नेहा बस स्टॉप पर खड़ी थी, उमस भरी गर्मी और शरीर में उठती अजीब सी बेचैनी उसके अंदर आग लगा रही थी। उसकी हल्की गुलाबी साड़ी उसके जिस्म पर चिपकी थी, पसीना उसकी गर्दन से होता हुआ उसके भरे-भरे स्तनों के बीच समा रहा था, जहाँ उसके ब्लाउज़ की ज़ंजीरें कस कर खिंची हुई थीं। एक अजीब सी तड़प उसके भीतर मचल रही थी, जिसकी वजह वह खुद भी नहीं जानती थी।
तभी रवि वहाँ आया, उसकी आँखें सीधे नेहा पर जा टिकीं। एक पल की ख़ामोशी, फिर रवि की आँखों में वो आमंत्रण दिखा जो नेहा ने कभी सोचा न था। उसकी नज़रें नेहा के होंठों पर ठहरीं, फिर उसके वक्ष से होती हुई उसकी कमर पर फिसल गईं। नेहा के गाल सुर्ख हो गए, लेकिन उसने अपनी नज़रें नहीं हटाईं। *बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा* इतना स्पष्ट, इतना उत्तेजक हो सकता है, उसने कभी सोचा न था। रवि ने एक हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा, “बस लेट है लगता है?”
नेहा ने अपनी नज़रों से जवाब दिया, “मुझे लगता है आज बस की ज़रुरत ही नहीं है।” रवि की आँखें चमक उठीं। उसने अपना हाथ नेहा के हाथ की तरफ़ बढ़ाया, उसकी उँगलियाँ नेहा की कलाई पर सरक गईं। एक बिजली का झटका नेहा के पूरे शरीर में दौड़ गया। “मेरा कमरा यहीं पास ही है,” रवि ने धीमे से कहा, उसकी आवाज़ में एक गहरा वादा था।
बिना एक पल गंवाए, वे रवि के छोटे से कमरे में पहुँच गए। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, सारी झिझक, सारी मर्यादाएँ टूट गईं। रवि ने नेहा को अपनी बाहों में भर लिया, उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। एक लंबा, गहरा चुंबन जो उनकी बेकाबू हवस को आग दे गया। नेहा की जीभ रवि की जीभ से उलझ गई, उनके जिस्म एक-दूसरे से कसकर चिपक गए। रवि के हाथ नेहा की कमर पर घूमते हुए उसके कूल्हों को सहलाने लगे।
रवि ने धीरे से नेहा की साड़ी खोली, उसे ज़मीन पर गिरते हुए देखा। फिर उसने उसके ब्लाउज़ के हुक खोले, नेहा के भरे-भरे स्तन उसकी आँखों के सामने उभर आए, उनके निप्पल कामुकता से कड़े हो चुके थे। रवि ने अपने होंठ नेहा के स्तनों पर रखे, उन्हें चूसना शुरू किया, एक-एक निप्पल को अपनी जीभ से छेड़ता हुआ। नेहा की आहें कमरे में गूँजने लगीं, उसके नाखूनों ने रवि की पीठ को खरोंच डाला। नेहा ने अपनी आँखें बंद कीं, और उसे याद आया वो पल जब *बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा* उसकी धमनियों में आग बनकर दौड़ गया था। उसने भी रवि की शर्ट उतारी, उसकी मजबूत छाती पर हाथ फेरा, उसके हर बाल को अपनी उँगलियों में महसूस करती हुई।
वे एक-दूसरे को पलंग पर ले गए, अब उनके बीच कोई कपड़ा नहीं था। रवि ने नेहा की पेटीकोट और फिर पैंटी भी उतार दी, उसकी गीली योनि का स्पर्श रवि की उँगलियों को महसूस हुआ। नेहा के बदन से एक तीव्र, मादक सुगंध आ रही थी। रवि ने नेहा की टाँगें फैलाईं और बिना किसी देरी के अपने गरम, कड़े लिंग को उसकी योनि में धकेल दिया। नेहा की एक तीखी चीख़ निकली, जो पल भर में सुख की मीठी आह में बदल गई।
उनकी धड़कनें तेज़ हो गईं, साँसें भारी हो चुकी थीं। रवि का हर धक्का नेहा को स्वर्ग की सैर करा रहा था। नेहा ने अपनी कमर उठाई, रवि को और गहरा जाने के लिए उकसाया। उनके जिस्मों का मिलन अब एक जंगली ताल में बदल गया था, हर स्पर्श, हर घर्षण उनकी वासना को और बढ़ा रहा था। नेहा रवि के बालों को कसकर पकड़ रही थी, उसकी आँखें मदहोशी में बंद थीं। कुछ ही देर में, उनकी आहें एक साथ चरम पर पहुँच गईं। उनके जिस्म ढीले पड़ गए, पसीने में तरबतर।
नेहा रवि की बाहों में सिमट गई, उसके दिल को एक अजीब सा सुकून मिला। *बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा* सिर्फ एक इशारा नहीं था, यह एक नए सफर की शुरुआत थी, एक बेपनाह चाहत का ऐलान था जो उनकी रूहों में हमेशा के लिए बस चुका था। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा, अगले पल में और भी बहुत कुछ करने का वादा करते हुए, क्योंकि आज की रात तो अभी शुरू हुई थी।
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