बाहर मूसलाधार बारिश अपने पूरे शबाब पर थी, उसकी हर बूँद धरती को भिगोते हुए एक तीव्र संगीत रच रही थी। प्रिया अपने खिड़की से लगी खड़ी थी, ठंडी हवा के झोंके उसके रेशमी गाउन को उसके शरीर से चिपका रहे थे। उसकी त्वचा पर सिहरन दौड़ रही थी, पर यह सिर्फ ठंड की वजह से नहीं थी। यह रूहान की मौजूदगी का अहसास था, जो उसके पीछे आकर खड़ा हो गया था, उसकी गर्म साँसें प्रिया की गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
“क्या सोच रही हो, मेरी जान?” रूहान की गहरी आवाज़ ने उसके कान में फुसफुसाया, और उसके मजबूत हाथों ने प्रिया की कमर को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी उंगलियाँ रूहान के हाथों पर टिक गईं। “बस यही कि इस तूफानी रात में कुछ तूफानी करने का मन कर रहा है।” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी, एक निमंत्रण था।
रूहान ने उसे धीरे से घुमाया, ताकि वे एक-दूसरे के सामने आ सकें। कमरे में सिर्फ खिड़की से आती बारिश की धुंधली रोशनी और उनके दिलों की धड़कनों की तेज़ आवाज़ थी। उसकी निगाहें प्रिया के होठों पर टिकी थीं, जो अब हल्की सी काँप रही थीं।
“तूफानी?” रूहान मुस्कुराया, और फिर बिना किसी देरी के उसके होठों पर टूट पड़ा। यह एक लंबा, गहरा चुंबन था, जिसमें बारिश की रात का सारा रोमांच समाया हुआ था। प्रिया ने भी खुद को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया, उसकी उंगलियाँ रूहान के बालों में उलझ गईं, और उसके शरीर में एक मीठी-सी आग सुलगने लगी।
चुंबन गहरा होता गया, और उनके होठों के बीच वासना की एक अनकही भाषा ने आकार लिया। रूहान के हाथ अब प्रिया के गाउन के नीचे सरक चुके थे, उसकी मुलायम त्वचा को सहलाते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। प्रिया ने एक आह भरी जब उसके हाथ उसके स्तनों को थामे, उन्हें अपनी अंगुलियों के बीच हल्के से दबाया। उसकी कामुकता चरम पर थी, और हर स्पर्श एक नई चिंगारी पैदा कर रहा था।
“आज यह बारिश की रात का उत्तेजक रोमांस हमें कहीं नहीं जाने देगा,” रूहान ने उसके कान में फुसफुसाया, और प्रिया ने सहमति में सिर हिलाया। उसने रूहान के शर्ट के बटन खोल दिए, उसके गर्म, मजबूत सीने को छूते हुए। उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और उनकी देह की गर्मी ने कमरे की ठंडी हवा को चुनौती दे रखी थी। उनके कपड़े एक-एक करके ज़मीन पर गिरते गए, और कुछ ही पलों में वे दोनों एक-दूसरे के सामने पूरी तरह नग्न खड़े थे, उनकी आँखें एक-दूसरे में अपने भविष्य को तलाश रही थीं।
रूहान ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। मुलायम चादरें उनके जलते शरीरों को और भी उत्तेजित कर रही थीं। उसकी आँखें प्रिया के पूरे शरीर पर घूम रही थीं, हर वक्र, हर उभार, हर निशान को निहार रही थीं। वह अपनी प्यास बुझाने को बेताब था। प्रिया ने अपनी टांगें हल्की सी फैलाईं, उसे और करीब आने का निमंत्रण दे रही थीं।
उसने प्रिया की जांघों के बीच अपनी जगह बनाई, और धीरे-धीरे उसके अंतरंग अंगों पर अपने होठों को उतारा। प्रिया की सिसकियाँ कमरे में गूँज उठीं, उसकी पीठ बिस्तर में धँस गई। उसकी उंगलियाँ रूहान के बालों में उलझी हुई थीं, उसे और गहराई से खींच रही थीं। रूहान ने अपनी जीभ से उसके हर संवेदनशील हिस्से को छुआ, प्रिया के शरीर में बिजली सी दौड़ गई।
“रूहान… मैं… अब और नहीं रुक सकती,” प्रिया ने हाँफते हुए कहा, उसकी आँखों में वासना की आग साफ दिख रही थी।
रूहान ने उसकी बात सुनी, और फिर एक गहरी साँस लेकर, उसने धीरे-धीरे खुद को प्रिया में समाहित कर दिया। एक क्षण के लिए दोनों ने आँखें बंद कर लीं, इस दिव्य मिलन की अनुभूति को महसूस करते हुए। फिर रूहान ने धीरे-धीरे कमर थिरकाना शुरू किया। हर धक्के के साथ, उनकी आत्माएँ और करीब आती गईं। बाहर की बारिश और भीतर की आग, दोनों मिलकर एक अद्भुत धुन बजा रही थीं।
उनकी गति बढ़ती गई, उनके शरीर एक लय में ढल गए, और कमरे में उनके प्यार की सिसकियाँ और आहें भर गईं। रूहान की हर ज़ोरदार थिरकन प्रिया को स्वर्ग की ओर ले जा रही थी, और वह भी उतने ही जोश के साथ उसका साथ दे रही थी। “और… तेज़… रूहान!” प्रिया ने चीखते हुए कहा, उसकी आवाज में चरम सुख की इच्छा थी।
रूहान ने उसकी बात मानी, और कुछ ही पलों में, दोनों के शरीर काँपने लगे, एक साथ चरम सुख के अथाह सागर में डूब गए। उनकी साँसें भारी थीं, और उनके शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे, पसीने से भीगे हुए। बाहर की बारिश अब हल्की पड़ चुकी थी, पर उनके भीतर की आग अभी भी दहक रही थी। यह बारिश की रात का उत्तेजक रोमांस था, जिसने उन्हें एक-दूसरे में पूरी तरह से खो जाने का मौका दिया था, एक ऐसी रात जिसका जादू उनकी आत्माओं में हमेशा के लिए कैद हो गया था।
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