उसकी साड़ी का पल्लू जब भी हवा में लहराता, मेरी साँसें अटक जातीं, और मन में एक अजीब सी आग सुलग उठती। राहुल अपनी बालकनी में खड़ा था, सामने वाली बालकनी में प्रिया, उसकी नई पड़ोसिन, गीले बाल सुखा रही थी। आज उसने सफेद रंग की पतली साड़ी पहनी थी, जिसमें से उसकी गुलाबी ब्रा की हल्की झलक साफ दिख रही थी। राहुल ने कई दिनों से इस लड़की पर नज़र रखी थी और आज उसकी देह की वो मादक सुगंध पहली बार इतनी करीब महसूस हुई कि उससे रहा नहीं गया। यह तो बस शुरुआत थी, उस अनदेखे, अनकहे पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी की कहानी की, जो अब हर रात उसके सपनों में घर कर रही थी।
एक शाम बिजली चली गई। पूरा मोहल्ला अँधेरे में डूबा था। राहुल मोमबत्ती जलाने अपने कमरे में गया, तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। “कौन?” उसने पूछा। बाहर प्रिया खड़ी थी, हाथ में एक खाली माचिस की डिब्बी लिए। “राहुल जी, माचिस होगी आपके पास? मेरे पास नहीं है।” उसकी आवाज़ में एक हल्की सी घबराहट थी, और अँधेरे में भी राहुल को उसकी आँखें चमकती हुई महसूस हुईं। उसने उसे अंदर आने का इशारा किया। कमरे में घुप्प अँधेरा था, बस बाहर से आती हल्की सी चाँदनी ही सहारा थी। राहुल माचिस ढूंढ रहा था, तभी प्रिया उसके बिल्कुल करीब आ गई। उसकी सांसों की गर्म हवा राहुल की गर्दन पर महसूस हुई। “मिल गई?” उसने धीमी, कानाफूसी करती आवाज़ में पूछा।
राहुल को माचिस मिल गई, पर अब उसका हाथ किसी और ही चीज़ को ढूंढ रहा था। उसने मुड़कर प्रिया का हाथ थाम लिया। उसकी हथेलियाँ पसीने से भीगी थीं, और राहुल को पता था कि यह सिर्फ गर्मी की वजह से नहीं था। उसने प्रिया को अपनी ओर खींचा। उसके जिस्म की गरमाहट राहुल के जिस्म से टकराई। “प्रिया…” राहुल ने फुसफुसाया। प्रिया का सिर उसके सीने पर टिक गया, और उसने धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं। राहुल ने एक हाथ उसकी कमर पर रखा, और दूसरा हाथ उसके कंधे पर से फिसलकर उसकी गर्दन तक पहुँच गया। उसने उसके सूखे होठों को चूम लिया। यह एक मीठा, नमकीन अहसास था, जो सालों की प्यास बुझा रहा था। उनके पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी की पहली चिंगारी आज रात, इस अँधेरे कमरे में, जल उठी थी।
चुंबन गहरा होता गया। राहुल ने प्रिया की साड़ी का पल्लू गिरा दिया, और उसके कोमल कंधे को महसूस किया। उसके गुलाबी ब्लाउज का हुक उसने बड़ी तेज़ी से खोला, और ब्लाउज ज़मीन पर गिर गया। अब प्रिया केवल पेटीकोट और ब्रा में थी। राहुल ने उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में भर लिया। वे इतने नर्म और भरे हुए थे कि राहुल को लगा जैसे स्वर्ग मिल गया हो। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भरा, उसकी निप्पल को चूसने लगा। प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, “आह… राहुल… और… ज़ोर से…”
राहुल ने उसे उठाकर अपने बेड पर लिटा दिया। अब वह पूरी तरह बेकाबू था। उसने अपनी शर्ट उतारी, फिर प्रिया के पेटीकोट का नाड़ा खोला। पेटीकोट भी ज़मीन पर फिसल गया। प्रिया अब पूरी तरह निर्वस्त्र थी, चाँदनी में उसका सुंदर जिस्म चमक रहा था। राहुल ने अपने पैंट भी उतार दिए, और अब दोनों नग्न अवस्था में एक-दूसरे को निहार रहे थे। राहुल ने अपने होंठ उसकी योनि पर रख दिए। प्रिया के पूरे जिस्म में करंट दौड़ गया। वह आहें भरती रही, उसके बालों को कसकर पकड़ लिया। “राहुल… तुम मुझे पागल कर दोगे… प्लीज़…”
राहुल अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। उसने अपनी टांगें खोलीं और प्रिया की टांगों के बीच अपनी जगह बनाई। उसने धीरे-धीरे उसे अपने अंदर उतारा। प्रिया के मुँह से एक तेज़ चीख निकली, फिर वह मीठी आह में बदल गई। “आह… राहुल… कितना गहरा… तुम अंदर हो…” दोनों के जिस्म एक लय में हिलने लगे। राहुल तेज़ी से धक्के दे रहा था, और प्रिया भी अपनी कमर उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी। उनके जिस्मों की रगड़ से एक अजीब सी गरमाहट पैदा हो रही थी, और कमरे में कामुक आवाज़ें गूँज रही थीं। यह उनकी पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी की चरम सीमा थी, एक ऐसा पल जिसमें दुनिया की सारी शर्म, सारी हिचक मिट चुकी थी।
राहुल ने प्रिया को पलटकर उसकी कमर के नीचे तकिया रखा। उसकी पीठ अब राहुल के सीने से लगी थी। राहुल ने पीछे से उसे अपने अंदर उतारा, और प्रिया ने एक गहरी साँस भरी। “यह… यह बहुत अच्छा है… राहुल…” उसने कहा। राहुल ने उसके नितंबों को कसकर पकड़ा और अपनी गति बढ़ाता गया। दोनों पसीना-पसीना हो चुके थे, उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और उनके जिस्म एक-दूसरे में समाए हुए थे। अंततः, एक तीव्र सुख की लहर ने दोनों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। राहुल ने उसके अंदर अपना सारा प्यार उड़ेल दिया, और प्रिया ने भी एक ज़ोरदार चीख के साथ अपना चरम सुख प्राप्त किया।
दोनों थके हुए, पर संतुष्ट, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी, और हवा में एक अजीब सी ताज़गी थी। राहुल ने प्रिया के माथे को चूमा। “यह हमारा राज़ है, प्रिया,” उसने फुसफुसाया। प्रिया ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे पता था कि यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह उनके पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी की एक नई शुरुआत थी, जो अब हर रात उनके इंतज़ार में थी।
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