शाम की धीमी रोशनी में, बस स्टॉप पर खड़ी प्रिया की साड़ी का पल्लू हवा में लहराया, और राहुल की नज़रें बस वहीं अटक गईं। उसकी सांवली रंगत और कसते ब्लाउज से झाँकते अधखुले वक्षों ने राहुल के दिल में कुछ हलचल पैदा कर दी। राहुल भी बस का इंतज़ार कर रहा था, पर उसकी आँखें प्रिया पर से हट ही नहीं पा रही थीं। प्रिया ने महसूस किया कि कोई उसे घूर रहा है। उसने धीरे से नज़रें उठाईं और राहुल से उसकी आँखें मिल गईं। एक पल को दोनों की साँसें थम गईं। राहुल ने एक धीमी, शरारती मुस्कान दी, और प्रिया के गाल हल्के से गुलाबी हो गए। यह बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा था – एक अनकही सहमति, एक अनजाना आमंत्रण।
बस का कोई अता-पता नहीं था। अँधेरा घना हो रहा था। राहुल हिम्मत करके प्रिया के पास आया। “लगता है आज बस नहीं आएगी,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी गर्मजोशी थी। प्रिया ने नज़रें झुका कर जवाब दिया, “मुझे घर जाने में देर हो रही है।” राहुल ने एक पल सोचा और फिर बोला, “मेरा घर यहीं पास में है, अगर आप बुरा न मानें तो मैं आपको छोड़ सकता हूँ। या अगर आप चाहें तो हम थोड़ी देर इंतज़ार कर सकते हैं, शायद कोई ऑटो मिल जाए।” उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जिसे प्रिया पढ़ सकती थी। उसके अंदर की वासना जागृत हो चुकी थी। एक पल के लिए संकोच हुआ, फिर प्रिया ने खुद को उसकी आँखों के जादू में खो जाने दिया। “ठीक है,” उसने धीरे से कहा।
राहुल का फ्लैट ज़्यादा दूर नहीं था। अंदर दाखिल होते ही, शहर का शोर पीछे छूट गया और एक अजीब-सी शांति छा गई, जो उनके भीतर की उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। राहुल ने पानी के लिए पूछा, पर दोनों जानते थे कि उन्हें प्यास पानी की नहीं, बल्कि कुछ और ही चीज़ की थी। वे एक-दूसरे के करीब आए। राहुल ने अपना हाथ धीरे से प्रिया की कमर पर रखा। उसके स्पर्श से प्रिया के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उसने अपना सिर ऊपर उठाया और राहुल ने बिना किसी देरी के उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया। यह एक गर्म, भूखी किस थी, जिसमें दोनों एक-दूसरे को चूसने लगे। प्रिया की उंगलियाँ राहुल के बालों में उलझ गईं, और राहुल के हाथ उसकी कमर से होते हुए उसके स्तनों तक पहुँच गए।
ब्लाउज के ऊपर से ही राहुल ने प्रिया के सुडौल स्तनों को कसकर सहलाना शुरू किया। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने होंठ राहुल से हटाए और कराहते हुए कहा, “राहुल…” राहुल ने उसके माथे, गालों और गर्दन पर अनगिनत चुंबन दिए। उसने धीरे से प्रिया के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक बटन खुलते ही प्रिया का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। जब ब्लाउज खुल गया और उसकी ब्रा भी एक तरफ सरक गई, तो राहुल ने प्रिया के भरे हुए, कड़े स्तनवृंतों को देखा। वह क्षण भर को रुका, फिर लालची निगाहों से उन्हें निहारने लगा। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भरा और ज़ोर से चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पी रहा हो। प्रिया के मुँह से दर्द और सुख से भरी आह निकली।
राहुल के हाथ अब प्रिया की साड़ी को हटाने में व्यस्त थे। साड़ी और पेटीकोट एक तरफ गिरे और प्रिया अब सिर्फ़ गुलाबी पैंटी में खड़ी थी, उसकी जंघाओं के बीच का उभार साफ़ दिख रहा था। राहुल ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ चला। प्रिया ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर कस लीं। बिस्तर पर रखते ही, राहुल ने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी गीली, गुलाबी योनि का प्रवेश द्वार देखा। उसकी उंगलियाँ तुरंत वहीं पहुँच गईं, उसे सहलाने लगीं। प्रिया ने अपनी कमर उठाई, राहुल को और गहरा होने का निमंत्रण देते हुए। “बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा तो सिर्फ़ शुरुआत थी, प्रिया,” राहुल ने फुसफुसाया, और अपने कठोर लिंग को प्रिया की योनि के द्वार पर टिका दिया।
एक धीमी धक्के के साथ, राहुल का लिंग प्रिया के भीतर समा गया। प्रिया की एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत सुख की आह में बदल गई। उसने अपनी टाँगें राहुल की कमर पर और कस लीं। राहुल ने धीमे-धीमे शुरू किया, फिर उसकी गति बढ़ती चली गई। दोनों जिस्म एक-दूसरे में पूरी तरह से खो गए थे। बिस्तर की चरमराहट, उनकी साँसों की आवाज़ और प्रिया की सुख से भरी सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं। हर धक्के के साथ, वे और गहरे डूबते जा रहे थे, वासना की इस असीम गहराई में। प्रिया की योनि राहुल को अंदर तक कस कर जकड़े हुए थी, और राहुल हर धक्के में उसे स्वर्ग का अनुभव करा रहा था। जब दोनों की देह पूरी तरह थक चुकी थीं, और उनका चरम सुख अपने शिखर पर था, तो राहुल ने आखिरी गहरा धक्का दिया और प्रिया के भीतर ही सारा प्यार उड़ेल दिया।
थके हुए, लेकिन एक-दूसरे में सिमटे हुए, प्रिया और राहुल ने एक नए रिश्ते की नींव रख दी थी। उनके जिस्मों का बेताब मिलन उन्हें एक ऐसी दुनिया में ले गया था, जहाँ सिर्फ़ उनका प्यार और उनकी वासना थी। वे जानते थे कि बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा सिर्फ़ एक संयोग नहीं था, बल्कि किस्मत का एक अनमोल तोहफा था, जिसने उन्हें एक-दूसरे से मिलाया था। अब वे बस उस अगली सुबह का इंतज़ार कर रहे थे, जब उनके प्रेम की नई कहानी शुरू होगी।
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