उस रात चांद की चांदनी जितनी शीतल थी, प्रिया की आँखों में उतनी ही ज्वाला थी – एक ऐसी ज्वाला जो मेरी रातों की नींद हराम कर चुकी थी। हमारी बालकनियाँ इतनी पास थीं कि अक्सर हमारी आँखें मिल जातीं, और हर बार प्रिया की गुलाबी मुस्कान मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल पैदा कर जाती। मैं राहुल, अपनी पड़ोसन प्रिया के नशीले रूप-रंग पर कब अपना दिल हार बैठा, पता ही न चला। उसकी काली, गहरी आँखें, भरी हुई बाँहें और साड़ी में लिपटा उसका सुडौल बदन… आह! हर दिन उसे देखकर मेरे अंदर एक अनकही प्यास जाग उठती।
एक रात, देर रात, जब पूरी बस्ती गहरी नींद में थी, मैं अपनी बालकनी में खड़ा था। हल्की हवा चल रही थी और तभी मैंने देखा, प्रिया भी अपनी बालकनी में खड़ी थी, अपनी छत की मुंडेर पर झुकी हुई। उसके खुले बाल हवा में लहरा रहे थे और उसने एक पतली सी साड़ी पहन रखी थी, जो रात की ठंडक में भी उसके शरीर की गरमाहट को छुपा नहीं पा रही थी। हमारी आँखें मिलीं, और इस बार कोई मुस्कान नहीं थी, बस एक गहरी, मूक पुकार थी। उसने धीरे से हाथ से इशारा किया – ‘मेरे घर आओ’। मेरा दिल धक-धक करने लगा। क्या मेरी पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी सच में शुरू होने वाली थी?
मैं बिना कोई आवाज़ किए अपने घर का दरवाज़ा खोला, नीचे उतरा और प्रिया के घर की ओर बढ़ गया। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। मैंने धड़कते दिल से अंदर कदम रखा। घर में धीमी सी खुशबू थी – उसके शरीर की, गुलाब और रात रानी की मिली-जुली सी। प्रिया बेडरूम के दरवाज़े पर खड़ी थी, इंतज़ार कर रही थी। जैसे ही मैंने अंदर कदम रखा, उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और बिना कुछ कहे मेरी बाहों में समा गई।
उसका जिस्म मेरी बाहों में आते ही मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। मैंने कसकर उसे अपनी बाहों में भींच लिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और मैंने महसूस किया कि उसके स्तन मेरी छाती से टकरा रहे थे, उनमें एक अनकही गर्मी थी। मैं उसके माथे को चूमा, फिर उसकी आँखों को, और फिर धीरे-धीरे उसके गुलाबी, रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई सामान्य चुंबन नहीं था; यह प्यास का चुंबन था, वर्षों की दबी इच्छाओं का चुंबन।
हमारे होंठ एक-दूसरे से चिपक गए, और हमारी जीभ एक-दूसरे में उलझ गईं, एक-दूसरे के मीठे रस को चखने लगीं। प्रिया ने अपने हाथ मेरे बालों में फँसा लिए और अपनी कमर को मेरे शरीर से सटाकर एक गहरी आह भरी। मैंने धीरे से अपने हाथ उसकी कमर पर फिराए, उसकी साड़ी की नरम रेशमी परत को महसूस करते हुए। फिर मेरी उंगलियाँ धीरे-धीरे उसकी साड़ी के पल्लू में घुस गईं और मैंने धीरे से उसे उसके कंधे से सरका दिया। साड़ी नीचे फर्श पर गिर गई, उसके सुडौल बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट रह गया था। मेरा नशा अब सातवें आसमान पर था।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी आँखों में चमक थी, जो स्पष्ट रूप से कह रही थी कि वह भी इस पल का कितना इंतज़ार कर रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले, और उसके उरोजों को मुक्त कर दिया। आह, वे कितने नरम, कितने भरे हुए थे! मैंने अपने होंठ उसके एक उरोज पर रखे और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। प्रिया ने एक गहरी सिसकी भरी और अपनी कमर को ऊपर उठा दिया। मेरे हाथ उसके पेटीकोट के नाड़े को ढूँढ़ रहे थे, और कुछ ही पल में वह भी उसके जिस्म से अलग होकर ज़मीन पर पड़ा था।
अब वह पूरी तरह नग्न मेरे सामने थी। उसका गोरा, चिकना बदन, हर वक्र, हर उभार मेरे लिए एक न्योता था। मैंने उसके ऊपर झुककर उसके पूरे जिस्म पर चुंबन की बरसात कर दी – उसके पेट पर, उसकी जांघों पर, हर जगह। वह मदहोशी में काँप रही थी, मेरे स्पर्श से उसका जिस्म आग की तरह दहक रहा था। “राहुल… अब और नहीं रुका जाता,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मैं अपने कपड़े उतारे और उसके पास लेट गया। हमारे नग्न जिस्म एक-दूसरे से सट गए, आग और गर्मी का एक नया संगम। मैंने धीरे से अपनी उंगलियाँ उसकी नर्म, नम जगह पर फेरी। वह सिसक उठी, उसकी आँखें बंद थीं, और उसके चेहरे पर परमानंद का भाव था। मैंने अपने लिंग को धीरे से उसके द्वार पर रखा, और एक झटके में अंदर प्रवेश कर गया। प्रिया ने एक तेज़ चीख निकाली, जो उसके तकिए में दब गई।
हमने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया, और हमारे शरीर एक लय में चलने लगे। हर धक्के के साथ, एक नई लहर दौड़ती, एक नई ऊँचाई छूती। कमरे में केवल हमारे जिस्मों के टकराने की आवाज़ें, प्रिया की मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ और मेरी गहरी साँसें थीं। मेरी पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी अब अपने चरम पर थी। यह एहसास स्वर्ग से भी बढ़कर था – एक साथ इतनी निकटता, इतना जुनून, इतना प्यार। अंततः, हम दोनों एक साथ अपनी चरमोत्कर्ष पर पहुँचे, एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, पसीने से भीगे हुए।
हमारी साँसें जब सामान्य हुईं, तो हमने एक-दूसरे की आँखों में देखा। उन आँखों में अब कोई ज्वाला नहीं थी, बल्कि एक गहरी संतुष्टि और प्यार था। प्रिया ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और मेरे होंठों पर एक हल्का सा चुंबन दिया। “यह हमारा राज़ रहेगा, राहुल,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। “हमारी पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी।” मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा और उसे अपनी बाँहों में भर लिया, जानता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी, हमारे गुप्त प्रेम के कई और मदहोश कर देने वाले पल अभी आने बाकी थे।
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