उस दुपहरी की घुटन भरी गर्मी में, जब हवा भी जैसे थम सी गई थी, प्रिया का दुपट्टा उसके कंधे से फिसलकर जरा नीचे सरका और उसकी पीठ का निचला हिस्सा अचानक ही हवा के एक झोंके से सिहर उठा। उसने अनजाने में ही अपनी साड़ी को कसकर पकड़ा, उसकी नज़रें बार-बार बस स्टॉप की ओर उठ रही थीं, जहाँ बस का कोई नामोनिशान नहीं था। तभी उसकी निगाहें सामने खड़ी एक कार के शीशे से मिलीं, जिसमें से एक पुरुष उसे ही देख रहा था। रोहन की नज़रें प्रिया पर टिकी थीं, उसकी साड़ी में लिपटी देह की हर लहर पर, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
प्रिया ने अपनी पलकें झुका लीं, पर उस नज़र की तपिश को अपनी त्वचा पर महसूस कर सकती थी। कुछ देर बाद, रोहन अपनी कार से बाहर निकला और धीरे-धीरे उसके करीब आया। “लगता है बस नहीं आएगी आज,” उसने धीमी, गहरी आवाज़ में कहा, जो प्रिया के कानों में शहद घोल गई। प्रिया ने सहसा ऊपर देखा। “हाँ, लगता तो ऐसा ही है,” उसने जवाब दिया, उसकी आवाज़ में हल्की घबराहट थी। रोहन की आँखों में एक शरारती चमक थी। “मैं उसी तरफ जा रहा हूँ, अगर आप चाहें तो लिफ्ट दे सकता हूँ।” प्रिया ने एक पल सोचा, फिर उसकी आँखों में गहरे उतरते हुए कहा, “चलें।”
बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा इतना साफ और बेबाक था कि प्रिया खुद को रोक नहीं पाई। कार की ठंडी हवा ने उसके बदन को छुआ, पर अंदर उठ रही आग को बुझा न सकी। रोहन के अपार्टमेंट तक का सफर बातचीत में नहीं, बल्कि आँखों के अनकहे संवाद में बीता। उसके फ्लैट का दरवाजा खुलते ही एक हल्की खुशबू ने उसे घेरा, और मद्धम रोशनी में रोहन ने पूछा, “क्या पीना पसंद करेंगी?” प्रिया ने धीरे से कहा, “कुछ भी जो मेरे बदन की इस प्यास को बुझा सके।” रोहन ने एक पल उसे देखा, फिर मुस्कुराते हुए व्हिस्की की बोतल उठाई।
गिलासों की खनक और हल्की बातों के बीच, उनके बीच की दूरी कम होती जा रही थी। रोहन का हाथ पहले धीरे से उसकी जांघ पर टिका, और फिर ऊपर की ओर सरकने लगा। प्रिया ने एक गहरी साँस ली, उसकी आँखों में लालसा साफ झलक रही थी। उसकी उंगलियों ने प्रिया की साड़ी के पल्लू को धीरे से हटाया, और फिर उसके ब्लाउज के हुकों को टटोलने लगा। प्रिया ने खुद को उसके हवाले कर दिया, उसकी देह में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। जैसे ही ब्लाउज खुला, उसके सुर्ख स्तन रोहन की नज़रों के सामने आ गए। रोहन ने एक लम्बी साँस ली और अपने होंठ उसके गर्दन पर टिका दिए। प्रिया की आँखें बंद हो गईं, और उसके मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
रोहन ने उसे बाहों में भरकर सोफे पर लिटा दिया। उसके होंठ प्रिया के होंठों पर ऐसे टूट पड़े जैसे कोई प्यासा सदियों बाद पानी से मिला हो। उनकी जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं, और हाथों ने एक-दूसरे के जिस्मों को टटोलना शुरू कर दिया। प्रिया ने रोहन की शर्ट के बटन खोले और उसकी छाती पर अपने होंठ टिका दिए। उसकी हर साँस, हर स्पर्श में एक आग थी, जो दोनों के शरीरों को तेज़ी से जला रही थी। रोहन ने धीरे-धीरे प्रिया की साड़ी को हटाया, उसके पूरे जिस्म को अपनी नज़रों से निहारते हुए। प्रिया की पैंटी उसके गुप्तांग के उभार पर कसकर चिपकी थी, और रोहन ने उसे धीरे से नीचे सरकाया। प्रिया की आँखों में अब शरम नहीं, सिर्फ वासना थी।
उसने रोहन को अपनी ओर खींचा, और उनके नग्न शरीर एक-दूसरे से चिपक गए। रोहन ने प्रिया के पैरों को फैलाया और धीरे से उसके अंदर समा गया। प्रिया की साँसें तेज हो गईं, और उसने रोहन को कसकर अपनी बाहों में भर लिया। उनकी धड़कनें एक हो गईं, और हर धक्के के साथ उनके शरीर एक-दूसरे में और गहराई तक उतरते चले गए। कमरे में सिर्फ उनकी कामुक साँसों और देह के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। हर स्पर्श, हर चुंबन, और हर गहराई एक-दूसरे में पूरी तरह से घुल जाने की कहानी कह रहा था। प्रिया ने अपनी कमर उठाई और खुद को रोहन में पूरी तरह से समा जाने दिया।
बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा अब एक पूरी रात की तपिश और सुकून में बदल चुका था। जब उनके शरीर शांत हुए, तो दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे थे, उनकी साँसें अभी भी भारी थीं। प्रिया ने रोहन की छाती पर सिर रखा और उसकी धड़कनों को महसूस किया। यह सिर्फ जिस्म का मिलन नहीं था, बल्कि रूहों का वो जुड़ाव था जो उस भीड़ भरे बस स्टॉप पर एक चोरी की निगाह से शुरू हुआ था। उस रात, उन्होंने सिर्फ एक-दूसरे के शरीर को नहीं छुआ था, बल्कि आत्माओं को भी गहरे तक महसूस किया था, और उन्हें पता था कि यह बस एक शुरुआत थी, बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ बन गया था।
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