उसकी निगाहें जब मेरी आँखों से मिलीं, तो बस स्टॉप की भीड़ भी गायब हो गई, सिर्फ एक अजीब सी गर्मी थी जो मेरे भीतर सुलगने लगी थी। राजेश नाम था उसका, और उस शाम की हल्की बारिश में, बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा मेरे दिल पर हमेशा के लिए अंकित हो गया था। हमने कुछ शब्दों का आदान-प्रदान किया, लेकिन हमारी आँखों की भाषा कुछ और ही कह रही थी। नंबर बदले गए और उसी रात, मैं उसके छोटे से अपार्टमेंट की दहलीज पर खड़ी थी, दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
दरवाजा खुलते ही एक हल्की, मादक सी सुगंध ने मुझे घेर लिया – शायद अगरबत्ती और उसकी मर्दाना खुशबू का मिश्रण। राजेश ने मुझे अंदर खींचा, और बिना एक पल गंवाए, उसके होंठ मेरे होंठों पर टूट पड़े। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह एक लंबे इंतजार की तड़प थी, जिसमें उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझकर एक आग भड़का रही थी। मेरी उंगलियां बेकाबू होकर उसके बालों में फँस गईं, और मैं उसे और करीब खींचने लगी, जैसे हम एक-दूसरे में समा जाना चाहते हों।
उसने धीरे-धीरे मुझे पीछे धकेला, जब तक मेरी पीठ दीवार से ना लग गई। उसके हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी साड़ी पर सरक गए। रेशमी पल्लू एक झटके में नीचे खिसका, और मेरा ब्लाउज उसके हाथों के स्पर्श से और गरमा गया। उसकी उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुकों पर धीरे-धीरे चलीं, और एक-एक करके सारे हुक खुलते चले गए। मेरा जिस्म सिहर उठा जब उसने ब्लाउज को मेरे कंधों से नीचे गिराया और मेरी नग्न कमर पर अपनी हथेली रख दी। उसकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं, जिससे एक तीव्र झनझनाहट मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई।
“तुम बहुत खूबसूरत हो, प्रिया,” उसकी भारी आवाज़ मेरे कानों में गूँजी, और उसके होंठ मेरी गर्दन पर उतर आए, एक नम, कामुक निशान छोड़ते हुए। मैंने आँखें मूंद लीं और खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया। वह मुझे बेडरूम तक ले गया, जहाँ सिर्फ एक मंद सी रोशनी जल रही थी, जो हमारी बढ़ती हुई उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। उसने मेरी साड़ी को धीरे-धीरे मेरे शरीर से अलग किया, हर एक परत के साथ मेरी सांसे तेज होती जा रही थीं। जब मेरी साड़ी ज़मीन पर गिरी, तो मैं सिर्फ एक पेटीकोट और ब्रा में खड़ी थी, मेरा जिस्म उसकी लालसा भरी निगाहों का सामना कर रहा था।
मेरे पेटीकोट का नाड़ा उसने बड़ी फुर्ती से खोला, और वह भी मेरे पैरों के पास आ गिरा। अब मैं सिर्फ अपनी ब्रा में थी। मेरी आँखों में वासना और शर्म का अजीब मिश्रण था, लेकिन राजेश की आँखों में सिर्फ प्यार और गहरी चाहत थी। उसने मुझे बिस्तर पर धकेला और मेरी ब्रा को भी खोल फेंका। मेरे भरे हुए स्तन उसके सामने अनावरत थे, निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। उसने एक पल की भी देरी नहीं की और अपने होंठ मेरे एक स्तन पर रख दिए, उसे चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। मेरी कराहें कमरे में गूँज उठीं। उसने बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूमा, काटा और सहलाया, जिससे मेरा शरीर आग की तरह दहक उठा।
मैंने भी अपने हाथों से उसकी शर्ट के बटन खोले और उसे भी बेताब होकर उतार फेंका। उसकी मजबूत, गठी हुई छाती मेरे सामने थी। मैंने अपने होंठ उसकी छाती पर चलाए, उसके निप्पलों को अपनी ज़ुबान से छुआ, जिससे वह भी गहरा उठा। हमारा मिलन बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा नहीं था, यह तो एक तूफान था, जिसने हमारे भीतर की हर भावना को बाहर खींच लिया था। उसके हाथ मेरी जांघों पर चले गए, मेरी पैंटी के ऊपर से मेरे गीलेपन को महसूस करते हुए। उसकी उंगलियां मेरे गुप्तांगों पर दबाव बनाने लगीं, जिससे मैं और भी बेचैन हो उठी।
उसने खुद को मेरे ऊपर किया और अपने होंठों से मेरे होंठों को फिर से कैद कर लिया। उसकी जीभ मेरी जुबान से फिर उलझ गई, और इस बार, हमारे बीच कोई दूरी नहीं थी। उसने मेरे पैरों को अपने कमर के चारों ओर लपेटा और अपनी पैंट को नीचे खिसका दिया। उसके कठोर, उत्तजित अंग को देखकर मेरी आँखों में एक चमक सी आ गई। उसने धीरे-धीरे मुझे तैयार किया, अपनी उंगलियों से मेरे गीले रास्ते को सहलाया, और फिर एक ही झटके में खुद को मुझमें धकेल दिया।
एक तीखी सी पीड़ा के साथ एक मीठी सी अनुभूति मेरे भीतर फैल गई। मैंने एक तेज आह भरी, और राजेश ने मेरे होंठों को चूसकर मेरी दर्द भरी आवाज़ को दबा दिया। धीरे-धीरे, पीड़ा कम होती गई और उसकी जगह एक अपार सुख ने ले ली। वह लयबद्ध तरीके से गति करने लगा, और मैं भी उसकी हर धुन पर थिरक रही थी। हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे, पसीने से भीग चुके थे, और हर धक्के के साथ एक नई ऊंचाई पर पहुँच रहे थे। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मैं उसके बालों को कसकर पकड़े हुए सिर्फ “और, और…” फुसफुसा रही थी।
“प्रिया,” उसकी आवाज़ भारी और कामुक थी, “यह बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा… हमेशा के लिए रहेगा।” उसकी हर गति और भी तेज़ होती गई, और मेरे भीतर की आग भी बेकाबू हो चुकी थी। एक चरम सुख की लहर मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई, और मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, राजेश के नाम की पुकार मेरे होंठों से अनजाने में निकल गई। वह भी मेरे ठीक बाद ही मेरे भीतर ही पिघल गया, एक गर्म धारा ने मुझे अंदर से भर दिया। हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही पड़े रहे, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए, हमारी धड़कनें एक-दूसरे में मिल चुकी थीं। उस रात, हमने सिर्फ जिस्म नहीं मिलाए थे, हमारी रूहों का भी मिलन हो गया था।
Leave a Reply