आज फिर रीना भाभी की आँखें तरुण के पीछे-पीछे घूम रही थीं, जैसे कोई प्यासी मृगी पानी की तलाश में हो। दोपहर का समय था, घर में सन्नाटा पसरा हुआ था और उनके पति, रमेश, हमेशा की तरह दफ्तर में व्यस्त थे। रीना की जवानी भरी देह में एक अजीब सी बेचैनी थी, एक अनकही प्यास जो उनके पति की अनुपस्थिति में और भी बढ़ जाती थी। तरुण, उनका देवर, अभी-अभी कॉलेज से लौटा था और अपने कमरे में जाकर लेट गया था। उसकी मर्दाना देह, उसकी युवा ऊर्जा, और उसकी आँखों में कभी-कभी झलकती शरारत रीना के मन को हमेशा विचलित कर जाती थी। यह वही **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** था, जिसकी चिंगारी रीना के भीतर धीरे-धीरे सुलग रही थी।
रीना रसोई में कुछ काम कर रही थीं, पर उनका मन बिल्कुल नहीं लग रहा था। उन्होंने जान-बूझकर तरुण के कमरे के पास जाकर आवाज़ लगाई, “तरुण, प्यासे होगे ना? मैं तुम्हारे लिए शिकंजी बना लाती हूँ।” तरुण ने आलस भरे अंदाज़ में जवाब दिया, “हाँ भाभी, ला दो।” रीना एक गिलास शिकंजी लेकर तरुण के कमरे में गईं। तरुण सिर्फ एक लोअर में बेड पर लेटा था, उसकी छाती और बाहें खुली थीं, जिन पर पसीने की हल्की परत चमक रही थी। रीना की नज़रें उसकी मजबूत छाती पर टिक गईं।
गिलास तरुण के हाथ में देते हुए रीना की उँगलियाँ तरुण की उँगलियों से छू गईं। एक हल्की सी सिहरन दोनों के जिस्म में दौड़ गई। तरुण की शरारती आँखों ने रीना की झुकी पलकों के पीछे छुपी चाहत को भांप लिया था। रीना का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। तरुण ने गिलास एक ओर रखा और अचानक रीना का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया। रीना एक पल को हिचकिचाई, उसके होंठों पर हल्की चीख थी, पर तरुण के मजबूत हाथों ने उसे कस कर पकड़ लिया। “भाभी, आपकी आँखों में जो प्यास मैंने देखी है, वो सिर्फ इस शिकंजी से नहीं बुझने वाली,” तरुण ने फुसफुसाते हुए कहा, और उसके होंठ रीना के नर्म, भरे हुए होंठों पर ऐसे टूट पड़े, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को बेताब हों।
रीना की साँसें उखड़ गईं, उसका शरीर एक पल के लिए अकड़ गया, फिर धीरे-धीरे तरुण की बाँहों में ढीला पड़ गया। उसकी हथेलियाँ तरुण की पीठ पर कस गईं, उसकी उँगलियाँ तरुण के बालों में उलझ गईं। तरुण के होंठ रीना के मुंह में गहराई तक उतर गए, उसकी ज़बान रीना की ज़बान से ऐसे उलझ गई, जैसे दो बिछड़े प्रेमी सदियों बाद मिल रहे हों। रीना का सिर चकरा रहा था, उसे दुनिया-जहान की कोई सुध नहीं थी। वह पूरी तरह से तरुण के जादू में थी। उसकी नस-नस में एक अनजानी आग जल रही थी। उसका रोम-रोम तरुण के स्पर्श के लिए तड़प रहा था। यह वही **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** था, जिसकी दबी हुई चिंगारी अब ज्वाला बन चुकी थी।
तरुण ने रीना को धीरे से बिस्तर पर धकेल दिया। रीना की साड़ी, ब्लाउज, और पेटीकोट एक-एक करके उसके बदन से अलग होते गए, और जल्द ही वह तरुण के सामने पूरी तरह नग्न थी। उसकी साँसें तेज थीं, आँखें वासना से भरी थीं, और उसके स्तन ज़ोरों से ऊपर-नीचे हो रहे थे। तरुण ने अपनी लोअर भी उतार दी, और अब दोनों के बदन एक-दूसरे के सामने खुले थे, वासना की आग में झुलसने को तैयार। तरुण ने रीना के भरे हुए उभारों को अपने हाथों में लिया और उन्हें सहलाने लगा, उसके होंठ उन पर उतर गए। रीना के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
तरुण धीरे-धीरे नीचे सरका, रीना के पेट को चूमता हुआ, और फिर उसकी भीगी हुई योनि पर अपने होठों को टिका दिया। रीना का बदन थरथरा उठा, उसके हाथों ने तरुण के सिर को अपनी ओर और कस लिया। तरुण की ज़बान की गरमाहट रीना को सातवें आसमान पर ले जा रही थी। रीना चीख उठी, “तरुण… ओह… बस अब और नहीं…”। तरुण ऊपर आया, उसकी आँखें रीना की आँखों में मिलीं। उसने धीरे से अपने उत्तेजित अंग को रीना की भीगी हुई योनि पर टिकाया, और एक गहरे धक्का के साथ अंदर धँस गया। रीना के मुँह से एक मदहोश चीख निकली, और उसने अपने नाखूनों से तरुण की पीठ को खरोंच दिया। दोनों के बदन एक-दूसरे में समा गए। कमरे में सिर्फ उनके बदन के टकराने की आवाज़ें, और रीना की मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ गूँज रही थीं।
दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे, वासना की इस चरम सीमा पर। पसीना टपक रहा था, और साँसें तेज हो चुकी थीं। तरुण हर धक्के के साथ रीना को और भी गहराइयों में ले जा रहा था, और रीना हर बार अपनी कमर उठाकर उसका साथ दे रही थी। कई बार दोनों ने एक-दूसरे को चरम सुख तक पहुंचाया, और हर बार रीना की आँखों में एक नई चमक आ जाती, जैसे उसने आज पहली बार अपनी जवानी की सच्ची प्यास बुझाई हो। जब दोनों शांत हुए, तो रीना तरुण की बाँहों में सिमट कर लेटी थी, उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और तृप्ति थी। उसने धीरे से तरुण के होठों को चूमा, मानो कह रही हो कि यह रात सिर्फ एक शुरुआत थी। **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** अब एक अनकहा, गहरा रिश्ता बन चुका था, जो हमेशा के लिए उनके दिलों में बस गया था।
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