गर्मी से उबलते उस दोपहर में, रीना की प्यासी निगाहें देवर विशाल पर जाकर टिक गईं, जिसने अभी-अभी नहाकर अपनी गीली शर्ट कंधे पर टांग रखी थी और उसके सुडौल, कसे हुए बदन पर पानी की बूंदें किसी नगीने सी चमक रही थीं। रीना के तन-बदन में अचानक एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई, जैसे उसके भीतर कोई आग दहक उठी हो।
विशाल, कॉलेज से आया जवान लड़का, रीना के पति के छोटे भाई के रूप में उनके घर में रहता था। पिछले कुछ महीनों से रीना के मन में विशाल के प्रति एक ऐसी भावना जन्म ले रही थी, जिसे वह लाख कोशिशों के बाद भी दबा नहीं पा रही थी। यह सिर्फ स्नेह नहीं था, यह कुछ और था… गहरा, वर्जित और उत्तेजक। मन ही मन उसने स्वीकार किया कि उसे विशाल की युवा देह और मासूमियत दोनों पर गजब का **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** महसूस होता था।
आज जब विशाल रसोई में पानी पीने आया और रीना खाना बना रही थी, तो उनके बीच की दूरी मिटती सी महसूस हुई। विशाल ने गलती से रीना की कमर पर हाथ लगा दिया, जिससे रीना का बदन काँप उठा। विशाल ने झिझक कर हाथ हटाया, उसकी आँखों में माफी थी, पर रीना ने उसकी आँखों में एक अनकही चाहत भी महसूस की। उसके भीतर कुछ टूट सा गया। उसने धीमी आवाज में कहा, “पानी पी लो, विशाल।” उसकी आवाज में इतनी मादकता थी कि विशाल खुद को रोक नहीं पाया। उसने रीना को पलटकर देखा, उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसका हुआ था और उसकी गोरी, भरी हुई कमर झलक रही थी। विशाल की साँसें तेज हो गईं।
रात हुई। घर के बाकी सदस्य किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे और रीना तथा विशाल ही घर में अकेले थे। बाहर चाँदनी की हल्की रोशनी थी, पर घर के भीतर तनाव और उत्तेजना का अँधेरा घना होता जा रहा था। रीना अपने कमरे में लेटी हुई थी, पर उसे नींद कहाँ? विशाल की छवि उसकी आँखों के सामने बार-बार घूम रही थी। उसके मन में एक तूफान सा उठा हुआ था। वह जानती थी कि उसे यह सब रोकना चाहिए, पर उसका मन, उसकी देह अब उसकी नहीं थी।
तभी उसे अपने दरवाजे पर एक हल्की सी दस्तक सुनाई दी। रीना का दिल जोर से धड़क उठा। उसने धीरे से दरवाजा खोला, सामने विशाल खड़ा था। उसकी आँखें लाल थीं, उनमें एक अजीब सी बेचैनी थी। वह कुछ बोल नहीं रहा था, बस रीना को देखे जा रहा था। रीना ने अपनी आवाज में भीगी हुई सी मिठास घोलकर पूछा, “क्या हुआ, विशाल?”
विशाल ने हिम्मत बटोरी और धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। रीना ने महसूस किया कि उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं। यह सिर्फ एक पल की गर्मी नहीं थी, यह था गहरा, अनकहा, और वर्जित **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** जो अब अपनी सीमाएं लांघने को तैयार था। रीना ने आँखें बंद कर लीं और विशाल ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उसके नरम होंठ रीना के गुलाबी होठों से टकराए। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, यह प्यासी आत्माओं का मिलन था, बरसों की दबी हुई हसरतों का विस्फोट था।
विशाल ने रीना को धीरे से अंदर धकेला और दरवाजा बंद कर दिया। उसके हाथ रीना की कमर पर कस गए, और रीना ने अपनी उँगलियाँ विशाल के बालों में फँसा दीं। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुलमिल गईं। विशाल ने रीना की साड़ी खोल दी, एक-एक करके कपड़े उतरते गए, और दोनों एक-दूसरे की बाहों में नग्न हो गए। रीना ने विशाल के मजबूत बदन को अपनी बाँहों में कस लिया, उसकी उँगलियाँ उसकी पीठ पर ऐसे चल रही थीं, जैसे उसे अपने वश में कर लेना चाहती हों।
विशाल ने रीना को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। उसके होंठ रीना के गले, फिर उसके सीने पर, और अंततः उसके उभरे हुए वक्ष पर उतर आए। रीना दर्द और आनंद के मिश्रण से सिसक उठी, उसकी आँखें बंद थीं, और वह बस विशाल को खुद में समा लेने को बेताब थी। विशाल ने रीना के पैरों के बीच जगह बनाई, और धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को रीना की देह में उतारा। रीना ने एक लंबी आह भरी, जैसे बरसों की प्यास बुझ रही हो। उनके शरीर एक-दूसरे में समा गए, एक ऐसी लय में बंध गए जो सिर्फ उनके लिए बनी थी। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और मिलन की मदहोश कर देने वाली आवाजें गूँज रही थीं।
रीना ने विशाल को अपनी बाँहों में कसकर खींच लिया, उसकी हर हरकत में उसे एक अनकहा समर्पण महसूस हुआ। विशाल भी पूरी तरह से उसमें खोया हुआ था, देवर-भाभी की मर्यादाओं की दीवारों को तोड़कर आज वे सिर्फ एक पुरुष और स्त्री थे। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और गहरी होती जा रही थी, जब तक कि दोनों का शरीर एक साथ चरम सुख की ओर नहीं बढ़ गया।
उस क्षण, रीना को लगा जैसे उसके भीतर बरसों से सुलग रही आग बुझ गई हो, इस अदम्य **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** की पराकाष्ठा को छूकर। वे दोनों एक-दूसरे की बाँहों में निढाल पड़े रहे, उनकी साँसें अभी भी तेज थीं, पर मन में एक अनोखी शांति थी। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा और एक हल्की सी मुस्कान का आदान-प्रदान किया। यह मुस्कान सिर्फ संतुष्टि की नहीं थी, यह एक गुप्त करार की थी, जो उनके बीच उस रात की गहराइयों में बुना गया था, एक ऐसा राज जिसे वे हमेशा अपने दिल में छुपाकर रखेंगे।
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