उस दोपहर, जब सूरज आग उगल रहा था और शहर की गलियाँ सुनसान थीं, राधिका की देह अर्जुन की याद में पिघल रही थी। उसकी साँसों में एक अजीब सी बेचैनी थी, जो सिर्फ अर्जुन की मौजूदगी से ही शांत हो सकती थी। खिड़की से आती गर्म हवा उसके तन को छूकर निकल रही थी, पर उसके अंदर की आग को और भड़का रही थी। दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई और राधिका के दिल ने अपनी धड़कनें तेज़ कर लीं। वह जानती थी, यह वही था।
“अर्जुन!” राधिका के होंठों से फुसफुसाहट निकली और उसने दरवाज़ा खोला। सामने अर्जुन खड़ा था, उसकी आँखें राधिका की आँखों से मिलीं और एक पल को दुनिया थम सी गई। उसकी आँखों में एक-दूसरे के लिए जो प्यास थी, वह किसी भी आम प्रेम कहानी से कहीं ऊपर थी। यह सचमुच एक **प्यार में पागल कर देने वाली कहानी** का आगाज़ था। बिना एक भी शब्द कहे, अर्जुन ने राधिका को अपनी बाहों में भर लिया, उसके नन्हे से बदन को अपने मजबूत जिस्म से जकड़ लिया। राधिका ने अपनी गर्दन उसके कंधे पर टिका दी और उसकी साँसों की गरमाहट महसूस की।
उनकी साँसें एक-दूसरे में घुलने लगीं, जैसे दो प्यासे बादल एक-दूसरे से मिलने को आतुर हों। अर्जुन के हाथ राधिका की कमर पर फिसले, धीरे-धीरे उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाते हुए। साड़ी का रेशमी कपड़ा ज़मीन पर गिरा और उसके साथ ही राधिका के सारे बंधन भी। अर्जुन ने उसके होंठों पर हमला किया, एक लंबी, गहरी, मादक चूम, जिसमें सदियों की प्यास छिपी थी। राधिका ने भी उतनी ही शिद्दत से उसका साथ दिया, उसके होंठों को चूसते हुए, अपनी जीभ को उसकी जीभ से भिड़ाते हुए।
“मेरी राधिका,” अर्जुन की आवाज़ मोटी हो गई थी, “तुम आज मुझे मार डालोगी।” राधिका हँस पड़ी, एक शरारती, कामुक हँसी। अर्जुन के हाथ अब उसके बदन पर आज़ादी से घूम रहे थे, कभी उसकी पीठ सहलाते, कभी उसकी ब्रा के हुक टटोलते। उसने राधिका को धीरे से उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। राधिका की आँखें मदहोशी में बंद हो गईं, जब उसने महसूस किया कि अर्जुन ने उसकी ब्रा और फिर पैंटी भी उतार दी है। वह अब उसके सामने पूरी तरह नग्न थी, उसकी गोरी त्वचा अर्जुन की आँखों में चमक रही थी।
अर्जुन की आँखें राधिका के हर वक्र, हर उभार पर थमीं। उसने धीरे से झुककर राधिका के स्तनों पर अपने होंठ रख दिए। राधिका की एक आह निकल पड़ी, जब अर्जुन ने उसके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। उसकी जीभ की हर हरकत राधिका के पेट में एक मीठी, सिहरन पैदा कर रही थी। वह अपनी कमर ऊपर उठाती, अर्जुन को और गहराई से खुद में समेटने की कोशिश करती। अर्जुन के हाथ धीरे-धीरे उसकी जांघों के बीच पहुँच गए, उसकी गर्म, गीली त्वचा को सहलाते हुए। राधिका ने अपनी टाँगें फैला दीं, जैसे उसे आमंत्रित कर रही हो।
अर्जुन ने अपनी एक उंगली से उसके अंतरंग भाग को धीरे से छुआ, राधिका की देह बिजली की तरंगों से काँप उठी। “अर्जुन…” उसकी आवाज़ लगभग टूटी हुई थी। अर्जुन ने अपनी उंगलियों से उस कोमल जगह को सहलाना शुरू किया, कभी गोल-गोल घुमाते हुए, कभी धीरे से अंदर-बाहर करते हुए। राधिका के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। उसकी पूरी देह एक अनजानी आग में झुलस रही थी, जो सिर्फ अर्जुन ही बुझा सकता था। अर्जुन का हर स्पर्श, उसकी हर आह, राधिका को एक ऐसे संसार में ले जा रही थी, जहाँ होश की कोई जगह न थी। यह वही थी, **प्यार में पागल कर देने वाली कहानी**, जिसका वह हमेशा से इंतज़ार कर रही थी।
जब राधिका की देह पूरी तरह से तड़पने लगी, अर्जुन ने खुद को उसके ऊपर स्थिर किया। उसकी आँखें राधिका की आँखों में मिलीं और एक पल को दोनों की आत्माएँ एक हो गईं। उसने धीरे-धीरे खुद को राधिका के भीतर उतारा। राधिका ने एक गहरी साँस ली, दर्द और परम सुख का एक अनूठा मिश्रण। धीरे-धीरे, अर्जुन की हर धमक राधिका की धड़कन से मिल गई। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों, उनकी आहों और उनके शरीर के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। उनका प्रेम, उनकी वासना, एक-दूसरे में पूरी तरह से विलीन हो गई थी।
उनकी गति तेज़ होती गई, और हर झटके के साथ, राधिका और अर्जुन एक-दूसरे में और गहरे समाते जा रहे थे। जब वह चरम पर पहुँचे, तो राधिका ने अर्जुन को अपनी पूरी शक्ति से जकड़ लिया, उसकी पीठ पर अपने नाखूनों के निशान छोड़ दिए। एक चीख उसके गले से निकली और उसकी देह ऐंठ गई। अर्जुन ने भी अपने पूरे वजूद को राधिका के भीतर उड़ेल दिया, एक गहरी गरमाहट के साथ। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुल गईं, और उस शांत कमरे में, उन्होंने अपने प्रेम की एक और अमर गाथा लिख दी थी, जो हमेशा उन्हें **प्यार में पागल कर देने वाली कहानी** की याद दिलाएगी। उनकी देह शांत हो गई थी, पर आत्माएँ एक-दूसरे में हमेशा के लिए गुँथी हुई महसूस कर रही थीं। संतुष्टि और प्रेम की एक गहरी भावना उनके रोम-रोम में समा गई थी।
Leave a Reply