उसकी पसीने से भीगी साड़ी में लिपटी देह, आकाश के सामने एक जलते हुए अंगारे-सी लग रही थी।
दोपहर का सूरज आग बरसा रहा था। रीतु भाभी घर में अकेली, खुली हुई खिड़कियों से आती गर्म हवा से परेशान, बस पंखे की धीमी रफ्तार में सुकून तलाश रही थी। उनके पति, सुनील, शहर से बाहर थे और घर में चुप्पी छाई हुई थी। रीतु ने एक हल्की गुलाबी सूती साड़ी पहनी थी, जिसका पल्लू बार-बार कंधे से सरक रहा था, उनके भरे हुए वक्षों को बेधड़क उजागर करता हुआ। उनकी आँखें कुछ थकी हुई थीं, मगर होंठों पर हल्की-सी लाली अब भी बाकी थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। आकाश था, उनका देवर।
“भाभी, काम था कुछ?” आकाश की आवाज में एक अजीब-सी बेचैनी थी, जो रीतु को हमेशा अपनी ओर खींचती थी।
“आओ आकाश, गर्मी है बहुत। बैठो।” रीतु ने पल्लू संभाला, पर उसकी निगाहें आकाश के मजबूत, पसीने से तर बदन पर ठहर गईं। आकाश के टी-शर्ट में उसकी उठी हुई छाती की मांसपेशियाँ साफ दिख रही थीं, और रीतु को एक पल के लिए अपने भीतर कुछ जलता हुआ महसूस हुआ। रीतु जानती थी, ये केवल देवर-भाभी का रिश्ता नहीं था। पिछले कुछ हफ्तों से, उसे अपने देवर आकाश के प्रति एक अजीब सा खिंचाव महसूस हो रहा था। यह था ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ जिसे वह लाख कोशिशों के बाद भी झुठला नहीं पा रही थी।
आकाश अंदर आया और सोफे पर बैठ गया। उसकी आँखें रीतु की गर्दन से होती हुई, उनके हल्के भीगे हुए वक्षों पर ठहर गईं। रीतु को यह महसूस हुआ और उसके गालों पर हल्की-सी लाली दौड़ गई। उसने जानबूझकर अपनी उंगलियों से साड़ी का पल्लू और खिसकाया, जैसे गर्मी से परेशान हो। “बहुत गर्मी है आज, पानी दूँ?” रीतु की आवाज में एक शरारती सी धीमीपन थी।
“पानी तो नहीं भाभी, पर अगर आप थोड़ा पंखा हिला देतीं…” आकाश ने एक सूखी हंसी के साथ कहा, लेकिन उसकी आँखों में छिपी लालसा रीतु से छिपी नहीं थी। रीतु उठी, और झुककर पंखे की दिशा बदलने लगी। उसके झुकने से ब्लाउज की गहरी neckline में से उसके आधे भरे स्तन आकाश को साफ दिखाई दे गए। आकाश की साँसें तेज हो गईं। रीतु ने सीधी होकर आकाश की ओर देखा, उसकी निगाहें आकाश की बढ़ती हुई साँसों पर ठहर गईं। “क्या हुआ आकाश?” उसने धीरे से पूछा।
आकाश उठा, “कुछ नहीं भाभी। मैं बस… आप बहुत अच्छी लग रही हैं।” उसने यह बात इतनी दबी हुई आवाज में कही, कि रीतु के अंदर एक सिहरन सी दौड़ गई। आकाश के स्पर्श से रीतु का बदन सिहर उठा। उसे महसूस हो रहा था कि यह केवल उसकी कल्पना नहीं थी, ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ अब दोनों की आँखों में साफ झलक रहा था। आकाश ने धीरे से अपना हाथ रीतु के कोमल, पसीने से भरे हाथ पर रख दिया। रीतु ने अपना हाथ हटाया नहीं। उसकी साँसें तेज हो गईं।
आकाश ने रीतु का हाथ धीरे से सहलाया, उसकी उँगलियाँ रीतु की कलाइयों पर घूम गईं। रीतु की आँखें बंद हो गईं, और उसके होंठों से एक हल्की सी आह निकली। “आकाश…” उसने फुसफुसाते हुए कहा। आकाश ने हिम्मत की, और रीतु के करीब आकर, उसके होंठों पर झुक गया। एक गर्म, प्यासा चुंबन। रीतु ने भी कोई प्रतिरोध नहीं किया, बल्कि उसकी बाँहें आकाश की गर्दन के इर्द-गिर्द कस गईं।
उनके होंठ एक दूसरे को बेताबी से चूस रहे थे, उनकी जीभें एक दूसरे से उलझ गईं। आकाश ने रीतु को अपनी बाँहों में भर लिया, और उसे अपने भारी-भरकम बदन से चिपका लिया। रीतु के बदन में आग लग चुकी थी। उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया, और आकाश की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। आकाश ने रीतु को गोद में उठा लिया, और उसे बेडरूम की ओर ले चला।
बेड पर उन्होंने एक दूसरे को कसकर पकड़ा हुआ था। आकाश ने रीतु की साड़ी खोली, और उसे एक तरफ फेंक दिया। रीतु अब केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी, उसके भरे हुए वक्ष आकाश की आँखों में वासना जगा रहे थे। आकाश ने धीरे से रीतु के ब्लाउज के बटन खोले, और उसके गुलाबी निप्पलों को आजाद कर दिया। रीतु की एक चीख निकल गई, जब आकाश ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया, और उसे चूसने लगा। रीतु ने अपनी टाँगें आकाश की कमर पर लपेट लीं।
“आकाश… और… मुझे और चाहिए…” रीतु फुसफुसाई, उसकी आवाज वासना से काँप रही थी। आकाश ने उसके पेटीकोट को भी खींचकर अलग कर दिया, और रीतु अब पूरी तरह नग्न थी, उसका शरीर आकाश के सामने एक देवी-सा लग रहा था। आकाश ने अपने कपड़े भी उतार दिए, और अब दोनों नग्न थे, उनकी त्वचा एक दूसरे को छू रही थी, आग लगा रही थी। आकाश ने रीतु की जांघों को फैलाया, और धीरे से अपने कठोर लिंग को उसकी कामुकता से भरी गुफा में धकेल दिया।
रीतु की एक तेज आह निकल गई, जब आकाश का लिंग पूरी तरह उसके अंदर समा गया। “हाँ… हाँ आकाश… ऐसे ही…” रीतु ने अपनी कमर को उठाना शुरू किया, आकाश के हर धक्के के साथ वह और गहराइयों में उतरती जा रही थी। उनके जिस्मों की धमक, उनकी वासनाभरी आहें, पूरे कमरे में गूँज रही थीं। रीतु को लगा जैसे वह किसी दूसरे लोक में पहुँच गई है, जहाँ केवल सुख और कामुकता है। उनकी साँसों की लय एक हो गई। रीतु ने महसूस किया, ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ ने आज सारी सीमाएं तोड़ दी थीं।
कुछ देर बाद, जब उनके बदन पसीने से लथपथ थे और साँसें तेज चल रही थीं, दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। रीतु ने अपनी बाँहों में आकाश को और कस लिया, उसके होंठों पर एक संतोषभरी मुस्कान थी। आकाश ने रीतु के माथे पर एक चुंबन दिया, और दोनों एक दूसरे में सिमटे हुए, एक सुखद आलस्य में डूब गए। यह सिर्फ एक दोपहर की गर्मी नहीं थी, यह उनकी बेकाबू चाहत का विस्फोट था, जिसकी आग ने उन्हें हमेशा के लिए एक दूसरे से जोड़ दिया था।
Leave a Reply