास, बरसों का इंतज़ार था जो एक पल में टूट पड़ा था। उनके होंठ एक-दूसरे में ऐसे उलझे जैसे कभी अलग हुए ही न हों। प्रिया की जीभ आकाश के मुँह के अंदर गहराई तक उतर गई, हर कोने को टटोलती हुई, जैसे अपनी पुरानी जगह को पहचान रही हो। आकाश ने भी उतनी ही शिद्दत से जवाब दिया, उसके हाथों ने प्रिया की कमर को अपनी मज़बूत पकड़ में ले लिया और उसे अपने और करीब खींच लिया। उनके शरीर के बीच अब कोई फ़ासला नहीं था, कपड़े बस एक पतली परत थे जो उनकी जलती हुई त्वचा के बीच आड़े आ रहे थे।

प्रिया ने खुद को थोड़ा पीछे खींचा, उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। उसकी आँखें आकाश की आँखों में गहराई तक झाँक रही थीं। “आज हम सब कुछ भुलाना चाहते हैं, है ना?” प्रिया ने धीरे से कहा, उसके हाथ आकाश की शर्ट के बटन खोलने लगे थे। आकाश ने सहमति में सिर हिलाया, उसकी जीभ उसकी प्यासी होंठों पर फिर गई। प्रिया ने एक-एक करके उसके सारे बटन खोले, फिर उसकी शर्ट को कंधे से खिसकाकर ज़मीन पर गिरा दिया। आकाश ने भी यही किया, उसके हाथ प्रिया के टॉप की ज़िप पर गए और एक झटके में उसे नीचे सरका दिया। प्रिया की ब्रा में क़ैद उसकी छातियाँ अब हवा में आज़ाद होने को बेताब थीं। आकाश ने एक धीमे, सधे हुए अंदाज़ में उसकी ब्रा का हुक खोला, और जैसे ही वो खुली, प्रिया के उभरे हुए, कसे हुए वक्ष उसकी आँखों के सामने आ गए। आकाश की आँखों में वासना की चमक और बढ़ गई।

“तुम आज भी उतनी ही खूबसूरत हो,” आकाश ने काँपती आवाज़ में कहा, और उसके गुलाबी निप्पल्स पर अपनी उँगलियाँ फेरने लगा। प्रिया के मुँह से एक धीमी आह निकली, उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर पीछे झुका लिया। आकाश ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी पी रहा हो। प्रिया के पैरों से जान निकलती जा रही थी, उसके हाथों ने आकाश के बालों को कसकर पकड़ लिया। आकाश ने बारी-बारी से दोनों निप्पल्स को चूसा, उन्हें सहलाया, और प्रिया को हर नए स्पर्श से और उत्तेजित करता गया।

कपड़ों का ढेर अब उनके पैरों के पास पड़ा था, और वे दोनों एक-दूसरे के नग्न शरीर में ऐसे समा गए थे, जैसे दो आत्माएँ एक-दूसरे से मिलने को बेचैन हों। आकाश ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसे बेडरूम की ओर ले चला। नर्म बिस्तर पर लेटाकर उसने प्रिया के पैरों को फैलाया और धीरे-धीरे उसके अंदर उतरने लगा। प्रिया के मुँह से एक तीव्र चीख़ निकली, जो पल भर में आनंदमयी सिसकियों में बदल गई। “आह… आकाश… बहुत याद किया था इसे…” प्रिया ने बड़बड़ाया, उसकी आँखों से खुशी के आँसू छलक रहे थे।

आकाश ने एक लय में गति पकड़ ली, और दोनों शरीर एक-दूसरे में पूरी तरह से खो गए। बिस्तर की चरमराहट, उनके जिस्मों की थपकियों की आवाज़ और उनकी कामुक आहें कमरे में गूँज उठीं। हर धक्के के साथ, हर स्पर्श के साथ, उनकी पुरानी यादें ताज़ा हो रही थीं, और उनके बीच का प्यार और वासना और गहरा होता जा रहा था। “यह है पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी में,” आकाश ने उसके कान में फुसफुसाया, और एक गहरे धक्के के साथ प्रिया के अंदर अपने चरम पर पहुँच गया। प्रिया ने भी खुद को पूरी तरह से आकाश के हवाले कर दिया और एक ज़ोरदार चीख के साथ उसके साथ ही चरम-सुख की गहराई में डूब गई। दोनों एक-दूसरे की बाहों में निढाल पड़े थे, उनके शरीर पसीने से भीगे हुए थे, लेकिन उनके दिल पूरी तरह से तृप्त और शांत थे। एक नई शुरुआत का मीठा एहसास उनके पूरे वजूद में फैल गया था।

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