अंजलि की देह उस भीड़ भरी बस की हर धक्के से थरथरा रही थी, और उसके साथ ही एक अनजानी उत्तेजना भी जाग रही थी। गर्मी और पसीने से चिपचिपी उस शाम में, जब बस एक तीव्र मोड़ पर झुकी, तो एक मज़बूत हाथ उसके कूल्हे से जा टकराया। अंजलि ने साँस रोकी, आँखें उठाईं और पहली बार उसे देखा। विक्रम की आँखों में गहरा आकर्षण और एक शरारती मुस्कान थी।
बस की धधकती सीट पर, उनके शरीर एक-दूसरे के करीब थे। भीड़ के बहाने, विक्रम की उंगलियाँ धीरे से अंजलि की साड़ी के ऊपर से उसकी कमर पर रेंगने लगीं। अंजलि का बदन सिहर उठा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और होंठो पर एक नशीली मुस्कान फैल गई। यह तो *बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार* था, जो सिर्फ आँखों से नहीं, बल्कि बेकाबू स्पर्श से शुरू हुआ था। विक्रम की उंगलियाँ अब उसकी नंगी कमर पर थी, और उसकी गर्म हथेली अंजलि की त्वचा को जला रही थी। अंजलि ने अपनी पीठ थोड़ी और पीछे कर ली, जिससे उसका वक्ष विक्रम की बाँह से टकराया। दोनों की आँखें फिर मिलीं, और इस बार उसमें एक अगम्य निमंत्रण था।
जब बस अपने अंतिम पड़ाव पर रुकी, तो विक्रम ने फुसफुसाते हुए पूछा, “कहाँ उतरना है?” अंजलि के दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी। उसने अनजाने में ही कह दिया, “कहीं नहीं… बस जहाँ आप ले चलें।” विक्रम की आँखों में वासना की आग धधक उठी। उसने अंजलि का हाथ थामा और उसे अपनी बाइक की ओर खींच ले गया। हवा में उनका रोमांस बस की खिड़की से निकलकर आज़ाद हो चुका था।
विक्रम के कमरे में घुसते ही, अंजलि को एक ऐसी गर्मी महसूस हुई जो बाहर की गर्मी से कहीं ज़्यादा तीव्र थी। दरवाज़ा बंद होते ही, विक्रम ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “यह सब उस बस की देन है,” वह फुसफुसाया, “उस भीड़ में, मैंने कभी सोचा नहीं था कि *बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार* इतना गहरा हो सकता है।” अंजलि के होंठ पहले से ही प्यासे थे। उनके मुँह एक-दूसरे से मिले, एक गहरी, बेताब चूमने की आग में जल उठे। विक्रम की जीभ अंजलि के मुँह में उतर गई, हर कोने को टटोलती हुई। अंजलि ने अपनी बाहें उसकी गर्दन में डाल दीं, और खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया।
विक्रम ने उसे गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी उंगलियाँ तेज़ी से अंजलि की साड़ी की गांठें खोलने लगीं, फिर ब्लाउज के बटन। अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके शरीर पर विक्रम का हर स्पर्श एक नई सनसनी जगा रहा था। जब उसकी नग्न देह विक्रम के सामने थी, तो उसने एक आह भरी। विक्रम की आँखें उसकी हर वक्रता पर ठहर गईं, उसके उभरे हुए वक्ष पर, उसकी पतली कमर पर, और उसके पैरों के बीच की उस प्यासी घाटी पर। विक्रम ने उसके गुलाबी निप्पल्स को अपने मुँह में भर लिया, और अंजलि के शरीर में एक मीठी टीस उठ गई। वह मचलने लगी, उसकी साँसें बेकाबू हो गईं।
विक्रम ने अपने कपड़े उतारे और उसके ऊपर आ गया। उसका मज़बूत शरीर अंजलि के नरम बदन से टकराया, और अंजलि की आँखें मदहोशी में बंद हो गईं। विक्रम ने धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को अंजलि की भीगती हुई योनि पर टिकाया। अंजलि ने अपनी कमर उठाई, और विक्रम ने एक ही झटके में खुद को उसके भीतर समा लिया। अंजलि के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत ही एक गहरी सिसकी में बदल गई। विक्रम ने अपनी गति तेज़ की, और अंजलि भी पूरी तरह उसमें लीन हो गई। दोनों के शरीर एक लय में धड़क रहे थे, उनकी साँसें एक-दूसरे में उलझ चुकी थीं। हर धक्के के साथ, उनकी आत्माएं एक हो रही थीं, और चरम सुख की ओर बढ़ रही थीं।
एक तीव्र कंपन ने दोनों को घेर लिया, और वे एक साथ चरम सुख के अथाह सागर में डूब गए। अंजलि ने अपनी आँखें खोलीं और विक्रम को देखा, जो उसके ऊपर पसीने में तरबतर लेटा हुआ था। उसने विक्रम के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि उस भीड़ भरी बस में मेरी ज़िंदगी का सबसे सुंदर अध्याय शुरू होगा।” विक्रम ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया। यह सचमुच *बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार* था, जो अब उनकी ज़िंदगी का सबसे गहरा, सबसे संतुष्टिपूर्ण रिश्ता बन चुका था।
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