आज की उमस भरी रात में राधिका का तन-मन बेकाबू हो रहा था, अमित की छुअन के लिए तरस रहा था। बाहर बारिश की बूँदें खिड़की से टकरा रही थीं, और अंदर उनके दिल की धड़कनें तूफान मचा रही थीं। अमित ने दरवाज़ा बंद किया और उसकी ओर बढ़ा, उसकी आँखों में वही बेकरारी थी जो राधिका के भीतर धधक रही थी।
“आज तुम कमाल लग रही हो, मेरी राधा,” अमित ने फुसफुसाते हुए कहा, उसके रेशमी बालों को अपने उंगलियों में समेटते हुए। राधिका के गाल गुलाबी हो गए। उसने अपने पल्लू को थोड़ा और नीचे सरका दिया, जिससे उसके भरे-पूरे वक्ष का ऊपरी हिस्सा और भी प्रलोभित करने लगा। यह बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार ही था जो उन्हें एक-दूसरे की तरफ खींच रहा था, एक ऐसी प्यास जिसे सिर्फ एक-दूसरे की देह का अमृत ही बुझा सकता था।
अमित ने उसके करीब आकर उसके होठों पर एक गहरा चुम्बन अंकित किया। राधिका की साँसें तेज़ हो गईं, और उसने अपनी आँखें मूँद लीं। उनके होठों का मिलन इतना तीव्र था कि जैसे दो सूखे रेगिस्तानों ने अचानक बारिश को गले लगा लिया हो। अमित के होंठ उसकी निचली होंठों को चूसने लगे, और राधिका के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उसकी उंगलियाँ अमित की चौड़ी कमर पर सरकती गईं, और उसने उसे और कसकर अपनी ओर खींच लिया।
अमित के हाथ धीरे-धीरे उसकी कमर से होते हुए उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाते हुए, उसके सुडौल स्तनों पर जा टिके। राधिका के भीतर एक बिजली सी दौड़ गई। उसकी उंगलियाँ उसके मुलायम वक्षों को सहलाने लगीं, और राधिका ने अपने सिर को पीछे की ओर झुका लिया, अपनी गर्दन को अमित के चुम्बनों के लिए पेश करते हुए। अमित ने उसकी गर्दन पर, उसके कान के पीछे, और फिर उसके संवेदनशील कंधे पर अनगिनत चुम्बन किए। हर चुम्बन एक नई आग सुलगा रहा था।
“आज तो मुझे तुम में ही समा जाना है, राधा,” अमित की आवाज़ भारी हो चुकी थी। उसने राधिका को धीरे से बिस्तर पर धकेला, और उसके ऊपर झुक गया। राधिका ने अपनी बाहें अमित के गले में डाल लीं, और उसकी आँखों में डूब गई। उसने धीरे-धीरे अपनी साड़ी और ब्लाउज को उतारना शुरू किया, अमित की मदद से, और फिर अमित ने भी अपने वस्त्र उतार दिए। दोनों के नग्न शरीर एक-दूसरे के सामने थे, वासना की आग में तपते हुए।
अमित ने राधिका के पूरे शरीर पर अपने होंठों से एक रास्ता बनाया – उसके पेट पर, उसकी नाभि के इर्द-गिर्द, उसकी जाँघों पर। राधिका का तन-बदन एक अजीब सी कंपकंपी से भर गया था। उसकी रूह तक अमित की छुअन को महसूस कर रही थी। अमित ने जब उसके अंतरंग अंगों को सहलाना शुरू किया, तो राधिका के मुँह से सिसकियाँ फूट पड़ीं। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, दर्द और आनंद का मिश्रण।
फिर आया वो पल जिसकी दोनों को सबसे ज़्यादा चाहत थी। अमित ने धीरे-धीरे अपने आप को राधिका में समाहित किया। शुरुआत में एक हल्की सी तड़प हुई, फिर उसके शरीर ने अमित को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। उनके हर स्पर्श में, हर आह में, बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार अपनी चरम सीमा पर था। दोनों के शरीर एक लय में ढल गए थे, जैसे दो आत्माएं एक होकर एक ब्रह्मांड का निर्माण कर रही हों। अमित की हर गति राधिका को एक नए शिखर पर ले जा रही थी, और राधिका की हर प्रतिक्रिया उसे और ज़्यादा जुनून से भर रही थी। उनकी साँसें एक हो चुकी थीं, उनके पसीने की बूँदें एक-दूसरे में मिल रही थीं।
कुछ पल बाद, जब दोनों एक दूसरे की बाहों में पूरी तरह से ढीले पड़ गए, तो हवा में एक मीठी-सी संतुष्टि तैर रही थी। उनकी देहें थकी हुई थीं, लेकिन उनकी आत्माएं शांत और तृप्त थीं। अमित ने राधिका के माथे पर एक आखिरी चुम्बन किया। “मुझे तुमसे बहुत प्यार है, मेरी राधा,” उसने फुसफुसाया। राधिका ने जवाब में उसे और कसकर गले लगा लिया, जानते हुए कि बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार उन्हें हमेशा यूँ ही एक-दूसरे में बांधे रखेगा। आज उन्होंने फिर से बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार महसूस किया था, जो उनके रिश्ते की नींव था। वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए, अपनी संतुष्टि भरी साँसों के साथ, सुबह का इंतज़ार कर रहे थे।
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